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अधिग्रहीत जमीन पर कब्जा लेने पहुंची पुलिस व किसानों में झड़प
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अधिग्रहीत जमीन पर कब्जा लेने पहुंची पुलिस व किसानों में झड़प
लोनी। घिटोरा गांव के मजरा आलियाबाद में अधिग्रहीत की गई करीब 93 हेक्टेयर जमीन पर सोमवार को कब्जा लेने पहुंचे उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के अफसरों को किसानों का भारी विरोध झेलना पड़ा। यह देख पुलिस ने बलपूर्वक कब्जा लेने की कोशिश की तो किसान भड़क गए। इसके बाद काफी देर तक पुलिस और किसानों में झड़प हुई। इसमें कई किसानों के कपड़े फट गए। पुलिस ने लाठी बरसाकर 18 किसानों को हिरासत में ले लिया लेकिन जमीन पर कब्जा नहीं ले पाई।
यूपीसीडा के अफसरों ने बताया कि 26 मार्च 2010 में बागपत के घिटोरा गांव, पावी और अगरौला गांव के करीब 450 किसानों की आलियाबाद में करीब 93 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई थी। किसान मुआवजा ले चुके हैं लेकिन कब्जा नहीं दे रहे। किसानों का कहना है कि अधिग्रहण 10 शर्तों पर हुआ था। इनका पालन नहीं किया गया। इसलिए, कब्जा नहीं लेने देंगे। पहले भी अफसर बैरंग लौट चुके हैं। घिटोरा गांव बागपत जिले की सीमा में आता है। यह लोनी की सीमा से सटा है।
सोमवार की सुबह यूपीसीडा के अधिकारी लोनी के एसडीएम और लोनी सर्किल के तीन थानों की पुलिस के साथ घिटोरा पहुंचे। अफसरों की चार घंटे किसानों से वार्ता चली। यह विफल हो गई। किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे। इसके बाद दोपहर करीब तीन बजे पुलिस ने किसानों को घेर लिया। प्रशासन की टीम ने जमीन पर कब्जा लेने की कोशिश शुरू कर दी। इसी बीच भाकियू के पदाधिकारी पहुंच गए।
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इन्हें लिया गया हिरासत में
भारतीय किसान यूनियन अंबावत के मेरठ मंडल अध्यक्ष नरेंद्र सिंह, जिला अध्यक्ष गाजियाबाद अमित कसाना, ठाकुर मुकेश सोलंकी, रमन सिंह, रोहित ढाका, अंकित बैंसला, पप्पी प्रधान, बबली खारी, जयनिवास, प्रिंस, विपिन, हरदन, महाराज सिंह, रणवीर, राधेश्याम, राज सिंह, सतपाल को हिरासत में लिया गया है।
जेसीबी चलते ही भड़क गए किसान
वार्ता के बाद यूपीसीडा के अफसरों ने कब्जा लेने के लिए जमीन पर जेसीबी चलवा दी। यह देख किसान भड़क गए और जेसीबी के आगे लेट गए। पुलिस ने उन्हें वहां से हटाने की कोशिश की। इस पर पहले धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया। किसानों का आरोप है कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया। मौके से 18 किसानों को पकड़ लिया गया। उन्हें पुलिस लाइन में रखा गया है। किसानों ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
इसलिए बरपा है हंगामा
किसानों का कहना है कि जिन शर्तो पर अधिग्रहण का करार हुआ, उन्हें यूपीसीडा के अफसर पूरा नहीं कर रहे।
तय हुआ था कि अगर अगले एक वर्ष में किसी और जगह यहां से ज्यादा मुआवजा दिया गया, तो यहां भी वही बढ़ी हुई दर लागू होगी।
जमीन देने वाले किसानों के बच्चों को योग्यता के अनुसार नौकरी दिए जाना भी करार की शर्तों में शामिल था।
यूपीसीडा को घिटोरा गांव का विकास भी करना था, यह भी नहीं किया गया। इसके बावजूद अफसर कब्जा चाहते हैं।
कब्जा नहीं लेने देंगे
भारतीय किसान यूनियन अंबावत के मेरठ मंडल अध्यक्ष नरेंद्र ने बताया कि वह अपनी कमेटी के साथ बैठकर इस लड़ाई की रणनीति बनाएंगे। वह किसानों की लड़ाई को कोर्ट में लेकर जाएंगे। अधिग्रहण की शर्ते पूरी होने तक कब्जा नहीं लेने देंगे।
मुआवजा ले चुके किसान
एसडीएम लोनी संतोष कुमार राय का कहना है कि किसान जमीन का मुआवजा ले चुके हैं। इसके बाद भी विरोध कर रहे हैं। हंगामे के दौरान जेसीबी मशीन का शीशा भी तोड़ गया है। इस पर कार्रवाई की जाएगी।
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लोनी। घिटोरा गांव के मजरा आलियाबाद में अधिग्रहीत की गई करीब 93 हेक्टेयर जमीन पर सोमवार को कब्जा लेने पहुंचे उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के अफसरों को किसानों का भारी विरोध झेलना पड़ा। यह देख पुलिस ने बलपूर्वक कब्जा लेने की कोशिश की तो किसान भड़क गए। इसके बाद काफी देर तक पुलिस और किसानों में झड़प हुई। इसमें कई किसानों के कपड़े फट गए। पुलिस ने लाठी बरसाकर 18 किसानों को हिरासत में ले लिया लेकिन जमीन पर कब्जा नहीं ले पाई।
यूपीसीडा के अफसरों ने बताया कि 26 मार्च 2010 में बागपत के घिटोरा गांव, पावी और अगरौला गांव के करीब 450 किसानों की आलियाबाद में करीब 93 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई थी। किसान मुआवजा ले चुके हैं लेकिन कब्जा नहीं दे रहे। किसानों का कहना है कि अधिग्रहण 10 शर्तों पर हुआ था। इनका पालन नहीं किया गया। इसलिए, कब्जा नहीं लेने देंगे। पहले भी अफसर बैरंग लौट चुके हैं। घिटोरा गांव बागपत जिले की सीमा में आता है। यह लोनी की सीमा से सटा है।
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सोमवार की सुबह यूपीसीडा के अधिकारी लोनी के एसडीएम और लोनी सर्किल के तीन थानों की पुलिस के साथ घिटोरा पहुंचे। अफसरों की चार घंटे किसानों से वार्ता चली। यह विफल हो गई। किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे। इसके बाद दोपहर करीब तीन बजे पुलिस ने किसानों को घेर लिया। प्रशासन की टीम ने जमीन पर कब्जा लेने की कोशिश शुरू कर दी। इसी बीच भाकियू के पदाधिकारी पहुंच गए।
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इन्हें लिया गया हिरासत में
भारतीय किसान यूनियन अंबावत के मेरठ मंडल अध्यक्ष नरेंद्र सिंह, जिला अध्यक्ष गाजियाबाद अमित कसाना, ठाकुर मुकेश सोलंकी, रमन सिंह, रोहित ढाका, अंकित बैंसला, पप्पी प्रधान, बबली खारी, जयनिवास, प्रिंस, विपिन, हरदन, महाराज सिंह, रणवीर, राधेश्याम, राज सिंह, सतपाल को हिरासत में लिया गया है।
जेसीबी चलते ही भड़क गए किसान
वार्ता के बाद यूपीसीडा के अफसरों ने कब्जा लेने के लिए जमीन पर जेसीबी चलवा दी। यह देख किसान भड़क गए और जेसीबी के आगे लेट गए। पुलिस ने उन्हें वहां से हटाने की कोशिश की। इस पर पहले धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया। किसानों का आरोप है कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया। मौके से 18 किसानों को पकड़ लिया गया। उन्हें पुलिस लाइन में रखा गया है। किसानों ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
इसलिए बरपा है हंगामा
किसानों का कहना है कि जिन शर्तो पर अधिग्रहण का करार हुआ, उन्हें यूपीसीडा के अफसर पूरा नहीं कर रहे।
तय हुआ था कि अगर अगले एक वर्ष में किसी और जगह यहां से ज्यादा मुआवजा दिया गया, तो यहां भी वही बढ़ी हुई दर लागू होगी।
जमीन देने वाले किसानों के बच्चों को योग्यता के अनुसार नौकरी दिए जाना भी करार की शर्तों में शामिल था।
यूपीसीडा को घिटोरा गांव का विकास भी करना था, यह भी नहीं किया गया। इसके बावजूद अफसर कब्जा चाहते हैं।
कब्जा नहीं लेने देंगे
भारतीय किसान यूनियन अंबावत के मेरठ मंडल अध्यक्ष नरेंद्र ने बताया कि वह अपनी कमेटी के साथ बैठकर इस लड़ाई की रणनीति बनाएंगे। वह किसानों की लड़ाई को कोर्ट में लेकर जाएंगे। अधिग्रहण की शर्ते पूरी होने तक कब्जा नहीं लेने देंगे।
मुआवजा ले चुके किसान
एसडीएम लोनी संतोष कुमार राय का कहना है कि किसान जमीन का मुआवजा ले चुके हैं। इसके बाद भी विरोध कर रहे हैं। हंगामे के दौरान जेसीबी मशीन का शीशा भी तोड़ गया है। इस पर कार्रवाई की जाएगी।