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रिश्वत लेकर बनाया थाने में सीज कार-ट्रक का प्रदूषण सर्टिफिकेट
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थाने में खड़ी कार।
- फोटो : GHAZIABAD City
रिश्वत लेकर बनाया थाने में सीज कार-ट्रक का प्रदूषण सर्टिफिकेट
गाजियाबाद। रेडजोन बने शहर में हवा दमघोंटू हो रही है और वाहनों को बिना जांच पड़ताल के ही पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (पीयूसी सर्टिफिकेट) बांटे जा रहे हैं। ज्ञानी बार्डर के पास बने एक केंद्र ने बिना जांच के ही सिहानी गेट थाने में सीज खड़ी एक कार और ट्रक का पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया। अमर उजाला के स्टिंग में पीयूसी के नाम पर शहर में चल रहे बड़े खेल का खुलासा हुआ है।
अमर उजाला ने शहर के एक थाने में महीनों से सीज खड़े दो वाहनों (एक मिनी ट्रक और एक कार) की नंबर प्लेट की फोटो ली और दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर के उस क्षेत्र का रुख किया, जहां फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने की सूचना मिली थी। बॉर्डर क्षेत्र में एक बूथ संचालक ने तो फोटो के आधार पर प्रमाणपत्र बनाने से इनकार कर दिया, लेकिन अगले पड़ाव पर ऐसा बूथ मिल गया, जहां सिर्फ वाहन के फोटो के आधार पर उन्हें प्रदूषण सर्टिफिकेट जारी किए जाने का खेल चलता मिला। ज्ञानी बॉर्डर के पास ‘सूर्यकरण जनकल्याण समिति’ की ओर से संचालित बूथ पर बैठा युवक फोटो से ही प्रमाणपत्र बनाने पर राजी हो गया। हालांकि इसके लिए उसने सुविधा शुल्क लिया। सुविधा शुल्क लेकर उसे न मोटर व्हीकल एक्ट के नियम याद रहे और न ही यह देखा कि वाहन कहां है। धड़ाधड़ कंप्यूटर से दो प्रमाणपत्र छापकर थमा दिए गए। खास यह है कि बिना जांच किए ही इन वाहनों का प्रदूषण स्तर भी मानकों के मुताबिक ही दर्शाया गया। बताया गया कि दिनभर में करीब 100 से 150 वाहनों के प्रमाणपत्र इसी तरह फोटो के आधार पर यहां से जारी किए जाते हैं।
ऑनलाइन आरसी से नहीं किया जाता वाहनों का मिलान
बस हो, ट्रक हो या कार यहां बिना वाहन लाए ही प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है। कोई भी वाहन चालक किसी के भी वाहन का नंबर और फोटो लेकर इन बूथों पर पहुंच जाता है और उन्हें मिनटों में प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी करा सकता है। न वाहनों की मशीनों से जांच की जाती और न ही ऑनलाइन आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) से वाहन के चेसिस व इंजन नंबर का मिलान किया जाता। बस सुविधा शुल्क दो और किसी भी वाहन का प्रदूषण सर्टिफिकेट ले लो।
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सर्टिफिकेट भी घिरे बड़े सवालों में
पुलिस और संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारी वाहनों की चेकिंग के दौरान पीयूसी सर्टिफिकेट देखकर समझ जाते हैं कि यह वाहन मानकों पर खरा उतर रहा है या नहीं। लेकिन अब प्रदूषण प्रमाणपत्र इस बात का सुबूत बिल्कुल नहीं रहा कि सड़क पर चल रहा वाहन प्रदूषण नियंत्रण के मानकों पर खरा है।
लाखों जिंदगियों से खिलवाड़, एक्ट का उल्लंघन
मोटर व्हीकल एक्ट 115 (2) के मुताबिक पीयूसी के बिना कोई भी वाहन सड़क पर चलाना प्रतिबंधित है। पीयूसी न होने पर पांच हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। नियमानुसार शहर में अधिकृत केंद्रों मशीन द्वारा वाहन से प्रदूषण उत्सर्जन की जांच के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किए जाने चाहिए। इसके उलट सुविधा शुल्क लेकर पुराने और खटारा वाहनों के प्रमाण पत्र बन रहे हैं। देश में सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की सूची टॉप पर रहने वाले गाजियाबाद में प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक है। बीते कई दिनों से भी शहर रेड जोन में है। ऐसे में फर्र्जीवाड़ा करके बांटे जा रहे पीयूसी लाखों लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ है। बृहस्पतिवार को भी गाजियाबाद प्रदूषण के लिहाज से 346 एक्यूआई के साथ देशभर में दूसरे नंबर पर रहा। महीने भर में गाजियाबाद जिला प्रदूषण के मामले में करीब 15 से 20 दिन तक पहले या टॉप थ्री शहरों की सूची में शामिल रहा है।
100 रुपये वाली जांच 150 रुपये में
रिपोर्टर : भइया एक ट्रक का प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाना है।
बूथ संचालक : वाहन कहां हैं।
रिपोर्टर : वाहन तो नहीं है, वह तो ट्रांसपोर्ट पर खड़ा है।
बूथ संचालक : तो।
रिपोर्टर : वाहन का फोटो लाया हूं मोबाइल में।
बूथ संचालक : दिखाओ।
रिपोर्टर : फोटो से बन जाएगा।
बूथ संचालक : दिखाओ तो, बन जाएगा।
रिपोर्टर : कितने रुपये लगेंगे।
बूथ संचालक : 100 रुपये लगते हैं, वही दे देना।
रिपोर्टर : ठीक है, भइया एक कार का भी प्रमाणपत्र बनवाना है।
बूथ संचालक : ठीक है बन जाएगा।
रिपोर्टर : उसके कितने रुपये लगेंगे।
बूथ संचालक : उसके 150 रुपये लगेंगे।
रिपोर्टर : ऐसा क्यों, ट्रक के 100 और कार के 150 रुपये।
बूथ संचालक : अरे बनवा लो, कार का प्रमाणपत्र दिल्ली में भी एक साल तक चलेगा।
रिपोर्टर : अच्छा ठीक है बना दो दोनों।
बूथ संचालक : लाओ 250 रुपये।
एआरटीओ, प्रशासन विश्वजीत सिंह ने बताया कि वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट बनाने की प्रक्रिया ऑनलाइन हो चुकी है। बूथ संचालक बिना वाहन के प्रमाण पत्र नहीं बना सकते हैं। अगर ऐसा हो रहा है तो नियमों को तोड़ने वाले बूथ संचालकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए औचक निरीक्षण भी किया जाएगा।
एसपी ट्रैफिक रामानंद कुशवाहा ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था परिवहन विभाग के अधीन आती है। पुलिस के स्तर से चेकिंग में मिलने वाले संदिग्ध प्रमाण पत्रों की जांच कराई जाएगी। संदिग्ध मिलने पर वाहनों की दोबारा प्रदूषण नियंत्रण जांच भी कराई जाएगी। अगर प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए तो बनाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
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गाजियाबाद। रेडजोन बने शहर में हवा दमघोंटू हो रही है और वाहनों को बिना जांच पड़ताल के ही पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (पीयूसी सर्टिफिकेट) बांटे जा रहे हैं। ज्ञानी बार्डर के पास बने एक केंद्र ने बिना जांच के ही सिहानी गेट थाने में सीज खड़ी एक कार और ट्रक का पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया। अमर उजाला के स्टिंग में पीयूसी के नाम पर शहर में चल रहे बड़े खेल का खुलासा हुआ है।
अमर उजाला ने शहर के एक थाने में महीनों से सीज खड़े दो वाहनों (एक मिनी ट्रक और एक कार) की नंबर प्लेट की फोटो ली और दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर के उस क्षेत्र का रुख किया, जहां फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने की सूचना मिली थी। बॉर्डर क्षेत्र में एक बूथ संचालक ने तो फोटो के आधार पर प्रमाणपत्र बनाने से इनकार कर दिया, लेकिन अगले पड़ाव पर ऐसा बूथ मिल गया, जहां सिर्फ वाहन के फोटो के आधार पर उन्हें प्रदूषण सर्टिफिकेट जारी किए जाने का खेल चलता मिला। ज्ञानी बॉर्डर के पास ‘सूर्यकरण जनकल्याण समिति’ की ओर से संचालित बूथ पर बैठा युवक फोटो से ही प्रमाणपत्र बनाने पर राजी हो गया। हालांकि इसके लिए उसने सुविधा शुल्क लिया। सुविधा शुल्क लेकर उसे न मोटर व्हीकल एक्ट के नियम याद रहे और न ही यह देखा कि वाहन कहां है। धड़ाधड़ कंप्यूटर से दो प्रमाणपत्र छापकर थमा दिए गए। खास यह है कि बिना जांच किए ही इन वाहनों का प्रदूषण स्तर भी मानकों के मुताबिक ही दर्शाया गया। बताया गया कि दिनभर में करीब 100 से 150 वाहनों के प्रमाणपत्र इसी तरह फोटो के आधार पर यहां से जारी किए जाते हैं।
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ऑनलाइन आरसी से नहीं किया जाता वाहनों का मिलान
बस हो, ट्रक हो या कार यहां बिना वाहन लाए ही प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है। कोई भी वाहन चालक किसी के भी वाहन का नंबर और फोटो लेकर इन बूथों पर पहुंच जाता है और उन्हें मिनटों में प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी करा सकता है। न वाहनों की मशीनों से जांच की जाती और न ही ऑनलाइन आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) से वाहन के चेसिस व इंजन नंबर का मिलान किया जाता। बस सुविधा शुल्क दो और किसी भी वाहन का प्रदूषण सर्टिफिकेट ले लो।
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पुलिस और संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारी वाहनों की चेकिंग के दौरान पीयूसी सर्टिफिकेट देखकर समझ जाते हैं कि यह वाहन मानकों पर खरा उतर रहा है या नहीं। लेकिन अब प्रदूषण प्रमाणपत्र इस बात का सुबूत बिल्कुल नहीं रहा कि सड़क पर चल रहा वाहन प्रदूषण नियंत्रण के मानकों पर खरा है।
लाखों जिंदगियों से खिलवाड़, एक्ट का उल्लंघन
मोटर व्हीकल एक्ट 115 (2) के मुताबिक पीयूसी के बिना कोई भी वाहन सड़क पर चलाना प्रतिबंधित है। पीयूसी न होने पर पांच हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। नियमानुसार शहर में अधिकृत केंद्रों मशीन द्वारा वाहन से प्रदूषण उत्सर्जन की जांच के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किए जाने चाहिए। इसके उलट सुविधा शुल्क लेकर पुराने और खटारा वाहनों के प्रमाण पत्र बन रहे हैं। देश में सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की सूची टॉप पर रहने वाले गाजियाबाद में प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक है। बीते कई दिनों से भी शहर रेड जोन में है। ऐसे में फर्र्जीवाड़ा करके बांटे जा रहे पीयूसी लाखों लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ है। बृहस्पतिवार को भी गाजियाबाद प्रदूषण के लिहाज से 346 एक्यूआई के साथ देशभर में दूसरे नंबर पर रहा। महीने भर में गाजियाबाद जिला प्रदूषण के मामले में करीब 15 से 20 दिन तक पहले या टॉप थ्री शहरों की सूची में शामिल रहा है।
100 रुपये वाली जांच 150 रुपये में
रिपोर्टर : भइया एक ट्रक का प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाना है।
बूथ संचालक : वाहन कहां हैं।
रिपोर्टर : वाहन तो नहीं है, वह तो ट्रांसपोर्ट पर खड़ा है।
बूथ संचालक : तो।
रिपोर्टर : वाहन का फोटो लाया हूं मोबाइल में।
बूथ संचालक : दिखाओ।
रिपोर्टर : फोटो से बन जाएगा।
बूथ संचालक : दिखाओ तो, बन जाएगा।
रिपोर्टर : कितने रुपये लगेंगे।
बूथ संचालक : 100 रुपये लगते हैं, वही दे देना।
रिपोर्टर : ठीक है, भइया एक कार का भी प्रमाणपत्र बनवाना है।
बूथ संचालक : ठीक है बन जाएगा।
रिपोर्टर : उसके कितने रुपये लगेंगे।
बूथ संचालक : उसके 150 रुपये लगेंगे।
रिपोर्टर : ऐसा क्यों, ट्रक के 100 और कार के 150 रुपये।
बूथ संचालक : अरे बनवा लो, कार का प्रमाणपत्र दिल्ली में भी एक साल तक चलेगा।
रिपोर्टर : अच्छा ठीक है बना दो दोनों।
बूथ संचालक : लाओ 250 रुपये।
एआरटीओ, प्रशासन विश्वजीत सिंह ने बताया कि वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट बनाने की प्रक्रिया ऑनलाइन हो चुकी है। बूथ संचालक बिना वाहन के प्रमाण पत्र नहीं बना सकते हैं। अगर ऐसा हो रहा है तो नियमों को तोड़ने वाले बूथ संचालकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए औचक निरीक्षण भी किया जाएगा।
एसपी ट्रैफिक रामानंद कुशवाहा ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था परिवहन विभाग के अधीन आती है। पुलिस के स्तर से चेकिंग में मिलने वाले संदिग्ध प्रमाण पत्रों की जांच कराई जाएगी। संदिग्ध मिलने पर वाहनों की दोबारा प्रदूषण नियंत्रण जांच भी कराई जाएगी। अगर प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए तो बनाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।