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नगर निगम अब सर्किल रेट के हिसाब से लेगा अपनी दुकानों का किराया
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नगर निगम
निगम सर्किल रेट के हिसाब से लेगा दुकानों का किराया
गाजियाबाद। नगर निगम की दुकानों का किराया भी अब सर्किल रेट के हिसाब से तय होगा। करीब दो दशक से किराया न बढ़ने के चलते अब नगर निगम अपनी दुकानों का किराया भी संशोधित कर बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। यही नहीं, ऐसी दुकानों से निगम प्रीमियम भी लेगा जो दुकानें अब मूल आवंटियों के पास नहीं हैं। इसके लिए निगम ने सर्वे शुरू कर दिया है और 1279 में से करीब 650 दुकानों पर नंबरिंग भी कर दी है।
कविनगर, विजयनगर, वसुंधरा, मोहननगर और सिटी जोन में निगम की 1279 दुकानें हैं। करीब दो दशकों से इन दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया गया है। अभी भी इन दुकानों का किराया एक हजार से दो हजार तक है, जबकि इन्हीं बाजारों में निजी दुकानों का किराया 10 से 20 हजार रुपये तक है। ऐसे में नगर निगम अब इन दुकानों का किराया बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। नगर निगम दुकानों के किराये में पारदर्शिता लाने के लिए सर्किल रेट और जिला प्रशासन की ओर से तय की गई किराया दर को आधार बनाएगा। 2014 में शहर में 450 रुपये प्रति वर्ग मीटर की किराया दर थी। नगर निगम अब जिला प्रशासन से 2020 की नई किराया दर लेगा। इसके आधार पर किराया निर्धारण किया जाएगा।
मूल आवंटियों ने दूसरों को किराए पर दे दी दुकानें
नगर निगम की अधिकांश दुकानों को मूल आवंटियों ने या तो स्टांप पेपर पर लिखवाकर दूसरों को दे दी हैं, या किराए पर दे दी हैं। नगर निगम ऐसी दुकानों की पहचान कर रहा है। ऐसे शिकमी किराएदारों (मूल आवंटियों से अलग किराएदार) से नगर निगम प्रीमियम भी वसूलेगा। प्रीमियम की रकम का निर्धारण भी सर्किल रेट के हिसाब से तय होगा। जिला प्रशासन की दरों के मुताबिक शहर में फिलहाल किराया दर 70 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर है। इसी आधार पर किराया प्रीमियम तय किया जाएगा।
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कोट
नगर निगम की दुकानों का सर्वे कराया जा रहा है। इनमें से करीब 650 दुकानों पर नंबरिंग भी करा दी गई है। जल्द ही सर्वे पूरा होने के बाद दुकानों का किराया और प्रीमियम तय किया जाएगा।
- महेंद्र सिंह तंवर, नगरायुक्त
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गाजियाबाद। नगर निगम की दुकानों का किराया भी अब सर्किल रेट के हिसाब से तय होगा। करीब दो दशक से किराया न बढ़ने के चलते अब नगर निगम अपनी दुकानों का किराया भी संशोधित कर बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। यही नहीं, ऐसी दुकानों से निगम प्रीमियम भी लेगा जो दुकानें अब मूल आवंटियों के पास नहीं हैं। इसके लिए निगम ने सर्वे शुरू कर दिया है और 1279 में से करीब 650 दुकानों पर नंबरिंग भी कर दी है।
कविनगर, विजयनगर, वसुंधरा, मोहननगर और सिटी जोन में निगम की 1279 दुकानें हैं। करीब दो दशकों से इन दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया गया है। अभी भी इन दुकानों का किराया एक हजार से दो हजार तक है, जबकि इन्हीं बाजारों में निजी दुकानों का किराया 10 से 20 हजार रुपये तक है। ऐसे में नगर निगम अब इन दुकानों का किराया बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। नगर निगम दुकानों के किराये में पारदर्शिता लाने के लिए सर्किल रेट और जिला प्रशासन की ओर से तय की गई किराया दर को आधार बनाएगा। 2014 में शहर में 450 रुपये प्रति वर्ग मीटर की किराया दर थी। नगर निगम अब जिला प्रशासन से 2020 की नई किराया दर लेगा। इसके आधार पर किराया निर्धारण किया जाएगा।
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मूल आवंटियों ने दूसरों को किराए पर दे दी दुकानें
नगर निगम की अधिकांश दुकानों को मूल आवंटियों ने या तो स्टांप पेपर पर लिखवाकर दूसरों को दे दी हैं, या किराए पर दे दी हैं। नगर निगम ऐसी दुकानों की पहचान कर रहा है। ऐसे शिकमी किराएदारों (मूल आवंटियों से अलग किराएदार) से नगर निगम प्रीमियम भी वसूलेगा। प्रीमियम की रकम का निर्धारण भी सर्किल रेट के हिसाब से तय होगा। जिला प्रशासन की दरों के मुताबिक शहर में फिलहाल किराया दर 70 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर है। इसी आधार पर किराया प्रीमियम तय किया जाएगा।
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नगर निगम की दुकानों का सर्वे कराया जा रहा है। इनमें से करीब 650 दुकानों पर नंबरिंग भी करा दी गई है। जल्द ही सर्वे पूरा होने के बाद दुकानों का किराया और प्रीमियम तय किया जाएगा।
- महेंद्र सिंह तंवर, नगरायुक्त