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Faridabad News: नेहरू कॉलोनी के लोगों ने मुख्यमंत्री के दरबार में उठाई आवाज
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फरीदाबाद नेहरू कॉलोनी के निवासी तोड़फोड़ के विरोध में मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी से मिलते हुए।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा- वर्षों से रह रहे लोगों को मिले मकानों का मालिकाना हक, बिना नोटिस तोड़े गए मकानों के प्रभावितों का हो पुनर्वास
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश, कहा- सरकारी परियोजना के अलावा बिना प्रक्रिया के नहीं होगी तोड़फोड़ ,अंतरण नीति में दिक्कत हो तो रिपोर्ट भेजें
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। एनआईटी क्षेत्र की नेहरू कॉलोनी में नगर निगम की तोड़फोड़ कार्रवाई से नाराज स्थानीय निवासियों ने अब अपनी आवाज चंडीगढ़ तक पहुंचाई है। बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के चंडीगढ़ स्थित आवास पर आयोजित जनता दरबार में नेहरू कॉलोनी एकता मंच का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सामने कॉलोनी के लोगों की समस्याएं रखते हुए मांग की कि वर्षों से यहां रह रहे परिवारों को उनके मकानों का मालिकाना हक देने के लिए अंतरण नीति को दोबारा शुरू किया जाए। साथ ही बिना नोटिस तोड़े गए मकानों से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और तोड़े गए मकानों का मलबा नहीं उठाने की मांग भी रखी गई।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि नेहरू कॉलोनी में रहने वाले लोगों के सामने इस समय दोहरी चिंता है। एक ओर उन्हें अपने घरों पर कार्रवाई का डर सता रहा है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से रहने के बावजूद उनके पास मकानों का मालिकाना हक नहीं है। ऐसे में लोगों की मांग है कि सरकार पहले उनकी जमीन और मकानों की स्थिति स्पष्ट करे तथा पात्र परिवारों को नीति के तहत मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू करे।
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हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर रखी बात
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सामने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चल रहे मामले का भी हवाला दिया। लोगों का कहना था कि सात जुलाई को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद नगर निगम को कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही आगे की कार्रवाई करने की हिदायत दी गई है। निवासियों के अनुसार किसी भी व्यक्ति के मकान पर कार्रवाई से पहले उसे नोटिस देकर जवाब देने का अवसर दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना की जाने वाली कार्रवाई को लेकर पहले भी अदालत में सवाल उठाए गए हैं।
नेहरू कॉलोनी में नगर निगम की कार्रवाई का मामला जून में हाईकोर्ट पहुंचा था। इससे पहले 22 जून को अदालत ने सात जुलाई तक तोड़फोड़ पर अंतरिम रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से बिना व्यक्तिगत नोटिस कार्रवाई किए जाने और पुनर्वास की मांग उठाई गई थी। इससे पहले 30 मई से कॉलोनी में कार्रवाई शुरू होने की बात सामने आई थी और कार्रवाई के बाद मलबा हटाने को लेकर भी विवाद हुआ था।
कॉलोनी की जमीन के मालिकाना हक को लेकर भी स्थिति पेचीदा बताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 100 एकड़ में फैले क्षेत्र में जमीन के अलग-अलग हिस्सों पर पुनर्वास विभाग, नगर निगम, हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड और पंचायत भूमि से जुड़े दावे बताए गए हैं। इसी वजह से जमीन के राजस्व रिकॉर्ड और पुराने दस्तावेजों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले पुनर्वास विभाग की जमीन पर कब्जे को लेकर भी सरकारी स्तर पर कार्रवाई का मामला सामने आ चुका है।
तोड़फोड़ से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग
मुख्यमंत्री के सामने प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग रखी कि जिन परिवारों के मकान कथित तौर पर बिना पर्याप्त नोटिस के तोड़े गए हैं, उनके नुकसान का आकलन कराकर पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि कार्रवाई के बाद यदि परिवारों को खुले में छोड़ दिया जाता है तो इससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के सामने रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है। इसलिए भविष्य में किसी भी कार्रवाई से पहले वैकल्पिक व्यवस्था और कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सीएम गंभीरता से सुनी बात
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रतिनिधिमंडल की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी सरकारी परियोजना की आवश्यकता के अलावा बिना प्रक्रिया अपनाए तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी अधिकारी की ओर से शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल को सूचित किए बिना कार्रवाई की जाती है तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अंतरण नीति को दोबारा शुरू करने की संभावनाओं पर काम करने के निर्देश दिए।
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मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश, कहा- सरकारी परियोजना के अलावा बिना प्रक्रिया के नहीं होगी तोड़फोड़ ,अंतरण नीति में दिक्कत हो तो रिपोर्ट भेजें
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। एनआईटी क्षेत्र की नेहरू कॉलोनी में नगर निगम की तोड़फोड़ कार्रवाई से नाराज स्थानीय निवासियों ने अब अपनी आवाज चंडीगढ़ तक पहुंचाई है। बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के चंडीगढ़ स्थित आवास पर आयोजित जनता दरबार में नेहरू कॉलोनी एकता मंच का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सामने कॉलोनी के लोगों की समस्याएं रखते हुए मांग की कि वर्षों से यहां रह रहे परिवारों को उनके मकानों का मालिकाना हक देने के लिए अंतरण नीति को दोबारा शुरू किया जाए। साथ ही बिना नोटिस तोड़े गए मकानों से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और तोड़े गए मकानों का मलबा नहीं उठाने की मांग भी रखी गई।
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प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि नेहरू कॉलोनी में रहने वाले लोगों के सामने इस समय दोहरी चिंता है। एक ओर उन्हें अपने घरों पर कार्रवाई का डर सता रहा है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से रहने के बावजूद उनके पास मकानों का मालिकाना हक नहीं है। ऐसे में लोगों की मांग है कि सरकार पहले उनकी जमीन और मकानों की स्थिति स्पष्ट करे तथा पात्र परिवारों को नीति के तहत मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू करे।
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हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर रखी बात
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सामने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चल रहे मामले का भी हवाला दिया। लोगों का कहना था कि सात जुलाई को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद नगर निगम को कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही आगे की कार्रवाई करने की हिदायत दी गई है। निवासियों के अनुसार किसी भी व्यक्ति के मकान पर कार्रवाई से पहले उसे नोटिस देकर जवाब देने का अवसर दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना की जाने वाली कार्रवाई को लेकर पहले भी अदालत में सवाल उठाए गए हैं।
नेहरू कॉलोनी में नगर निगम की कार्रवाई का मामला जून में हाईकोर्ट पहुंचा था। इससे पहले 22 जून को अदालत ने सात जुलाई तक तोड़फोड़ पर अंतरिम रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से बिना व्यक्तिगत नोटिस कार्रवाई किए जाने और पुनर्वास की मांग उठाई गई थी। इससे पहले 30 मई से कॉलोनी में कार्रवाई शुरू होने की बात सामने आई थी और कार्रवाई के बाद मलबा हटाने को लेकर भी विवाद हुआ था।
कॉलोनी की जमीन के मालिकाना हक को लेकर भी स्थिति पेचीदा बताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 100 एकड़ में फैले क्षेत्र में जमीन के अलग-अलग हिस्सों पर पुनर्वास विभाग, नगर निगम, हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड और पंचायत भूमि से जुड़े दावे बताए गए हैं। इसी वजह से जमीन के राजस्व रिकॉर्ड और पुराने दस्तावेजों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले पुनर्वास विभाग की जमीन पर कब्जे को लेकर भी सरकारी स्तर पर कार्रवाई का मामला सामने आ चुका है।
तोड़फोड़ से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग
मुख्यमंत्री के सामने प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग रखी कि जिन परिवारों के मकान कथित तौर पर बिना पर्याप्त नोटिस के तोड़े गए हैं, उनके नुकसान का आकलन कराकर पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि कार्रवाई के बाद यदि परिवारों को खुले में छोड़ दिया जाता है तो इससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के सामने रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है। इसलिए भविष्य में किसी भी कार्रवाई से पहले वैकल्पिक व्यवस्था और कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सीएम गंभीरता से सुनी बात
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रतिनिधिमंडल की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी सरकारी परियोजना की आवश्यकता के अलावा बिना प्रक्रिया अपनाए तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी अधिकारी की ओर से शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल को सूचित किए बिना कार्रवाई की जाती है तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अंतरण नीति को दोबारा शुरू करने की संभावनाओं पर काम करने के निर्देश दिए।