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नामांकन में दी गलत जानकारी... भाजपा के पार्षद आशुतोष की सदस्यता निरस्त
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नामांकन में दी गलत जानकारी... भाजपा के पार्षद आशुतोष की सदस्यता निरस्त
गाजियाबाद। अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश नेत्रपाल सिंह की अदालत ने वार्ड-83 (राजेंद्र नगर) के भाजपा पार्षद आशुतोष शर्मा की सदस्यता को निरस्त कर दिया है। उन्होंने 2017 के चुनाव में नामांकन पत्र में गलत जानकारी दी थी। अदालत ने अपने आदेश में दूसरे स्थान पर रहीं निर्दलीय कुसुम सिंह को पार्षद घोषित करने और चुनाव संपन्न कराने वाले अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई का आदेश भी दिया है।
चार साल चली सुनवाई के दौरान यह साबित हो गया कि आशुतोष का नाम मतदाता सूची में वार्ड - 83 के साथ दिल्ली के विश्वास नगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज था। नियम के अनुसार नाम एक ही मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए। उन्होंने अपनी संपत्ति का अधूरा ब्योरा दिया था। कुसुम सिंह ने 2018 में इसकी शिकायत चुनाव आयोग में की थी। साथ ही कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले में 16 गवाह पेश किए गए। कुसुम सिंह ने याचिका में कहा था कि आशुतोष का निवार्चन शून्य घोषित किया जाए।
भाजपा ने ऐन वक्त पर बदला था उम्मीदवार
कुसुम सिंह ने बताया कि 2017 में हुए नगर निगम के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उनको वार्ड संख्या 83 से पार्षद प्रत्याशी घोषित किया था। नामांकन के दिन तक उनका नाम भाजपा मुख्यालय की ओर से जारी सूची में था। वह नामांकन करने के बाद सिंबल के इंतजार में थीं। उनके पास तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय का फोन आया और बताया गया कि उन्हें ही लड़ाया जा रहा है लेकिन इसी बीच तत्कालीन भाजपा महानगर अध्यक्ष अजय शर्मा ने आशुतोष शर्मा को सिंबल दिला दिया।
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27 वोट से जीते थे आशुतोष
ऐसे में आशुतोष शर्मा ने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और कुसुम सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ीं। 26 नवंबर 2017 को चुनाव संपन्न हुआ और तीन दिसंबर 2017 को नतीजे घोषित किए गए। चुनाव परिणाम में आशुतोष को 2229 और कुसुम को 2202 मत प्राप्त हुए। 27 मतों की जीत से आशुतोष शर्मा को पार्षद घोषित कर दिया गया। कुसुम सिंह का कहना है कि कोर्ट के फैसले से वह काफी खुश है। देर से ही सही पर न्याय तो मिला।
जांच कर कार्रवाई के आदेश
कोर्ट ने नामांकन कराने और नामांकन पत्रों की जांच करने वाले तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। कुसुम सिंह की याचिका पर कोर्ट ने तत्कालीन आरओ राजेश कु मार चंदेल को भी पक्षकार बनाया था। राजेश उस समय वाणिज्यकर विभाग में डिप्टी कमिश्नर थे। राजेश की ओर से कोर्ट में जवाब दाखिल किया जा चुका है।
दो दिन के अंदर दिलाई जाएगी शपथ
नगर आयुक्त महेंद्र सिंह ने बताया कि कोर्ट का आदेश मिल चुका है। दो दिन के अंदर कुसुम सिंह को पार्षद पद की शपथ दिला दी जाएगी। आशुतोष शर्मा की सदस्यता शून्य घोषित कर दी गई है।
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गाजियाबाद। अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश नेत्रपाल सिंह की अदालत ने वार्ड-83 (राजेंद्र नगर) के भाजपा पार्षद आशुतोष शर्मा की सदस्यता को निरस्त कर दिया है। उन्होंने 2017 के चुनाव में नामांकन पत्र में गलत जानकारी दी थी। अदालत ने अपने आदेश में दूसरे स्थान पर रहीं निर्दलीय कुसुम सिंह को पार्षद घोषित करने और चुनाव संपन्न कराने वाले अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई का आदेश भी दिया है।
चार साल चली सुनवाई के दौरान यह साबित हो गया कि आशुतोष का नाम मतदाता सूची में वार्ड - 83 के साथ दिल्ली के विश्वास नगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज था। नियम के अनुसार नाम एक ही मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए। उन्होंने अपनी संपत्ति का अधूरा ब्योरा दिया था। कुसुम सिंह ने 2018 में इसकी शिकायत चुनाव आयोग में की थी। साथ ही कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले में 16 गवाह पेश किए गए। कुसुम सिंह ने याचिका में कहा था कि आशुतोष का निवार्चन शून्य घोषित किया जाए।
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भाजपा ने ऐन वक्त पर बदला था उम्मीदवार
कुसुम सिंह ने बताया कि 2017 में हुए नगर निगम के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उनको वार्ड संख्या 83 से पार्षद प्रत्याशी घोषित किया था। नामांकन के दिन तक उनका नाम भाजपा मुख्यालय की ओर से जारी सूची में था। वह नामांकन करने के बाद सिंबल के इंतजार में थीं। उनके पास तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय का फोन आया और बताया गया कि उन्हें ही लड़ाया जा रहा है लेकिन इसी बीच तत्कालीन भाजपा महानगर अध्यक्ष अजय शर्मा ने आशुतोष शर्मा को सिंबल दिला दिया।
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27 वोट से जीते थे आशुतोष
ऐसे में आशुतोष शर्मा ने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और कुसुम सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ीं। 26 नवंबर 2017 को चुनाव संपन्न हुआ और तीन दिसंबर 2017 को नतीजे घोषित किए गए। चुनाव परिणाम में आशुतोष को 2229 और कुसुम को 2202 मत प्राप्त हुए। 27 मतों की जीत से आशुतोष शर्मा को पार्षद घोषित कर दिया गया। कुसुम सिंह का कहना है कि कोर्ट के फैसले से वह काफी खुश है। देर से ही सही पर न्याय तो मिला।
जांच कर कार्रवाई के आदेश
कोर्ट ने नामांकन कराने और नामांकन पत्रों की जांच करने वाले तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। कुसुम सिंह की याचिका पर कोर्ट ने तत्कालीन आरओ राजेश कु मार चंदेल को भी पक्षकार बनाया था। राजेश उस समय वाणिज्यकर विभाग में डिप्टी कमिश्नर थे। राजेश की ओर से कोर्ट में जवाब दाखिल किया जा चुका है।
दो दिन के अंदर दिलाई जाएगी शपथ
नगर आयुक्त महेंद्र सिंह ने बताया कि कोर्ट का आदेश मिल चुका है। दो दिन के अंदर कुसुम सिंह को पार्षद पद की शपथ दिला दी जाएगी। आशुतोष शर्मा की सदस्यता शून्य घोषित कर दी गई है।