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पूर्व सहायक पोस्टमास्टर पर 30 लाख का जुर्माना, चार साल की कैद
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
Updated Fri, 16 Dec 2016 01:08 AM IST
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court shimla
बंगाल से लूट और चोरी के करीब 87.72 लाख रुपये के राष्ट्रीय बचत पत्रों (एनएससी) का भुगतान करने के मामले में सीबीआई कोर्ट ने जेवर के तत्कालीन सहायक पोस्टमास्टर पुनीत कुमार को 30 लाख रुपये जुर्माने और चार साल कैद की सजा सुनाई है।
विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने बीते मंगलवार को ही आरोपी को दोषी करार दिया था। यह घोटाला ग्रेटर नोएडा के जेवर पोस्ट आफिस से संबंधित है। तत्कालीन सहायक पोस्ट मास्टर पुनीत कुमार को सीबीआई ने इस मामले में आरोपी बनाया था।
सीबीआई के लोक अभियोजक अनुराग मोदी के अनुसार 24 अप्रैल 2006 से 30 जून 2007 के बीच किए गए इस गड़बड़झाले में सीबीआई ने 23 जुलाई 2012 को एफआईआर दर्ज की थी। बृहस्पतिवार को मामले में सजा पर बहस शुरू हुई।
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डिफेंस का कहना था कि अभियुक्त के पिता की मृत्यु हो चुकी है और उसके परिवार में मां, पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है। अभियुक्त सड़क हादसे में स्थायी रूप से विकलांग भी हो चुका है। ऐसे में उसे कम से कम सजा दी जाए।
सीबीआई लोक अभियोजक का कहना था कि अभियुक्त ने बडे़ पैमाने पर करीब 87 लाख रुपये के घोटाले को अंजाम दिया है। उसी के अनुसार इसे दंडित किया जाए। बहस पूरी होने के बाद विशेष कोर्ट ने दोषी को 30 लाख रुपये जुर्माने और चार साल कैद की सजा सुनाई। जुर्माना न अदा करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
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विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने बीते मंगलवार को ही आरोपी को दोषी करार दिया था। यह घोटाला ग्रेटर नोएडा के जेवर पोस्ट आफिस से संबंधित है। तत्कालीन सहायक पोस्ट मास्टर पुनीत कुमार को सीबीआई ने इस मामले में आरोपी बनाया था।
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सीबीआई के लोक अभियोजक अनुराग मोदी के अनुसार 24 अप्रैल 2006 से 30 जून 2007 के बीच किए गए इस गड़बड़झाले में सीबीआई ने 23 जुलाई 2012 को एफआईआर दर्ज की थी। बृहस्पतिवार को मामले में सजा पर बहस शुरू हुई।
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डिफेंस का कहना था कि अभियुक्त के पिता की मृत्यु हो चुकी है और उसके परिवार में मां, पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है। अभियुक्त सड़क हादसे में स्थायी रूप से विकलांग भी हो चुका है। ऐसे में उसे कम से कम सजा दी जाए।
सीबीआई लोक अभियोजक का कहना था कि अभियुक्त ने बडे़ पैमाने पर करीब 87 लाख रुपये के घोटाले को अंजाम दिया है। उसी के अनुसार इसे दंडित किया जाए। बहस पूरी होने के बाद विशेष कोर्ट ने दोषी को 30 लाख रुपये जुर्माने और चार साल कैद की सजा सुनाई। जुर्माना न अदा करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।