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हाथ कटा तो मां ने संभाला, इतना मजबूत किया कि टोक्यो पैराओलंपिक में पदक जीत लिया

Mon, 06 Sep 2021 02:14 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 06 Sep 2021 02:14 AM IST
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When the hand was cut, the mother handled, strengthened it so much that she won a medal in the Tokyo Paralympic
चंडीगढ़। बचपन में हाथ कट गया तो मां मेरी ताकत बन गईं। इस तरह संभाला कि मुझे कभी दिव्यांगता महसूस ही नहीं हुई। वह खुद राज्य स्तरीय खिलाड़ी रही हैं। उन्होंने मुझे खेलने के लिए प्रेरित किया। उनके विश्वास की बदौलत ही मैं यह उपलब्धि हासिल कर पाया हूं।
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डीएवी कॉलेज सेक्टर-10 में रविवार को रजत पदक विजेता निषाद का सम्मान समारोह था। इसी दौरान उन्होंने अपने दिल की बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि जिस कॉलेज में मैं पढ़ा, वहां इस तरह का सम्मान पाने की खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकता। अभिभूत हूं। ऊना के गांव बदाऊं निवासी निषाद ने कहा कि मैं अपने माता पिता को हर खुशी देना चाहता हूं। उनकी परेशानियां दूर करना चाहता हूं। पिता राजमिस्त्री हैं। छोटा सा मकान है। हिमाचल सरकार ने आर्थिक सहायता तो दी है यदि नौकरी मिल जाए तो घर का खर्च चलाने में पिता की मदद कर सकूंगा। समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करने आए शिक्षा सचिव सरप्रीत सिंह गिल ने कहा कि मैं भले ही मुख्य अतिथि हूं लेकिन असल अतिथि निषाद है। आपके बराबर में बैठना मेरे लिए गर्व की बात है। गिल के इस संबोधन के दौरान निषाद की मां भी भावुक हो गईं।
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मां ने आत्मविश्वास कम नहीं होने दिया
निषाद ने बताया कि जब आठ साल का था, तब चारा काटने वाली मशीन में दायां हाथ कट गया था। मां ने मेरे आत्मविश्वास को कम नहीं होने दिया। कभी इस बात का अहसास नहीं होने दिया कि मेरा एक हाथ नहीं है। हर कदम पर मुझे संभाला। मेरा हौसला बढ़ाया। खेलों की ओर प्रेरित किया। इसके बाद ही मैं पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम पहुंचा। यहां कोच नसीम अहमद और विक्रम चौधरी ने दिन रात मेहनत कराकर ऊंची कूद के लिए तैयार किया।
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पहले यकीन नहीं हुआ पदक जीत लिया, फिर खुशी से झूम उठा
निषाद ने बताया कि टोक्यो पैरा ओलंपिक में अपनी कूद लगाई तो मुझे बताया गया कि तुमने सिल्वर मेडल जीत लिया है। कुछ देर तक तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ। मैंने अपनी टीम के साथियों से चार बार पूछा कि क्या यह सच है। जब यकीन हुआ तो खुशी से झूम उठा। दोहरी खुशी की बात यह थी कि 29 अगस्त को ही खेल दिवस भी था और उसी दिन मैंने पदक भारत की झोली में डाला।
...और घुटनों के बल बैठकर निषाद ने पहना हार
कॉलेज में एनसीसी कैडेट्स ने निषाद को सलामी दी। एक छोटी बच्ची फूलों का हार लिए खड़ी थी। छह फीट चार इंच लंबे निषाद ने घुटनों के बल बैठकर बच्ची के हाथों से हार पहना। उसे खूब दुलार भी किया।
अब आगे
1. पैरा ओलंपिक में मेडल जीतने के बाद उत्साहित निषाद का अगला लक्ष्य आगामी एशियन और वर्ल्ड चैंपियनशिप है। इसके लिए वह अगले कुछ दिनाें में तैयारियाें में जुटेंगे।

सबको चाैंकाया
1. निषाद ने वर्ष 2010 में इंटर कॉलेज में हाई जंप में हिस्सा लिया था। इसमें 21 सामान्य खिलाड़ियाें ने भी शिरकत की थी। निषाद ने इस मुकाबले में सिल्वर मेडल जीतकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया था।
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