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तू माने या ना माने दिलदारा असां ते तैनूं रब मनेया...
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रोज गार्डन में आयोजित रोज फेस्टिवल में लखविंदर वडाली के साथ स्टेज पर नाचता एक नन्हा फैन।
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। तू माने या ना माने दिलदारा असां ते तैनूं रब मनेया... गीत लखविंदर वडाली ने जैसे ही शुरू किया पंडाल में बैठे दर्शक झूम उठे। मौका था रोज फेस्टिवल के दूसरे दिन का। उन्होंने एक से बढ़कर एक गीत पेश कर ऐसा समा बांधा कि सभी गुनगुनाने लगे। इस मौके पर नगर निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा के अलावा अन्य बड़े अधिकारी उपस्थित रहे। वडाली को सुनने के लिए लोग पहले ही अपनी अपनी सीट पर बैठ गए थे। बारिश के बावजूद फेस्ट के दूसरे दिन भी लोगों की भीड़ उमड़ी। बड़ी संख्या में लोग अपने अपने परिवार के साथ रोज गार्डन में पहुंचे।
इस दौरान कठपुतली शो, पंजाबी लोक गीत भी पेश किए गए। रोज गार्डन में लोगों की जागरूकता के लिए स्वच्छ सर्वेक्षण के स्टाल के अलावा अग्निशमन विभाग और स्टेट लीगल सर्विसेस अथॉरिटी के स्टाल के अलावा कोविड टीकाकरण शिविर का भी स्टाल लगाया गया है। मेले के दौरान बारिश की लुकाछिपी भी जारी रही। दो बार बारिश हुई और उसके बाद धूप खिल गई। इस दौरान लोग बारिश से बचने के लिए इधर-उधर दौड़ते नजर आए। जिसे जहां जगह मिली, वह वहीं रूक गया।
मथुरा से आए कलाकारों ने मयूर नृत्य से सबका मन मोहा
उत्तर प्रदेश के मथुरा से आए श्री गिरराज ब्रज लोक कला संस्थान के कलाकारों ने मयूर नृत्य कर सबका मन मोहा। संस्थान के प्रधान गिरधर गोपाल शर्मा ने बताया कि 12 कलाकारों ने मयूर नृत्य में भाग लिया। इसमें पांच महिलाएं भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान ब्रज की होली को गीत पेश किए गए। मयूर नृत्य में दिखाया गया कि राधा बहुत दिनों से कृष्ण से नहीं मिली है। इस दौरान राधा उदास होती है। उनकी सखियां कहती है कि मयूर नृत्य देखने चलते हैं। जब वहां पहुंचती है तो मयूर नहीं होता। इस दौरान भगवान कृष्ण मयूर का रूप धारण कर नृत्य करते हैं। इसी को यहां के मंच पर प्रदर्शित किया गया।
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नगाड़ा, बीन और हारमोनियम के वादन में पेश किया फाग का पारंपरिक गायन
रोहतक के रंगारंग आर्ट एंड कल्वर एसोसिएशन की ओर से फाग का पारंपरिक गायन किया। एसोसिएशन के प्रधान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि नगाड़ा, बीन और हारमोनियम का वादन हुआ। उन्होंने बताया कि मंच पर देवर भाभी के बीच पानी को लेकर नोकझोंक दिया गया। पहले के दौर में दूर दूर से कुआं से पानी लेने के लिए पनिहारी जाती थी। उसका देवर पानी मांगता है और जब पानी देने से मना करती है तो गीतों के माध्यम से देवर भाभी में नोकझोंक का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया।
...जब डाकू खड़ा हो गया रोज गार्डन में
हाथ में नकली बंदूक, कंधे व कमर में नकली कारतूस की बेल्ट, काला कपड़ा और काली पगड़ी, काला चेहरा और काला तिलक यह रूप डाकू हरिया का था। रोज गार्डन के अंदर जाने के बाद डाकू हरिया से लोगों की मुलाकात होती है। कुछ बच्चे तो डर जाते हैं, लेकिन बड़े लोग डाकू हरिया के साथ फोटो खिंचवाना और सेल्फी लेना नहीं भूल रहे थे। जयपुर के रहने वाले महबूब बहुरुपिया ने अपना रूप डाकू का बनाया। उन्होंने कहा कि भारत के सभी प्रांतों में उन्होंने अपना प्रदर्शन किया है। वह कई प्रकार के रूप बदलते रहे हैं। कई लोगों ने डाकू हरिया का बंदूक हाथों में लेकर फोटो खिंचवाई।
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इस दौरान कठपुतली शो, पंजाबी लोक गीत भी पेश किए गए। रोज गार्डन में लोगों की जागरूकता के लिए स्वच्छ सर्वेक्षण के स्टाल के अलावा अग्निशमन विभाग और स्टेट लीगल सर्विसेस अथॉरिटी के स्टाल के अलावा कोविड टीकाकरण शिविर का भी स्टाल लगाया गया है। मेले के दौरान बारिश की लुकाछिपी भी जारी रही। दो बार बारिश हुई और उसके बाद धूप खिल गई। इस दौरान लोग बारिश से बचने के लिए इधर-उधर दौड़ते नजर आए। जिसे जहां जगह मिली, वह वहीं रूक गया।
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मथुरा से आए कलाकारों ने मयूर नृत्य से सबका मन मोहा
उत्तर प्रदेश के मथुरा से आए श्री गिरराज ब्रज लोक कला संस्थान के कलाकारों ने मयूर नृत्य कर सबका मन मोहा। संस्थान के प्रधान गिरधर गोपाल शर्मा ने बताया कि 12 कलाकारों ने मयूर नृत्य में भाग लिया। इसमें पांच महिलाएं भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान ब्रज की होली को गीत पेश किए गए। मयूर नृत्य में दिखाया गया कि राधा बहुत दिनों से कृष्ण से नहीं मिली है। इस दौरान राधा उदास होती है। उनकी सखियां कहती है कि मयूर नृत्य देखने चलते हैं। जब वहां पहुंचती है तो मयूर नहीं होता। इस दौरान भगवान कृष्ण मयूर का रूप धारण कर नृत्य करते हैं। इसी को यहां के मंच पर प्रदर्शित किया गया।
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नगाड़ा, बीन और हारमोनियम के वादन में पेश किया फाग का पारंपरिक गायन
रोहतक के रंगारंग आर्ट एंड कल्वर एसोसिएशन की ओर से फाग का पारंपरिक गायन किया। एसोसिएशन के प्रधान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि नगाड़ा, बीन और हारमोनियम का वादन हुआ। उन्होंने बताया कि मंच पर देवर भाभी के बीच पानी को लेकर नोकझोंक दिया गया। पहले के दौर में दूर दूर से कुआं से पानी लेने के लिए पनिहारी जाती थी। उसका देवर पानी मांगता है और जब पानी देने से मना करती है तो गीतों के माध्यम से देवर भाभी में नोकझोंक का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया।
...जब डाकू खड़ा हो गया रोज गार्डन में
हाथ में नकली बंदूक, कंधे व कमर में नकली कारतूस की बेल्ट, काला कपड़ा और काली पगड़ी, काला चेहरा और काला तिलक यह रूप डाकू हरिया का था। रोज गार्डन के अंदर जाने के बाद डाकू हरिया से लोगों की मुलाकात होती है। कुछ बच्चे तो डर जाते हैं, लेकिन बड़े लोग डाकू हरिया के साथ फोटो खिंचवाना और सेल्फी लेना नहीं भूल रहे थे। जयपुर के रहने वाले महबूब बहुरुपिया ने अपना रूप डाकू का बनाया। उन्होंने कहा कि भारत के सभी प्रांतों में उन्होंने अपना प्रदर्शन किया है। वह कई प्रकार के रूप बदलते रहे हैं। कई लोगों ने डाकू हरिया का बंदूक हाथों में लेकर फोटो खिंचवाई।