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दिखाएं समझदारी.. बच्चों को न लगे ड्रग्स की बीमारी
ब्यूरो,अमर उजाला इंदिरापुरम।
Updated Sun, 24 Jul 2016 12:34 AM IST
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वैभव खंड निवासी सुनीता (परिवर्तित नाम) का हाईस्कूल में पढ़ रहा बेटा ड्रग्स का शिकार कब हो गया उन्हें पता ही नहीं चला। बेटे केे बहुत ज्यादा गुस्सा आने और घंटों अपने कमरे में अकेले रहने पर सुनीता को शक हुआ।
नजर रखने लगीं तो पता चला कि उनके घर के गेट पर ही आकर कुछ युवक बेटे को पुड़िया दे जाते थे, उसके बाद वह घंटों कमरे में बंद रहता था। बेटे को डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि वह गांजा लेने लगा था, अब उसका इलाज चल रहा है।
आइए जानते हैं कि किन शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक बदलावों से आप आसानी से समझते सकते हैं कि आपका बच्चे को ड्रग्स की लत तो नहीं।
- शारीरिक बदलाव पर दें ध्यान
1. आंखों का लाल और पुतलियों का सामान्य से छोटा या बड़ा होना
2. सूंघकर ड्रग्स लेने से अक्सर नाक से खून बहने लगता है
3. भूख और सोने के पैटर्न में बदलाव, वजन का बढ़ना या घटना।
4. रहन सहन पर ध्यान देना बंद कर देना।
5. शरीर पर चोट, जिनके बारे में पता ही नहीं हो कि कैसे लगी
6. कांपना, बेतुका एवं अस्पष्ट बोलना
- व्यवहार में परिवर्तन आना
1. कक्षा में अनुपस्थिति, खराब अंक और स्कूल में विवादों का बढ़ना
2. हॉबीज, खेल और एक्स्ट्रा एक्टिविटीज में हिस्सा नहीं लेना
3. टीचर्स, सुपरवाइजर और क्लासमेंट की ओर से आने वाली शिकायतों का बढ़ाना
4. घर से पैसों का चोरी होना या उधार लेने की बात सामने आना
5. अलग-थलग रहना, चुप रहना, गोपनीय और रहस्यमय व्यवहार
6. परिवार में नियमों और कायदों को लेकर अधिक झगड़ना
7. दरवाजे बंद रखना, आंख नहीं मिलाना और प्राइवेसी की मांग करना
8. दोस्तों, घूमने की जगहों और हॉबीज में अचानक बदलाव
9. परफ्यूम और रूम एयर फ्रेशनर का अधिक इस्तेमाल
- मनोवैज्ञानिक बदलावों को नजरअंदाज न करें
1. व्यक्तित्व और व्यवहार में अचानक बदलाव
2. मूड बदल जाना, चिड़चिड़ापन और बेवजह हंसना या गुस्सा करना
3. बेवजह अधिक सक्रिय होना या विरोध करना
4. फोकस नहीं होना, अधिक सुस्ती होना, कई बार नहाना
5. बेवजह डरना, उत्सुकता या पागलों जैसी हरकतें करना
- शरीर में जाने पर क्या करती है ड्रग्स
डा. शशांक शुक्ला ने बताया कि ड्रग्स एक केमिकल या पदार्थ है, जो हमारे शरीर के सामान्य तौर पर काम करने के तरीके को बदल देती है। इन्हें आमतौर पर निगलकर, सूंघकर या इंजेक्ट कर इस्तेमाल किया जाता है, जो हमारी ब्लडस्ट्रीम तक पहुंच जाती है। ब्लडस्ट्रीम के जरिए दिमाग और शरीर के अन्य भागों तक ये पहुंच जाती है। दिमाग अलर्ट नहीं रहता है और निर्णय लेने की क्षमता खत्म हो जाती है।
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- उत्सुकता कराती है शुरुआत, मजा डालता है आदत
जितनी तरह की ड्रग्स उपलब्ध हैं, उनके लेने की वजह भी उतनी ही हैं। युवा अवस्था में उत्सुकता ड्रग्स की शुरुआत करा देती है और मजा आने से ही आदत पड़ जाती है। डा. अशोक तिवारी ने बताया कि कुछ सिर्फ मजे के लिए ड्रग्स लेते हैं, तो कुछ को लगता है कि ड्रग्स लेने के बाद वक्त बेहद अच्छा गुजरता है।
कुछ समझते हैं कि बगैर ड्रग्स लिए वे बेहतर सोच ही नहीं सकते हैं, तो कुछ को तनाव से दूर रहने के लिए ड्रग्स चाहिए। ज्यादातर लोग जो ड्रग्स लेते हैं, वे डिप्रेशन का शिकार हैं। उन्हें समस्याओं से भागने का विकल्प ड्रग्स लगता है।
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नजर रखने लगीं तो पता चला कि उनके घर के गेट पर ही आकर कुछ युवक बेटे को पुड़िया दे जाते थे, उसके बाद वह घंटों कमरे में बंद रहता था। बेटे को डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि वह गांजा लेने लगा था, अब उसका इलाज चल रहा है।
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आइए जानते हैं कि किन शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक बदलावों से आप आसानी से समझते सकते हैं कि आपका बच्चे को ड्रग्स की लत तो नहीं।
- शारीरिक बदलाव पर दें ध्यान
1. आंखों का लाल और पुतलियों का सामान्य से छोटा या बड़ा होना
2. सूंघकर ड्रग्स लेने से अक्सर नाक से खून बहने लगता है
3. भूख और सोने के पैटर्न में बदलाव, वजन का बढ़ना या घटना।
4. रहन सहन पर ध्यान देना बंद कर देना।
5. शरीर पर चोट, जिनके बारे में पता ही नहीं हो कि कैसे लगी
6. कांपना, बेतुका एवं अस्पष्ट बोलना
- व्यवहार में परिवर्तन आना
1. कक्षा में अनुपस्थिति, खराब अंक और स्कूल में विवादों का बढ़ना
2. हॉबीज, खेल और एक्स्ट्रा एक्टिविटीज में हिस्सा नहीं लेना
3. टीचर्स, सुपरवाइजर और क्लासमेंट की ओर से आने वाली शिकायतों का बढ़ाना
4. घर से पैसों का चोरी होना या उधार लेने की बात सामने आना
5. अलग-थलग रहना, चुप रहना, गोपनीय और रहस्यमय व्यवहार
6. परिवार में नियमों और कायदों को लेकर अधिक झगड़ना
7. दरवाजे बंद रखना, आंख नहीं मिलाना और प्राइवेसी की मांग करना
8. दोस्तों, घूमने की जगहों और हॉबीज में अचानक बदलाव
9. परफ्यूम और रूम एयर फ्रेशनर का अधिक इस्तेमाल
- मनोवैज्ञानिक बदलावों को नजरअंदाज न करें
1. व्यक्तित्व और व्यवहार में अचानक बदलाव
2. मूड बदल जाना, चिड़चिड़ापन और बेवजह हंसना या गुस्सा करना
3. बेवजह अधिक सक्रिय होना या विरोध करना
4. फोकस नहीं होना, अधिक सुस्ती होना, कई बार नहाना
5. बेवजह डरना, उत्सुकता या पागलों जैसी हरकतें करना
- शरीर में जाने पर क्या करती है ड्रग्स
डा. शशांक शुक्ला ने बताया कि ड्रग्स एक केमिकल या पदार्थ है, जो हमारे शरीर के सामान्य तौर पर काम करने के तरीके को बदल देती है। इन्हें आमतौर पर निगलकर, सूंघकर या इंजेक्ट कर इस्तेमाल किया जाता है, जो हमारी ब्लडस्ट्रीम तक पहुंच जाती है। ब्लडस्ट्रीम के जरिए दिमाग और शरीर के अन्य भागों तक ये पहुंच जाती है। दिमाग अलर्ट नहीं रहता है और निर्णय लेने की क्षमता खत्म हो जाती है।
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- उत्सुकता कराती है शुरुआत, मजा डालता है आदत
जितनी तरह की ड्रग्स उपलब्ध हैं, उनके लेने की वजह भी उतनी ही हैं। युवा अवस्था में उत्सुकता ड्रग्स की शुरुआत करा देती है और मजा आने से ही आदत पड़ जाती है। डा. अशोक तिवारी ने बताया कि कुछ सिर्फ मजे के लिए ड्रग्स लेते हैं, तो कुछ को लगता है कि ड्रग्स लेने के बाद वक्त बेहद अच्छा गुजरता है।
कुछ समझते हैं कि बगैर ड्रग्स लिए वे बेहतर सोच ही नहीं सकते हैं, तो कुछ को तनाव से दूर रहने के लिए ड्रग्स चाहिए। ज्यादातर लोग जो ड्रग्स लेते हैं, वे डिप्रेशन का शिकार हैं। उन्हें समस्याओं से भागने का विकल्प ड्रग्स लगता है।