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रेड एपल मामला: बैंक अधिकारियों से एक फ्लैट पर दो बार ऋण देने पर मांगा जवाब
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रेड एपल मामला: बैंक अधिकारियों से एक फ्लैट पर दो बार ऋण देने पर मांगा जवाब
गाजियाबाद। रेड एपल के प्रोजेक्ट में फ्लैट बेचने के नाम पर की गई 200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने अब बैंक अधिकारियों को फिर से घेर लिया है। पुलिस ने पहले बैंक अधिकारियों से पूछा था कि प्रोजेक्ट में लोन किस आधार पर दिया गया तो पुलिस को जवाब मिला कि जीडीए से नक्शा पास था। बैंक अधिकारी अपनी गलती मानने को इनकार कर दिया था लेकिन पुलिस ने अब बैंक अधिकारियों से एक फ्लैट पर दो बार ऋण पास होने पर जवाब मांगा है।
रेड एपल के बिल्डर राजकुमार जैन समेत उसके परिवार से सदस्यों के खिलाफ नंदग्राम थाने में 110 से अधिक केस दर्ज हो चुके हैं। इनमें सात मामलों में पीड़ितों ने जीडीए को आरोपी ठहराया है जबकि अन्य मामलों में बिल्डर और बैंक अधिकारी भी हैं। पुलिस अब तक नौ आरोपियों को जेल भेज चुकी है। सीओ सिटी प्रथम अंशू जैन का कहना है कि धोखाधड़ी में ईओडब्लू को जांच भेजी जा रही है हालांकि बैंक अधिकारियों से ऋण पास करने के बारे में जानकारी मांगी जा रही है।
एक और एफआईआर हुई दर्ज
200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले नंदग्राम थाने में बैंक अधिकारी और बिल्डर के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज हुई है। दिल्ली शाहदरा निवासी मुक्ता बंसल का आरोप है कि बिल्डर प्रोजेक्ट को जीडीए से अप्रूव्ड बताकर धोखाधड़ी की, वहीं बैंक अधिकारियों ने भी प्रोजेक्ट को प्रमोशन करके लोन दिया। उन्होंने एक फ्लैट की बुकिंग करके 3.17 लाख रुपये दे दिए। बिल्डर ने इस पर लोन ले लिया लेकिन उन्हें नहीं बताया।
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मुक्ता का कहना है कि फ्लैट की बुकिंग के दौरान बिल्डर और बैंक अधिकारियों ने उनसे नो ईएमआई टिल पजेशन स्कीम की बात बोली। इसके लिए उन्होंने दो बार में बिल्डर को 3.17 लाख रुपये दे दिए। कुछ समय बाद बैंक की ओर से उन्हें नोटिस दिया गया कि बिल्डर ने उनके फ्लैट पर लोन लिया है जिसकी किस्त वो नहीं चुका रहा जिन्हें तुम्हें चुकानी पड़ेगी। जानकारी करने पर उन्हें नहीं बताया कि बिल्डर ने कितने रुपये का लोन लिया है। आरोप है कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से बिल्डर ने धोखाधड़ी की है। मामले में राजकुमार जैन, प्रतीक जैन, विजयंत जैन, अक्षय कुमार समेत बैंक अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। नंदग्राम थाना प्रभारी का कहना है कि मामले की जांच एसआईटी कर रही है जो एफआईआर दर्ज हो रही हैं। उनकी जानकारी एसआईटी को दी जा रही है।
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गाजियाबाद। रेड एपल के प्रोजेक्ट में फ्लैट बेचने के नाम पर की गई 200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने अब बैंक अधिकारियों को फिर से घेर लिया है। पुलिस ने पहले बैंक अधिकारियों से पूछा था कि प्रोजेक्ट में लोन किस आधार पर दिया गया तो पुलिस को जवाब मिला कि जीडीए से नक्शा पास था। बैंक अधिकारी अपनी गलती मानने को इनकार कर दिया था लेकिन पुलिस ने अब बैंक अधिकारियों से एक फ्लैट पर दो बार ऋण पास होने पर जवाब मांगा है।
रेड एपल के बिल्डर राजकुमार जैन समेत उसके परिवार से सदस्यों के खिलाफ नंदग्राम थाने में 110 से अधिक केस दर्ज हो चुके हैं। इनमें सात मामलों में पीड़ितों ने जीडीए को आरोपी ठहराया है जबकि अन्य मामलों में बिल्डर और बैंक अधिकारी भी हैं। पुलिस अब तक नौ आरोपियों को जेल भेज चुकी है। सीओ सिटी प्रथम अंशू जैन का कहना है कि धोखाधड़ी में ईओडब्लू को जांच भेजी जा रही है हालांकि बैंक अधिकारियों से ऋण पास करने के बारे में जानकारी मांगी जा रही है।
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एक और एफआईआर हुई दर्ज
200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले नंदग्राम थाने में बैंक अधिकारी और बिल्डर के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज हुई है। दिल्ली शाहदरा निवासी मुक्ता बंसल का आरोप है कि बिल्डर प्रोजेक्ट को जीडीए से अप्रूव्ड बताकर धोखाधड़ी की, वहीं बैंक अधिकारियों ने भी प्रोजेक्ट को प्रमोशन करके लोन दिया। उन्होंने एक फ्लैट की बुकिंग करके 3.17 लाख रुपये दे दिए। बिल्डर ने इस पर लोन ले लिया लेकिन उन्हें नहीं बताया।
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मुक्ता का कहना है कि फ्लैट की बुकिंग के दौरान बिल्डर और बैंक अधिकारियों ने उनसे नो ईएमआई टिल पजेशन स्कीम की बात बोली। इसके लिए उन्होंने दो बार में बिल्डर को 3.17 लाख रुपये दे दिए। कुछ समय बाद बैंक की ओर से उन्हें नोटिस दिया गया कि बिल्डर ने उनके फ्लैट पर लोन लिया है जिसकी किस्त वो नहीं चुका रहा जिन्हें तुम्हें चुकानी पड़ेगी। जानकारी करने पर उन्हें नहीं बताया कि बिल्डर ने कितने रुपये का लोन लिया है। आरोप है कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से बिल्डर ने धोखाधड़ी की है। मामले में राजकुमार जैन, प्रतीक जैन, विजयंत जैन, अक्षय कुमार समेत बैंक अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। नंदग्राम थाना प्रभारी का कहना है कि मामले की जांच एसआईटी कर रही है जो एफआईआर दर्ज हो रही हैं। उनकी जानकारी एसआईटी को दी जा रही है।