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28 दिन बाद चली मेट्रो, आधा घंटे में मिला प्रवेश
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28 दिनों बाद चली मेट्रो, एंट्री करने में लग गया आधा घंटा
साहिबाबाद। कोरोना संक्रमण के चलते 10 मई को बंद की गई मेट्रो सोमवार से फिर दौड़ने लगी। पहले दिन स्टेशन पर तो नियमों का लोग पालन करते दिखे, लेकिन बाहर भूल गए। मेट्रो स्टेशन में प्रवेश के लिए लाइन में खड़े लोगों के बीच सामाजिक दूरी दिखाई नहीं दी। सैनिटाइजेशन और थर्मल स्क्रीनिंग के बाद एंट्री करने में 20 से 30 मिनट लग गए। निर्धारित सीट से अतिरिक्त लोगों को मेट्रो में प्रवेश नहीं दिया गया।
सोमवार से दिल्ली अनलॉक हुई तो मेट्रो का संचालन भी शुरू किया गया। सुबह छह बजे पहली मेट्रो वैशाली और नया बस अड्डा मेट्रो स्टेशन से दिल्ली को रवाना हुई। दिल्ली और नोएडा में दफ्तर करने वाले सुबह से ही पहुंचने लगे। मेट्रो में निर्धारित क्षमता के अनुरूप ही स्टेशन पर यात्रियों को एंट्री दी गई। इसकी वजह से वैशाली, कौशांबी, मोहननगर और शहीद स्थल नया बस अड्डे मेट्रो स्टेशन के बाहर लोगों की लाइन लग गई। सुबह सात बजे से 11 बजे तक पीक ऑवर्स में स्टेशन के बाहर लाइन लगी रही। डीएमआरसी के अधिकारियों का कहना है कि पहले दिन मेट्रो में यात्रियों की संख्या काफी कम रही। जैसे जैसे यात्रियों की संख्या बढ़ेगी मेट्रो के फेरे और संख्या को भी बढ़ाया जाएगा।
यात्रियों का कहना
मेट्रो का सफर पहले दिन बिल्कुल अलग रहा। आसानी से सीट मिल गई। हालांकि पहले तो मेट्रो स्टेशन में एंट्री के लिए काफी समय लगा। इसके बाद मेट्रो करीब दस मिनट बाद आई। इसकी वजह से कुछ समय लगा। अब दिल्ली और नोएडा आना जाना आसान रहेगा। अमित कुमार
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दिल्ली शाहदरा किसी काम से गए थे। मेट्रो शुरू होने से सफर आसान लगा। पहले दिन मेट्रो में काफी सख्ती थी। सैनिटाइजेशन के बाद ही एंट्री मिल रही थी। मेट्रो में भी भीड़ कम थी लोग एक सीट छोड़कर बैठ रहे थे। नरेंद्र सिंह
चावड़ी बाजार में मेरा बिजनेस है। पूरा सैनिटाइजेशन के बाद ही एंट्री दी गई। मेट्रो में भी सैनिटाइजेशन किया जा रहा था। साथ ही खड़े होकर सफर करने अनुमति मेट्रो में नहीं थी। - सोनू मल्होत्रा
एक अस्पताल में काम करती हूं। रोजाना आने जाने में दिक्कत हो रही थी। अब आना-जाना आसान हो जाएगा। इस बार मेट्रो में सफर अलग ही है। कोई भीड़ नहीं और कोई भी खड़ा होकर सफर नहीं कर रहा है। तान्या
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साहिबाबाद। कोरोना संक्रमण के चलते 10 मई को बंद की गई मेट्रो सोमवार से फिर दौड़ने लगी। पहले दिन स्टेशन पर तो नियमों का लोग पालन करते दिखे, लेकिन बाहर भूल गए। मेट्रो स्टेशन में प्रवेश के लिए लाइन में खड़े लोगों के बीच सामाजिक दूरी दिखाई नहीं दी। सैनिटाइजेशन और थर्मल स्क्रीनिंग के बाद एंट्री करने में 20 से 30 मिनट लग गए। निर्धारित सीट से अतिरिक्त लोगों को मेट्रो में प्रवेश नहीं दिया गया।
सोमवार से दिल्ली अनलॉक हुई तो मेट्रो का संचालन भी शुरू किया गया। सुबह छह बजे पहली मेट्रो वैशाली और नया बस अड्डा मेट्रो स्टेशन से दिल्ली को रवाना हुई। दिल्ली और नोएडा में दफ्तर करने वाले सुबह से ही पहुंचने लगे। मेट्रो में निर्धारित क्षमता के अनुरूप ही स्टेशन पर यात्रियों को एंट्री दी गई। इसकी वजह से वैशाली, कौशांबी, मोहननगर और शहीद स्थल नया बस अड्डे मेट्रो स्टेशन के बाहर लोगों की लाइन लग गई। सुबह सात बजे से 11 बजे तक पीक ऑवर्स में स्टेशन के बाहर लाइन लगी रही। डीएमआरसी के अधिकारियों का कहना है कि पहले दिन मेट्रो में यात्रियों की संख्या काफी कम रही। जैसे जैसे यात्रियों की संख्या बढ़ेगी मेट्रो के फेरे और संख्या को भी बढ़ाया जाएगा।
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यात्रियों का कहना
मेट्रो का सफर पहले दिन बिल्कुल अलग रहा। आसानी से सीट मिल गई। हालांकि पहले तो मेट्रो स्टेशन में एंट्री के लिए काफी समय लगा। इसके बाद मेट्रो करीब दस मिनट बाद आई। इसकी वजह से कुछ समय लगा। अब दिल्ली और नोएडा आना जाना आसान रहेगा। अमित कुमार
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दिल्ली शाहदरा किसी काम से गए थे। मेट्रो शुरू होने से सफर आसान लगा। पहले दिन मेट्रो में काफी सख्ती थी। सैनिटाइजेशन के बाद ही एंट्री मिल रही थी। मेट्रो में भी भीड़ कम थी लोग एक सीट छोड़कर बैठ रहे थे। नरेंद्र सिंह
चावड़ी बाजार में मेरा बिजनेस है। पूरा सैनिटाइजेशन के बाद ही एंट्री दी गई। मेट्रो में भी सैनिटाइजेशन किया जा रहा था। साथ ही खड़े होकर सफर करने अनुमति मेट्रो में नहीं थी। - सोनू मल्होत्रा
एक अस्पताल में काम करती हूं। रोजाना आने जाने में दिक्कत हो रही थी। अब आना-जाना आसान हो जाएगा। इस बार मेट्रो में सफर अलग ही है। कोई भीड़ नहीं और कोई भी खड़ा होकर सफर नहीं कर रहा है। तान्या