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दिल्ली से लखनऊ तक सक्रिय है बच्चों का सौदागर गैंग
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दिल्ली से लखनऊ तक सक्रिय है बच्चों का सौदागर गैंग
गाजियाबाद। बच्चों को बेचने वाला गैंग दिल्ली से लेकर प्रदेश की राजधानी तक सक्रिय है। पुलिस की जांच में अब तक सामने आया है कि कुछ बच्चे लखनऊ और कानपुर में भी बेचे गए हैं। दिल्ली-एनसीआर में बच्चों का सौदा एक फर्जी महिला डॉक्टर ने कराया है जो हापुड़-गाजियाबाद की सीमा पर अपना क्लीनिक चलाती है। वहीं, बच्चों को बेचने वाले गैंग में शामिल दिल्ली की कुछ महिलाओं को भी लोनी पुलिस ने हिरासत में लिया है। उनके पूर्व में बेचे गए बच्चों और गैंग में शामिल अन्य लोगों के बारे में पूछताछ की जा रही है।
लोनी थानाक्षेत्र की डाबर तालाब कॉलोनी से 12 मई को चोरी हुए नवजात बच्चे की तलाश में जुटी पुलिस को कई चौंकाने वाले राज हाथ लगे हैं। शुरुआती दौर में पता चला कि बच्चा चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराने वाला दंपती ही बच्चा बेचने के गोरखधंधे में सक्रिय है। पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि इस तरह के कई अन्य पति-पत्नी भी इस धंधे से जुड़े हैं। गाजियाबाद और दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय एजेंट एक फर्जी महिला डॉक्टर के जरिए बच्चों का सौदा करते थे।
अस्पताल में काम सीखकर क्लीनिक चलाने लगी फर्जी डॉक्टर
दिल्ली-एनसीआर में बच्चे बेचने के गोरखधंधे में एजेंट और लाभार्थी के बीच की कड़ी बनने वाली फर्जी डॉक्टर गाजियाबाद और हापुड़ जिले की सीमा पर क्लीनिक चलाती है। शुरू में उसने खुद को डॉक्टर बताया, लेकिन डिग्री नहीं दिखा सकी। उसके अलावा बाद में पता चला कि वह नर्स भी नहीं है। किसी अस्पताल में काम सीखकर उसने क्लीनिक खोल दिया। इसी की आड़ में वह बच्चा बेचने की गोरखधंधे से जुड़ी थी। बताया जा रहा है कि यह फर्जी डॉक्टर बच्चा बेचने वाले कई एजेंट के संपर्क में है।
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कुछ अस्पतालों के शामिल होने के मिल रहे सुराग
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक बच्चा बेचने के गोरखधंधे से दिल्ली-एनसीआर के कुछ अस्पताल भी जुड़े हैं। हालांकि पुलिस का मानना है कि इन अस्पतालों में निचले स्तर के कर्मचारियों की ही भूमिका सामने आ रही है। इन अस्पतालों के डॉक्टर या अस्पताल संचालकों की भूमिका की जांच भी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी बिंदुओं पर मामले की जांच चल रही है। धीरे-धीरे गिरोह से जुड़े हुए सभी लोगों पर शिकंजा कसा जा रहा है।
अभी तक बेटों का सौदा करने की बात आई सामने
पुलिस की जांच में अभी तक यह बात सामने आई है कि गैंग सिर्फ बेटों का सौदा करता है। अभी तक किसी बेटी को बेचने की बात सामने नहीं है। हालांकि, बताया जा रहा है किशोरावस्था में पहुंचने के बाद बेटियों का सौदा किया जाता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी तक इस तरह का कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है, हालांकि सभी पहलुओं पर मामले की जांच की जा रही है।
8 से 9 बच्चे बेच चुका एक ही परिवार
पुलिस की तफ्तीश में गिरोह से जुड़े लोगों की परतें खुलती जा रही हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक एक ऐसा परिवार भी सामने आया है जो 8 से 9 बच्चों को बेच चुका है। इस परिवार में दंपती के अलावा बहनों के बच्चों का भी दलालों के माध्यम से सौदा किया गया है। सुबूत के तौर पर नोटरी कराए गए एफिडेविट भी पुलिस के हाथ लगे हैं। पुलिस के मुताबिक चंद रुपयों की खातिर बच्चों को बेचा गया है।
एसपी ग्रामीण डॉ. ईरज राजा ने बताया कि बच्चों को बेचने वाले गैंग पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। गैंग से जुड़े कुछ लोगों पर शिकंजा कस दिया गया है। कड़ी से कड़ी जोड़ी जा रही है। जल्द ही गिरोह का खुलासा किया जाएगा, जो चौंकाने वाला होगा।
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गाजियाबाद। बच्चों को बेचने वाला गैंग दिल्ली से लेकर प्रदेश की राजधानी तक सक्रिय है। पुलिस की जांच में अब तक सामने आया है कि कुछ बच्चे लखनऊ और कानपुर में भी बेचे गए हैं। दिल्ली-एनसीआर में बच्चों का सौदा एक फर्जी महिला डॉक्टर ने कराया है जो हापुड़-गाजियाबाद की सीमा पर अपना क्लीनिक चलाती है। वहीं, बच्चों को बेचने वाले गैंग में शामिल दिल्ली की कुछ महिलाओं को भी लोनी पुलिस ने हिरासत में लिया है। उनके पूर्व में बेचे गए बच्चों और गैंग में शामिल अन्य लोगों के बारे में पूछताछ की जा रही है।
लोनी थानाक्षेत्र की डाबर तालाब कॉलोनी से 12 मई को चोरी हुए नवजात बच्चे की तलाश में जुटी पुलिस को कई चौंकाने वाले राज हाथ लगे हैं। शुरुआती दौर में पता चला कि बच्चा चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराने वाला दंपती ही बच्चा बेचने के गोरखधंधे में सक्रिय है। पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि इस तरह के कई अन्य पति-पत्नी भी इस धंधे से जुड़े हैं। गाजियाबाद और दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय एजेंट एक फर्जी महिला डॉक्टर के जरिए बच्चों का सौदा करते थे।
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अस्पताल में काम सीखकर क्लीनिक चलाने लगी फर्जी डॉक्टर
दिल्ली-एनसीआर में बच्चे बेचने के गोरखधंधे में एजेंट और लाभार्थी के बीच की कड़ी बनने वाली फर्जी डॉक्टर गाजियाबाद और हापुड़ जिले की सीमा पर क्लीनिक चलाती है। शुरू में उसने खुद को डॉक्टर बताया, लेकिन डिग्री नहीं दिखा सकी। उसके अलावा बाद में पता चला कि वह नर्स भी नहीं है। किसी अस्पताल में काम सीखकर उसने क्लीनिक खोल दिया। इसी की आड़ में वह बच्चा बेचने की गोरखधंधे से जुड़ी थी। बताया जा रहा है कि यह फर्जी डॉक्टर बच्चा बेचने वाले कई एजेंट के संपर्क में है।
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कुछ अस्पतालों के शामिल होने के मिल रहे सुराग
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक बच्चा बेचने के गोरखधंधे से दिल्ली-एनसीआर के कुछ अस्पताल भी जुड़े हैं। हालांकि पुलिस का मानना है कि इन अस्पतालों में निचले स्तर के कर्मचारियों की ही भूमिका सामने आ रही है। इन अस्पतालों के डॉक्टर या अस्पताल संचालकों की भूमिका की जांच भी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी बिंदुओं पर मामले की जांच चल रही है। धीरे-धीरे गिरोह से जुड़े हुए सभी लोगों पर शिकंजा कसा जा रहा है।
अभी तक बेटों का सौदा करने की बात आई सामने
पुलिस की जांच में अभी तक यह बात सामने आई है कि गैंग सिर्फ बेटों का सौदा करता है। अभी तक किसी बेटी को बेचने की बात सामने नहीं है। हालांकि, बताया जा रहा है किशोरावस्था में पहुंचने के बाद बेटियों का सौदा किया जाता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी तक इस तरह का कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है, हालांकि सभी पहलुओं पर मामले की जांच की जा रही है।
8 से 9 बच्चे बेच चुका एक ही परिवार
पुलिस की तफ्तीश में गिरोह से जुड़े लोगों की परतें खुलती जा रही हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक एक ऐसा परिवार भी सामने आया है जो 8 से 9 बच्चों को बेच चुका है। इस परिवार में दंपती के अलावा बहनों के बच्चों का भी दलालों के माध्यम से सौदा किया गया है। सुबूत के तौर पर नोटरी कराए गए एफिडेविट भी पुलिस के हाथ लगे हैं। पुलिस के मुताबिक चंद रुपयों की खातिर बच्चों को बेचा गया है।
एसपी ग्रामीण डॉ. ईरज राजा ने बताया कि बच्चों को बेचने वाले गैंग पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। गैंग से जुड़े कुछ लोगों पर शिकंजा कस दिया गया है। कड़ी से कड़ी जोड़ी जा रही है। जल्द ही गिरोह का खुलासा किया जाएगा, जो चौंकाने वाला होगा।