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चंडीगढ़: कोरोना काल में हजारों बच्चों का टूटा स्कूल से नाता, ऑनलाइन पढ़ने की सुविधा नहीं, जाने लगे काम पर
Sat, 09 Oct 2021 12:25 AM IST
Trainee Trainee
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Trainee Trainee
Updated Sat, 09 Oct 2021 12:25 AM IST
सार
लॉकडाउन के कारण बच्चों का बहुत नुकसान हुआ है, क्योंकि स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों का मुख्य कारण गरीबी ही होता है। ऐसे में स्मार्ट फोन, रिचार्ज और अभिभावकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता के अभाव में उन्हें ऑनलाइन ट्रेन करना मुश्किल होता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शिक्षा विभाग की ओर से वर्ष 2020 में किए गए चाइल्ड मैपिंग सर्वे में पाया गया है कि 3282 बच्चे स्कूल से वंचित हैं। ऐसे विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों में बनाए स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर (एसटीसी) में दाखिल किया गया। लेकिन कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन इन बच्चों की शिक्षा में रोड़ा बना। जिन विद्यार्थियों को उम्र के अनुसार और उनकी शिक्षा गुणवत्ता के अनुसार पांचवीं या इससे बड़ी कक्षा में दाखिल करवाया गया, सिर्फ वे ही विद्यार्थी स्कूल आ पा रहे हैं। अन्य विद्यार्थियों की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
एसटीसी में काम करने वाली स्पेशन ट्रेनर ने बताया कि इन सेंटरों में कभी स्कूल नहीं गए बच्चे या जिनकी किसी कारण से पढ़ाई छूट जाती है, ऐसे बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार कक्षा के लिए ट्रेनिंग देते हैं। इसके बाद अगर उसके कागजात होते हैं तो उसे सामान्य कक्षा में दाखिल करवाया जाता है। मगर लॉकडाउन के कारण बच्चों का बहुत नुकसान हुआ है, क्योंकि स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों का मुख्य कारण गरीबी ही होता है। ऐसे में स्मार्ट फोन, रिचार्ज और अभिभावकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता के अभाव में उन्हें ऑनलाइन ट्रेन करना मुश्किल होता है। जिन विद्यार्थियों को कक्षा पांच या इससे बड़ी कक्षा में दाखिल किया गया था, अभी सिर्फ वे ही स्कूल आ रहे हैं। अन्य बच्चों में जिनके पास स्मार्ट फोन है, उन्हीं से पढ़ाई को लेकर संपर्क हो रहा है।
यह भी पढ़ें: फगवाड़ा: मौत पर रोने वाला बेटा ही निकला पिता का 'कातिल', पुलिस को खुद दी थी हत्या की शिकायत
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क्या कहते हैं बच्चे
यह भी स्कूल छूटने का कारण
कॉलोनी के स्कूल के प्राइमरी शिक्षक ने बताया कि उनके स्कूल के दो बच्चों का घर में माता-पिता की आपसी कलह के कारण स्कूल छूट गया है।
स्कूल की बजाय बच्चे जा रहे काम पर
एसटीसी की ट्रेनर ने बताया कि प्राथमिक कक्षाओं के स्कूल नहीं खुलने के कारण बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। सर्वे में स्कूल नहीं जाने का कारण अभिभावकों ने बताया था कि वे दोनों काम पर जाते हैं। बच्चे अपने छोटे भाई-बहनों का घर पर ध्यान रखते हैं। उम्र थोड़ी बड़ी होने पर बच्चों को भी अभिभावक अपने साथ घर में साफ-सफाई, सब्जी बेचने या राशन इत्यादि की दुकानों पर काम लगवा देते हैं।
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एसटीसी में काम करने वाली स्पेशन ट्रेनर ने बताया कि इन सेंटरों में कभी स्कूल नहीं गए बच्चे या जिनकी किसी कारण से पढ़ाई छूट जाती है, ऐसे बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार कक्षा के लिए ट्रेनिंग देते हैं। इसके बाद अगर उसके कागजात होते हैं तो उसे सामान्य कक्षा में दाखिल करवाया जाता है। मगर लॉकडाउन के कारण बच्चों का बहुत नुकसान हुआ है, क्योंकि स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों का मुख्य कारण गरीबी ही होता है। ऐसे में स्मार्ट फोन, रिचार्ज और अभिभावकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता के अभाव में उन्हें ऑनलाइन ट्रेन करना मुश्किल होता है। जिन विद्यार्थियों को कक्षा पांच या इससे बड़ी कक्षा में दाखिल किया गया था, अभी सिर्फ वे ही स्कूल आ रहे हैं। अन्य बच्चों में जिनके पास स्मार्ट फोन है, उन्हीं से पढ़ाई को लेकर संपर्क हो रहा है।
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क्या कहते हैं बच्चे
- चाइल्ड मैंपिंग के जरिये स्कूल पहुंचे पांचवीं के छात्र जसबीर ने बताया कि पहले वो कॉलोनी के निजी स्कूल में पढ़ता था, लेकिन लॉकडाउन में तीसरी कक्षा में मां ने स्कूल से हटा दिया था। इस वर्ष पांचवीं कक्षा में दाखिला लिया है।
- सौरभ ने बताया कि वो पिछले दो महीने से पांचवीं कक्षा में स्कूल आ रहा था। तीसरी के बाद उसका स्कूल छूट गया था।
- शुभम ने बताया कि वो लॉकडाउन में एक साल स्कूल नहीं गया, ऑनलाइन पढ़ने की भी सुविधा नहीं थी, पिता फूल बेचते हैं।
- पूजा ने बताया कि पहले वो यूपी में तीसरी कक्षा में स्कूल जाती थी। उनकी माता के इलाज के लिए वो चंडीगढ़ आए। बाद में उनके पिता यहीं पर मजदूरी करने लगे। एक साल पढ़ाई नहीं की, अभी पांचवीं कक्षा में पिछले चार महीने से स्कूल आ रही है।
यह भी स्कूल छूटने का कारण
कॉलोनी के स्कूल के प्राइमरी शिक्षक ने बताया कि उनके स्कूल के दो बच्चों का घर में माता-पिता की आपसी कलह के कारण स्कूल छूट गया है।
स्कूल की बजाय बच्चे जा रहे काम पर
एसटीसी की ट्रेनर ने बताया कि प्राथमिक कक्षाओं के स्कूल नहीं खुलने के कारण बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। सर्वे में स्कूल नहीं जाने का कारण अभिभावकों ने बताया था कि वे दोनों काम पर जाते हैं। बच्चे अपने छोटे भाई-बहनों का घर पर ध्यान रखते हैं। उम्र थोड़ी बड़ी होने पर बच्चों को भी अभिभावक अपने साथ घर में साफ-सफाई, सब्जी बेचने या राशन इत्यादि की दुकानों पर काम लगवा देते हैं।