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Rampur News: रामपुर में बिना मानकों के दौड़ रही स्कूली बसों पर कार्रवाई, 37 के चालान
Sat, 12 Sep 2026 12:59 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Sat, 12 Sep 2026 12:59 AM IST
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रामपुर। नियमों को धता बताकर अभी भी कई स्कूल बसें सड़कों पर बिना मानकों के दौड़ रही हैं। परिवहन विभाग इन पर कार्रवाई भी कर रहा है, बावजूद इसके सुधार नहीं हो रहा है। सात से नौ सितंबर तक चले ऑपरेशन कवच के दौरान 37 चालान किए गए, जबकि 11 बसों को सीज किया जा चुका है। इन पर 2.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है।
मौजूदा समय में जिले में 3149 स्कूली वाहन हैं। ये वाहन रोजाना स्कूली बच्चों को घरों से स्कूल तक लाने-ले जाने का काम करते हैं। ऐसे में इन बसों में सुरक्षात्मक नियमों का पालन बेहद जरूरी है। कुछ महीने पहले परिवहन विभाग ने इस मामले में सख्ती करते हुए स्कूल वाहन निगरानी पोर्टल बनाया था, जिसमें सभी स्कूल संचालकों को अपने वाहनों की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करनी थी। इसके बाद इनकी जांच की गई थी।
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स्कूल बसों में इन नियमों का पालन जरूरी
स्कूली बसों के संचालन को लेकर निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। इनमें बस का पीले रंग में होना, आगे और पीछे ‘स्कूल ड्यूटी’ लिखा होना तथा खिड़कियों के बाहर सुरक्षा के लिए लोहे की ग्रिल लगी होना शामिल है। बस में अग्निशमन यंत्र होना चाहिए और स्कूल का नाम व फोन नंबर भी स्पष्ट रूप से अंकित होना जरूरी है।
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थानेवार बनी है सूची
विभाग की ओर से स्कूली बसों पर नजर रखने के लिए थाना वार सूची बनाई जा चुकी है, जिसकी मदद से बिना फिटनेस के दौड़ रही बसों पर नजर रखी जा सकेगी।
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क्या हैं नियम--
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार स्कूल बस पीले रंग से पेंट होनी चाहिए।
बस के आगे-पीछे स्कूल ड्यूटी लिखा हो।
सभी खिड़कियों के बाहर लोहे की ग्रिल होनी चाहिए।
अग्निशमन यंत्र लगा होना चाहिए।
स्कूल का नाम और फोन नंबर होना चाहिए।
दरवाजे में ताला लगा हो और सीटों के बीच पर्याप्त जगह होनी चाहिए।
चालक को कम से कम पांच साल का वाहन चलाने का अनुभव होना चाहिए।
वर्जन-
स्कूली बसों पर नियमित शिकंजा कसा जा रहा है। जो बसें सड़कों पर बिना नियमों के चलते दिखती हैं, उन पर कार्रवाई की जा रही है। अभियान चलाकर एक बार फिर कार्रवाई की जाएगी। -राजेश श्रीवास्तव, एआरटीओ प्रशासन, रामपुर
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मौजूदा समय में जिले में 3149 स्कूली वाहन हैं। ये वाहन रोजाना स्कूली बच्चों को घरों से स्कूल तक लाने-ले जाने का काम करते हैं। ऐसे में इन बसों में सुरक्षात्मक नियमों का पालन बेहद जरूरी है। कुछ महीने पहले परिवहन विभाग ने इस मामले में सख्ती करते हुए स्कूल वाहन निगरानी पोर्टल बनाया था, जिसमें सभी स्कूल संचालकों को अपने वाहनों की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करनी थी। इसके बाद इनकी जांच की गई थी।
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स्कूल बसों में इन नियमों का पालन जरूरी
स्कूली बसों के संचालन को लेकर निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। इनमें बस का पीले रंग में होना, आगे और पीछे ‘स्कूल ड्यूटी’ लिखा होना तथा खिड़कियों के बाहर सुरक्षा के लिए लोहे की ग्रिल लगी होना शामिल है। बस में अग्निशमन यंत्र होना चाहिए और स्कूल का नाम व फोन नंबर भी स्पष्ट रूप से अंकित होना जरूरी है।
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थानेवार बनी है सूची
विभाग की ओर से स्कूली बसों पर नजर रखने के लिए थाना वार सूची बनाई जा चुकी है, जिसकी मदद से बिना फिटनेस के दौड़ रही बसों पर नजर रखी जा सकेगी।
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क्या हैं नियम
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार स्कूल बस पीले रंग से पेंट होनी चाहिए।
बस के आगे-पीछे स्कूल ड्यूटी लिखा हो।
सभी खिड़कियों के बाहर लोहे की ग्रिल होनी चाहिए।
अग्निशमन यंत्र लगा होना चाहिए।
स्कूल का नाम और फोन नंबर होना चाहिए।
दरवाजे में ताला लगा हो और सीटों के बीच पर्याप्त जगह होनी चाहिए।
चालक को कम से कम पांच साल का वाहन चलाने का अनुभव होना चाहिए।
वर्जन-
स्कूली बसों पर नियमित शिकंजा कसा जा रहा है। जो बसें सड़कों पर बिना नियमों के चलते दिखती हैं, उन पर कार्रवाई की जा रही है। अभियान चलाकर एक बार फिर कार्रवाई की जाएगी। -राजेश श्रीवास्तव, एआरटीओ प्रशासन, रामपुर