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Ghaziabad News: अंसल के अधिकारियों ने नहीं की सुनवाई, लोगों ने चंदा लेकर बनवाई सड़कें
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संवाद न्यूज एजेंसी
गाजियाबाद। अंसल समूह के निदेशकों और प्रतिनिधि कईसाल बाद भी डूंडाहेड़ा स्थित सुशांत एक्वापोलिस के लोगों को मूलभूत सुविधा नहीं दे सके। कॉलोनी के लोगों ने 25 लाख रुपये चंदा इकट्ठा कर दो सड़कों का निर्माण कराया। इतना ही नहीं कॉलोनी के लोगों से बिजली बिल जमा करने के नाम पर 45 लाख रुपये वसूला गया जो जमा नहीं किया गया। बिल बकाया होने से ऊर्जा निगम ने कॉलोनी की लाइन काट दी। लोगों ने फिर से चंदा इकट्ठा कर अपने-अपने निजी बिजली कनेक्शन लगवाए।
सुशांत एक्वापोलिस रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेश सिंह ने बताया कि 2006 से अब तक लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सोसायटी में सीवर लाइन, पेयजल की पाइपलाइन, पानी की टंकी, सड़कें और बाउंड्रीवाल तक की सुविधा नहीं है। बताया कि दर्जनों बार समूह प्रबंधन और प्राधिकरण में शिकायत की गई, इसके बावजूद भी सुविधाओं से वंचित रहे। बताया कि लोगों ने चंदा एकत्र कर 25 लाख रुपये की लागत से दो सड़कों का निर्माण कराया है। 13 रुपये प्रति वर्ग मीटर मेंटेनेंस चार्ज वसूला जा रहा है। मेंटेनेंस चार्ज न देने पर कानूनी नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
लोगों ने समय पर बिजली का बिल दिया, इसके बाद भी 45 लाख रुपये बकाया बताकर ऊर्जा निगम ने कॉलोनी का कनेक्शन काट दिया। पता चला कि अंसल समूह के प्रतिनिधियों ने लोगों से रुपये लेने के बाद भी बिल जमा नहीं किया। ऐसे में लोगों ने ऊर्जा निगम से एस्टीमेट बनवाकर बिजली के निजी कनेक्शन कराए। ग्रीन बेल्ट के पार्क भी प्लॉटिंग करके बेच दिए गए। दो पार्कों की देखरेख के लिए एक भी कर्मचारी नहीं हैं। आरोप है कि शिकायत करने पर मेंटेनेंस कार्यालय में तैनात बाउंसर लोगों से अभद्रता करते हैं।
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-प्राधिकरण के 18 नोटिस का नहीं दिया जवाब-
सुशांत एक्वापोलिस कॉलोनी के लोगों ने बताया कि उन्होंने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में कई बार प्रदर्शन कर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। जिसके बाद प्राधिकरण ने अंसल समूह के निदेशकों को अलग-अलग दिन में 18 नोटिस जारी किए। कालोनाइजर ने एक भी नोटिस का जवाब नहीं दिया। अध्यक्ष बृजेश सिंह ने बताया कि उन्होंने आईजीआरएस पोर्टल पर 16 बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एसोसिएशन अध्यक्ष बृजेश सिंह ने बताया कि अंसल समूह के निदेशकों पर हुई एफआईआर से कॉलोनी के लोगों को कुछ हासिल नहीं होगा। मूलभूत सुविधाओं के लिए जल्द ही वह विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से मिलेंगे।
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गाजियाबाद। अंसल समूह के निदेशकों और प्रतिनिधि कईसाल बाद भी डूंडाहेड़ा स्थित सुशांत एक्वापोलिस के लोगों को मूलभूत सुविधा नहीं दे सके। कॉलोनी के लोगों ने 25 लाख रुपये चंदा इकट्ठा कर दो सड़कों का निर्माण कराया। इतना ही नहीं कॉलोनी के लोगों से बिजली बिल जमा करने के नाम पर 45 लाख रुपये वसूला गया जो जमा नहीं किया गया। बिल बकाया होने से ऊर्जा निगम ने कॉलोनी की लाइन काट दी। लोगों ने फिर से चंदा इकट्ठा कर अपने-अपने निजी बिजली कनेक्शन लगवाए।
सुशांत एक्वापोलिस रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेश सिंह ने बताया कि 2006 से अब तक लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सोसायटी में सीवर लाइन, पेयजल की पाइपलाइन, पानी की टंकी, सड़कें और बाउंड्रीवाल तक की सुविधा नहीं है। बताया कि दर्जनों बार समूह प्रबंधन और प्राधिकरण में शिकायत की गई, इसके बावजूद भी सुविधाओं से वंचित रहे। बताया कि लोगों ने चंदा एकत्र कर 25 लाख रुपये की लागत से दो सड़कों का निर्माण कराया है। 13 रुपये प्रति वर्ग मीटर मेंटेनेंस चार्ज वसूला जा रहा है। मेंटेनेंस चार्ज न देने पर कानूनी नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
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लोगों ने समय पर बिजली का बिल दिया, इसके बाद भी 45 लाख रुपये बकाया बताकर ऊर्जा निगम ने कॉलोनी का कनेक्शन काट दिया। पता चला कि अंसल समूह के प्रतिनिधियों ने लोगों से रुपये लेने के बाद भी बिल जमा नहीं किया। ऐसे में लोगों ने ऊर्जा निगम से एस्टीमेट बनवाकर बिजली के निजी कनेक्शन कराए। ग्रीन बेल्ट के पार्क भी प्लॉटिंग करके बेच दिए गए। दो पार्कों की देखरेख के लिए एक भी कर्मचारी नहीं हैं। आरोप है कि शिकायत करने पर मेंटेनेंस कार्यालय में तैनात बाउंसर लोगों से अभद्रता करते हैं।
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-प्राधिकरण के 18 नोटिस का नहीं दिया जवाब-
सुशांत एक्वापोलिस कॉलोनी के लोगों ने बताया कि उन्होंने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में कई बार प्रदर्शन कर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। जिसके बाद प्राधिकरण ने अंसल समूह के निदेशकों को अलग-अलग दिन में 18 नोटिस जारी किए। कालोनाइजर ने एक भी नोटिस का जवाब नहीं दिया। अध्यक्ष बृजेश सिंह ने बताया कि उन्होंने आईजीआरएस पोर्टल पर 16 बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एसोसिएशन अध्यक्ष बृजेश सिंह ने बताया कि अंसल समूह के निदेशकों पर हुई एफआईआर से कॉलोनी के लोगों को कुछ हासिल नहीं होगा। मूलभूत सुविधाओं के लिए जल्द ही वह विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से मिलेंगे।