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पंजाब: सुनाम में शिक्षा की बदहाल तस्वीर, दो कमरों में पढ़ रहे 108 बच्चे; एक साथ लगती है तीन-तीन क्लास
Wed, 26 Aug 2026 02:13 PM IST
Nivedita
सुशील कुमार, संवाद, सुनाम
सुशील कुमार, संवाद, सुनाम
Published by: Nivedita
Updated Wed, 26 Aug 2026 02:13 PM IST
सार
सुनाम की वाल्मीकि बस्ती स्थित भगवान वाल्मीकि सरकारी प्राइमरी स्कूल में पांचवीं कक्षा तक कुल 8 कक्षाएं चलती हैं, लेकिन स्थान के नाम पर केवल दो कमरे हैं। इसके कारण एक ही कमरे में तीन-तीन कक्षाएं एक साथ लगानी पड़ती हैं।
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भगवान वाल्मीकि सरकारी प्राइमरी स्कूल का हाल
- फोटो : संवाद
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विस्तार
पंजाब में 'शिक्षा क्रांति' के दावों के बीच, सुनाम की वाल्मीकि बस्ती स्थित भगवान वाल्मीकि सरकारी प्राइमरी स्कूल की कड़वी हकीकत व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करती है। पिछले 42 वर्षों से यह स्कूल एक पुरानी धर्मशाला के मात्र दो कमरों में संचालित हो रहा है, जहां गरीब और दलित परिवारों के 108 बच्चे शिक्षा प्राप्त करने को मजबूर हैं।
बदहाल स्थिति और खतरे का साया
स्कूल में प्री-प्राइमरी से पांचवीं कक्षा तक कुल 8 कक्षाएं चलती हैं, लेकिन स्थान के नाम पर केवल दो कमरे हैं। इसके कारण एक ही कमरे में तीन-तीन कक्षाएं एक साथ लगानी पड़ती हैं, जिससे बच्चों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है। जगह की कमी के कारण बच्चों को बरामदे में बैठकर भी पढ़ाई करनी पड़ती है।
गैस सिलेंडर का असुरक्षित भंडारण
स्कूल के पास अपनी रसोई भी नहीं है, जिसके चलते मिड-डे मील बनाने वाली दो महिलाएं खुले में और सीधी धूप में खाना पकाने को विवश हैं। एलपीजी गैस सिलेंडर को भी धूप में रखना पड़ता है, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
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शिक्षकों का सराहनीय प्रयास
इन विपरीत परिस्थितियों में भी, स्कूल के 7 शिक्षक सराहनीय कार्य कर रहे हैं। सरकारी उपेक्षा के बावजूद, वे अपनी जेब से पैसे खर्च कर बच्चों को पढ़ाई का सामान और बुनियादी सुविधाएं देने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, इमारत की कमी के कारण उनके प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
प्रशासनिक उपेक्षा और कागजी कार्रवाई
स्थानीय एसडीएम ने वर्ष 2022 और 2023 में उच्चाधिकारियों को इस गंभीर समस्या के बारे में अवगत कराने के लिए पत्र लिखे थे। इसके बावजूद, महकमे की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। फाइलों के दफ्तरों में चक्कर काटने के कारण समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।
विपक्ष ने साधा निशाना
इस बदहाली पर शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता विन्नरजीत सिंह गोल्डी ने राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि 'वर्ल्ड क्लास शिक्षा' और 'स्कूल ऑफ एमिनेंस' जैसे दावों की पोल सुनाम के इस स्कूल में खुल जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर धूप में रखे सिलेंडर से कोई अनहोनी होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? स्थानीय निवासियों और वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों ने भी चिंता व्यक्त की है और पूछा है कि क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है।
बड़ा सवाल
यह स्थिति एक गंभीर प्रश्न खड़ा करती है कि क्या एसडीएम की चिट्ठियों को नजरअंदाज करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या 108 नौनिहाल इसी धर्मशाला के दो कमरों में अपना भविष्य तलाशते रहेंगे।
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बदहाल स्थिति और खतरे का साया
स्कूल में प्री-प्राइमरी से पांचवीं कक्षा तक कुल 8 कक्षाएं चलती हैं, लेकिन स्थान के नाम पर केवल दो कमरे हैं। इसके कारण एक ही कमरे में तीन-तीन कक्षाएं एक साथ लगानी पड़ती हैं, जिससे बच्चों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है। जगह की कमी के कारण बच्चों को बरामदे में बैठकर भी पढ़ाई करनी पड़ती है।
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गैस सिलेंडर का असुरक्षित भंडारण
स्कूल के पास अपनी रसोई भी नहीं है, जिसके चलते मिड-डे मील बनाने वाली दो महिलाएं खुले में और सीधी धूप में खाना पकाने को विवश हैं। एलपीजी गैस सिलेंडर को भी धूप में रखना पड़ता है, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
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शिक्षकों का सराहनीय प्रयास
इन विपरीत परिस्थितियों में भी, स्कूल के 7 शिक्षक सराहनीय कार्य कर रहे हैं। सरकारी उपेक्षा के बावजूद, वे अपनी जेब से पैसे खर्च कर बच्चों को पढ़ाई का सामान और बुनियादी सुविधाएं देने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, इमारत की कमी के कारण उनके प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
प्रशासनिक उपेक्षा और कागजी कार्रवाई
स्थानीय एसडीएम ने वर्ष 2022 और 2023 में उच्चाधिकारियों को इस गंभीर समस्या के बारे में अवगत कराने के लिए पत्र लिखे थे। इसके बावजूद, महकमे की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। फाइलों के दफ्तरों में चक्कर काटने के कारण समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।
विपक्ष ने साधा निशाना
इस बदहाली पर शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता विन्नरजीत सिंह गोल्डी ने राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि 'वर्ल्ड क्लास शिक्षा' और 'स्कूल ऑफ एमिनेंस' जैसे दावों की पोल सुनाम के इस स्कूल में खुल जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर धूप में रखे सिलेंडर से कोई अनहोनी होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? स्थानीय निवासियों और वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों ने भी चिंता व्यक्त की है और पूछा है कि क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है।
बड़ा सवाल
यह स्थिति एक गंभीर प्रश्न खड़ा करती है कि क्या एसडीएम की चिट्ठियों को नजरअंदाज करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या 108 नौनिहाल इसी धर्मशाला के दो कमरों में अपना भविष्य तलाशते रहेंगे।