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गुरुग्राम में जलभराव: सीएम सैनी से मिले सांसद राव इंद्रजीत, भूमिगत जल निकासी व्यवस्था बनाने का दिया सुझाव
Wed, 26 Aug 2026 01:34 PM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 26 Aug 2026 01:34 PM IST
सार
राव इंद्रजीत सिंह के अनुसार, गुरुग्राम में जलभराव की समस्या पिछले बीस वर्षों में बढ़ी है। शहर के अनियोजित विस्तार ने प्राकृतिक जलमार्गों को बाधित किया है। पहाड़ों और नालों से आने वाले पानी के रास्ते में कॉलोनियां बन गई हैं।
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सीएम सैनी से मिलने पहुंचे सांसद राव इंद्रजीत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्रीय राज्य मंत्री और गुरुग्राम से लोकसभा सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की। उन्होंने गुरुग्राम में जलभराव की गंभीर समस्या के स्थायी समाधान पर चर्चा की। राव इंद्रजीत ने मुख्यमंत्री से कहा कि हर साल किए जाने वाले अस्थायी उपाय अब पर्याप्त नहीं हैं।
राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि पिछले करीब बीस वर्षों में गुरुग्राम में जलभराव की समस्या लगातार बढ़ी है। पहाड़ों और नालों से आने वाला पानी पहले ड्रेन नंबर-आठ तक पहुंचता था। शहर के विस्तार के कारण कई जगह पानी के प्राकृतिक रास्ते बंद हो गए हैं। इन रास्तों में कॉलोनियां विकसित हो गई हैं। सड़कों के निर्माण और अवैध कब्जों ने भी पानी की निकासी को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि बाधित प्राकृतिक जलमार्गों पर बने निर्माणों को हटाना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री को मेट्रो की तर्ज पर भूमिगत जल निकासी व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया। यह व्यवस्था जमीन के नीचे से पानी निकालने का वैकल्पिक रास्ता तैयार करेगी। इससे गुरुग्राम को जलभराव से स्थायी राहत मिल सकती है।
जल निकासी तंत्र के तकनीकी अध्ययन की आवश्यकता
राव इंद्रजीत ने जोर दिया कि केवल एक स्थान पर पानी रोकने से समस्या हल नहीं होगी। पानी को एक जगह रोकने पर वह दूसरी जगह से निकलने का रास्ता खोजेगा। इसलिए पूरे गुरुग्राम के जल निकासी तंत्र का तकनीकी अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने आईआईटी और अन्य तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेने का सुझाव दिया। इससे गुरुग्राम के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया जा सकेगा।
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समस्या का मूल कारण
राव इंद्रजीत सिंह के अनुसार, गुरुग्राम में जलभराव की समस्या पिछले बीस वर्षों में बढ़ी है। शहर के अनियोजित विस्तार ने प्राकृतिक जलमार्गों को बाधित किया है। पहाड़ों और नालों से आने वाले पानी के रास्ते में कॉलोनियां बन गई हैं। सड़कों के निर्माण और अवैध कब्जों ने भी स्थिति को और बिगाड़ा है। इन कारणों से पानी की निकासी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
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राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि पिछले करीब बीस वर्षों में गुरुग्राम में जलभराव की समस्या लगातार बढ़ी है। पहाड़ों और नालों से आने वाला पानी पहले ड्रेन नंबर-आठ तक पहुंचता था। शहर के विस्तार के कारण कई जगह पानी के प्राकृतिक रास्ते बंद हो गए हैं। इन रास्तों में कॉलोनियां विकसित हो गई हैं। सड़कों के निर्माण और अवैध कब्जों ने भी पानी की निकासी को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि बाधित प्राकृतिक जलमार्गों पर बने निर्माणों को हटाना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री को मेट्रो की तर्ज पर भूमिगत जल निकासी व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया। यह व्यवस्था जमीन के नीचे से पानी निकालने का वैकल्पिक रास्ता तैयार करेगी। इससे गुरुग्राम को जलभराव से स्थायी राहत मिल सकती है।
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जल निकासी तंत्र के तकनीकी अध्ययन की आवश्यकता
राव इंद्रजीत ने जोर दिया कि केवल एक स्थान पर पानी रोकने से समस्या हल नहीं होगी। पानी को एक जगह रोकने पर वह दूसरी जगह से निकलने का रास्ता खोजेगा। इसलिए पूरे गुरुग्राम के जल निकासी तंत्र का तकनीकी अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने आईआईटी और अन्य तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेने का सुझाव दिया। इससे गुरुग्राम के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया जा सकेगा।
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समस्या का मूल कारण
राव इंद्रजीत सिंह के अनुसार, गुरुग्राम में जलभराव की समस्या पिछले बीस वर्षों में बढ़ी है। शहर के अनियोजित विस्तार ने प्राकृतिक जलमार्गों को बाधित किया है। पहाड़ों और नालों से आने वाले पानी के रास्ते में कॉलोनियां बन गई हैं। सड़कों के निर्माण और अवैध कब्जों ने भी स्थिति को और बिगाड़ा है। इन कारणों से पानी की निकासी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।