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Chandigarh News: अर्थराइटिस की जल्द पहचान करने में थर्मल इमेजिंग सिस्टम कारगर

Fri, 12 Jan 2024 01:41 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jan 2024 01:41 AM IST
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Thermal imaging system effective in early detection of arthritis
चंडीगढ़। बिना डॉक्टर के मरीज में अब अर्थराइटिस हाेने व न होने की पहचान की जा सकेगी। यह मुमकिन हो पाया है सीएसआईओ-सीएसआईआर के वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत महापात्रा के बनाए नी ऑस्टियोआर्थराइटिस डाइग्नोसिस सिस्टम के जरिये। सेक्टर-12 स्थित पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में स्वास्थ्य देखभाल में एआई के योगदान पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान डॉ. महापात्रा ने सिस्टम के बारे में जानकारी दी।ग्रामीण क्षेत्रों जहां एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और अन्य मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती उन्हें मद्देनजर रखते हुए डॉ. महापात्रा ने सिस्टम बनाया। डॉक्टर भी बीमारी का पता लगाने के लिए पहले मरीजों को विभिन्न टेस्ट करने के लिए कहते हैं, जिसके बाद उनका इलाज किया जाता है।
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डॉ. प्रशांत के तैयार किए सिस्टम के जरिये डॉक्टर के पास जाने से पूर्व व्यक्ति जान सकेगा कि उसे अर्थराइटिस है या नहीं। अगर है तो वह कितना गंभीर है। इससे इलाज से पूर्व बीमारी पकड़ में आना आसान होगा। सिस्टम में थर्मल इमेजिंग के जरिए पहले थर्मल कैमरा घुटनों की तस्वीर लेगा। सॉफ्टवेयर उसका एनालिसिस करेगा और अर्थराइटिस होने न होने के बारे में बताएगा। सॉफ्टवेयर में अलग-अलग विंडो बनाए गए हैं। इसमें मरीज का पंजीकरण, पुराने मरीज की अलग विंडो, स्टैंडर्ड क्वेशयनेयर, जिसमें अर्थराइटिस से जुड़े सामान्य प्रश्न पूछे जाएंगे, जैसे जोड़ों में कितना दर्द रहता है, कितनी मूवमेंट होती है, कितनी कठोरता महसूस होती है आदि। इन प्रश्नों के जरिए अर्थराइटिस के स्तर का पता लग सकेगा।
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थर्मल इमेजिंग सॉफ्ट टिशू के रोग पहचानने में एक्स-रे, एमआरआई से बेहतर



डाॅ. प्रशांत ने सॉफ्ट टिशू के रोग की पहचान करने के लिए थर्मल इमेजिंग को एक्स-रे, एमआरआई, सीएटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड से बेहतर बताया है। एक्स-रे, एमआरआई में पाई जाने वाली रेडियोएक्टिव रेज लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती हैं। थर्मल इमेजिंग में रेडियोएक्टिव रेज नहीं होती। एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड आदि सिर्फ शरीर के ढांचे को स्कैन करते हैं, जबकि थर्मल इमेजिंग में शरीर के कार्य की तस्वीर ली जाती है। यह शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल रोगों की पहचान करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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