{"_id":"6a3ebe54a08e86be1e00f487","slug":"gbd-ghaziabad-news-c-30-gbd1036-917716-2026-06-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: अधिभार हटाया तो उपभोक्ताओं के वापस होंगे 125 करोड़ रुपये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: अधिभार हटाया तो उपभोक्ताओं के वापस होंगे 125 करोड़ रुपये
विज्ञापन
गाजियाबाद। ईंधन अधिभार की राशि जमा करने वाले बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक और राहत भरी खबर है। नियामक आयोग ने ऊर्जा निगम के जून माह में भेजे गए बिलों पर 10 फीसदी ईंधन अधिभार को ही गलत नहीं माना बल्कि उसने बीते 14 माह में वसूले गए अधिभार को भी अनुचित बताया। 14 माह के अधिभार की धनराशि यदि वापस होती है तो जिले के साढ़े 11 लाख उपभोक्ताओं को इसका सीधा फायदा होगा। इन उपभोक्ताओं के 14 माह में जमा किए गए 125 करोड़ रुपये आने वाले महीनों के बिलों में समायोजित करके भेजे जाएंगे।
नियामक आयोग की यह टिप्पणी ऐसे वक्त में आई जब स्मार्ट मीटर के मुददे पर उपभोक्ताओं में नाराजगी थी। मई माह का जो बिल जून में उपभोक्ताओं को मिला है, उसमें 10 फीसदी अधिभार जोड़कर भेजा गया है। साढ़े 11 लाख उपभोक्ताओं ने जून के बिल में 45 करोड़ रुपये अतिरिक्त चुकाए हैं। उपभोक्ता राजीव खुराना ने बताया कि उपभोक्ताओं पर कई प्रकार के अधिभार जोड़कर निगम परेशान कर रहा है। उपभोक्ता को घुमाने की बजाय सीधा यह बताने की जरूरत है कि उनसे कुल कितनी धनराशि ली जा रही है। कितने उपभोक्ता ऐसे हैं, जो बिलों को देखते ही नहीं है न वह मिलान करते हैं। अनजाने में उनको क्या भेजा जा रहा है, क्या नहीं, किसी को नहीं पता। इस बारे में ऊर्जा निगम के मुख्य अभियंता अनिल कुमार सिंह ने बताया कि अभी यह तय नहीं हो पाया है कि अधिभार वापस होगा या नहीं। ऐसे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। शासन का जो आदेश मिलेगा, उसका पालन किया जाएगा। वैसे ईंधन अधिभार की हर महीने अलग-अलग दरें तय की जाती हैं। बीते एक साल का ही आंकड़ा देखें तो कभी यह दर 10 फीसदी प्लस में रही तो कभी यह माइनस में भी रही है। यानी ऊर्जा निगम ने माइनस की स्थिति में उतने फीसदी राशि कम करके बिलों में भेजी है।
विज्ञापन
नियामक आयोग की यह टिप्पणी ऐसे वक्त में आई जब स्मार्ट मीटर के मुददे पर उपभोक्ताओं में नाराजगी थी। मई माह का जो बिल जून में उपभोक्ताओं को मिला है, उसमें 10 फीसदी अधिभार जोड़कर भेजा गया है। साढ़े 11 लाख उपभोक्ताओं ने जून के बिल में 45 करोड़ रुपये अतिरिक्त चुकाए हैं। उपभोक्ता राजीव खुराना ने बताया कि उपभोक्ताओं पर कई प्रकार के अधिभार जोड़कर निगम परेशान कर रहा है। उपभोक्ता को घुमाने की बजाय सीधा यह बताने की जरूरत है कि उनसे कुल कितनी धनराशि ली जा रही है। कितने उपभोक्ता ऐसे हैं, जो बिलों को देखते ही नहीं है न वह मिलान करते हैं। अनजाने में उनको क्या भेजा जा रहा है, क्या नहीं, किसी को नहीं पता। इस बारे में ऊर्जा निगम के मुख्य अभियंता अनिल कुमार सिंह ने बताया कि अभी यह तय नहीं हो पाया है कि अधिभार वापस होगा या नहीं। ऐसे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। शासन का जो आदेश मिलेगा, उसका पालन किया जाएगा। वैसे ईंधन अधिभार की हर महीने अलग-अलग दरें तय की जाती हैं। बीते एक साल का ही आंकड़ा देखें तो कभी यह दर 10 फीसदी प्लस में रही तो कभी यह माइनस में भी रही है। यानी ऊर्जा निगम ने माइनस की स्थिति में उतने फीसदी राशि कम करके बिलों में भेजी है।
विज्ञापन