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कैंडल मार्च निकाल दरिंदों को फांसी देने की मांग

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 03 Dec 2019 01:33 AM IST
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कैंडल मार्च निकाल दरिंदों को फांसी देने की मांग
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साहिबाबाद। हैदराबाद कांड से गुस्साए लोगों ने सोमवार को अमर उजाला अपराजिता के बैनर तले कैंडल मार्च निकालकर नम आंखों से मृतक डॉक्टर महिला को श्रद्धांजलि दी। वसुंधरा सेक्टर-1 में शहीद भगत सिंह पार्क से लेकर चंद्रशेखर पार्क और एमआईजी फ्लैटों से होकर वापस एलआईजी सोसायटी के गेट पर मार्च सम्पन्न हुआ। वहीं, वसुंधरा सेक्टर-4 बी की शिवगंगा सोसायटी में भी महिलाओं ने कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि दी।
लोगों ने कड़े शब्दों में हैदराबाद में डॉक्टर महिला के साथ हुई दरिंदगी की निंदा की। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए। महिलाओं ने आरोप लगाया कि देश व प्रदेश में लचर कानून व्यवस्था के कारण महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। घर से बाहर निकलते ही महिलाएं एवं युवतियां डरने लगती हैं। बच्चे तक सुरक्षित नहीं हैं। दरिंदगी की हद इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि स्कूल व कॉलेज की छात्राएं भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं। अमर उजाला अपराजिता के बैनर तले कैंडल मार्च निकालने वाले लोगों की मांग थी कि दुष्कर्म के अपराधियों को बिना किसी सुनवाई के कोर्ट से फांसी की सजा मिलनी चाहिए। उधर, वसुंधरा सेक्टर-1 एलआईजी फ्लैटों की सोसायटी में बच्चों ने भी कैंडल लेकर घटना पर दुख जताया। उनका कहना था कि सुरक्षा व्यवस्था ठीक ना होने के कारण देश व समाज में घटनाएं दोबारा बढ़ने लगी हैं। दोनों जगहों पर लोगों ने कैंडल मार्च के बाद दो मिनट का मौन भी रखा। इस दौरान पार्षद मंजू त्यागी, उमा सांडिल्य, विवेकानंद पोखरियाल, डीएन तिवारी, वाईपी जौहरी, ओमप्रकाश, राधा तिवारी, निशा तंवर, उर्मिला, मुन्ना लाल, श्रीदेवी, योगेश त्यागी आदि लोग मौजूद रहे।
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कोट
निर्भया कांड के बाद हैदराबाद की घटना ने दिल को झकझोर दिया है। आखिर कब तक समाज ऐसी घटनाओं को सहता रहेगा। आरोपियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। - कैलाश चंद शर्मा
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अमर उजाला अपराजिता के साथ हम एक बेटी को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। देश में महिलाओं के हो रहे अत्याचार और घटनाओं पर सरकार को कड़ा एक्शन लेना होगा। - पूजा त्यागी

ये कैसा समाज है और कैसे लोगों के बीच महिलाएं रह रही हैं। जो रास्ते पर खुद को अकेला चलते हुए महफूज नहीं मानती हैं। यदि कानून सख्त होते तो ये घटनाएं न होती। - उपासना
इस तरह की घटना सुनकर रूह कांप जाती है। सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में रियायत की जरूरत नहीं है। दरिंदों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। - नीलम
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