बाइक के नाम पर था नंबर रजिस्टर्ड, सड़क पर दौड़ रही थी मर्सिडीज
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करीब दो माह पहले नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेस-वे पर हाइवे ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एचटीएमएस) के कैमरे में ग्रेटर नोएडा से नोएडा आती एक मर्सिडीज कार कैद हुई। पुलिस ने चालान करने के लिए जब गाड़ी की नंबर प्लेट खंगाले तो होश उड़ गए।
नंबर हापुड़ के किसी शख्स के नाम से था। खास बात यह कि नंबर बाइक के लिए रजिस्टर्ड था। जानकारी होते ही पुलिस ने इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दे दी। दरअसल, जिले में नंबर प्लेट बदलकर अपराधी खुलेआम अपराध कर रहे हैं।
इसका पुख्ता प्रमाण यह मामला रहा। हालांकि , अब फर्जीवाड़ा कर घूमने के लिए लग्जरी कारों का भी उपयोग होने का मामला सामने आ रहा है। जानकारों की मानें तो ऐसे मामले सामने आने के बाद इसकी जानकारी ट्रैफिक और जिला पुलिस को दी जाती है। पुलिस नंबर प्लेट के सहारे उक्त व्यक्ति तक पहुंचती है और मामले की तह तक जाने का प्रयास करती है।
फर्जी नंबर प्लेट जिले के बाहर की
अधिकांश मामले में यह निकल कर सामने आ रहा है कि गाड़ी पर लगी फर्जी नंबर प्लेट गौतमबुद्धनगर से सटे हुए जिलों की है। इससे यह भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि उक्त जिले के आसपास के अपराधी इस काम को अंजाम देने के लिए फर्जी नंबर प्लेट का सहारा लेते हैं और वारदात को अंजाम देने के बाद जिले से बाहर निकल जाते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, एचटीएमएस चालान के मामले में करीब 30 फीसदी कूरियर की डिलीवरी ही नहीं हो पाती। मौके पर गए डाकिये या डिलीवरी ब्वाय को पता चलता है कि ऐसा कोई व्यक्ति यहां नहीं रहता।
वहीं कुछ मामलों में पता गलत होने की बात सामने आती है। यही नहीं, कुछ लोग गाड़ी की बिक्री काफी पहले करने की बात कहते हैं, लेकिन नए मालिक ने उक्त नंबर का रजिस्ट्रेशन अपने नाम नहीं कराया।
छह माह में ओवर स्पीडिंग के 2,635 चालान
एसपी ट्रैफिक प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि जनवरी से अब तक (छह माह में) ओवर स्पीडिंग के मामले में एक्सप्रेस-वे पर 2,635 चालान हुए हैं। एचटीएमएस चालान के मामले में पुलिस नंबर प्लेट के आधार पर जांच करती है और गाड़ी मालिक को फोटो सहित चालान भेजती है।
सेक्टर-24 इलाके से जनवरी में आईटीबीपी के आईजी आनंद स्वरूप की नीली बत्ती लगी हुई सफारी को जब हाल ही में नोएडा क्राइम ब्रांच ने बरामद किया तो गाड़ी पर एक स्कॉर्पियो का नंबर प्लेट पाया गया। उस दौरान भी फर्जी नंबर प्लेट का मामला सामने आया था।
सेक्टर-58 थाने के अंतर्गत करोला कार को बदमाशों ने लूटा तो नंबर प्लेट बदल दिया था। जब उस गाड़ी को पुलिस ने पकड़ा तो उसमें दो अन्य जाली नंबर प्लेट भी पाया था। इससे यह पता चलता है कि जैसे ही लुटेरे वारदात को अंजाम देते हैं। उसी वक्त मौका देखकर गाड़ी की नंबर प्लेट बदल देते हैं।
परिवहन विभाग से संबंधित गाड़ी नंबर का पता कराते हैं। उसके बाद जांच की जाती है। फर्जी नंबर प्लेट का उपयोग होना सुनिश्चित होने पर कार्रवाई की जाती है।
- दिनेश यादव, एसपी सिटी