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‘ग्रेट स्मॉग लंदन’ की तरह जानलेवा न हो जाए स्मॉग, ऐसे मिलेगा छुटकारा?

Tue, 08 Nov 2016 09:34 AM IST
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Tue, 08 Nov 2016 09:34 AM IST
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the number of patients of eye increased in PGI and other hospitals in rohtak
पीजीआई और अन्य अस्पतालों में सांस और आंख संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ी
दीपावली के बाद से लोगों के लिए खुले में सांस लेना और देखना तकलीफ दायक हो गया है। चिकित्सकों की मानें तो बारिश होने या तेज हवा चलने पर ही वातावरण में छाया स्मॉग हटेगा। यदि ऐसा नहीं होता है तो लोगों का श्वास और आंख संबंधी बीमारियों की चपेट में आना तय है।
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पीजीआई समेत अन्य अस्पतालों में सांस और आंख संबंधी रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। हालात चिकित्सकों को वर्ष 1952 में लंदन के ग्रेट स्मॉग की याद दिला रहे हैं। बताया जाता है कि उस समय स्मॉग की वजह से लंदन में एक लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना से सबक लेते हुए ब्रिटेन ने 1956 में स्वच्छ वायु अधिनियम बनाया था। चिकित्सक कहते हैं कि समय आ गया है कि हम भी पर्यावरण के प्रति सजग हों और वातावरण में जहर घोलने वाली गतिविधियों पर रोक लगाएं। नहीं तो लोगों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ जाएगा। 
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पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) में पुलमोनारी क्रिटिकल केयर यूनिट के विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी बताते हैं कि लंदन की घटना ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति नियम बना दिया था। श्वास लेना सबके लिए जरूरी है, इसलिए इस संबंध में बनाए गए नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए। श्वास रोग विशेषज्ञ ने बताया कि वातावरण में फैले जहर से बच पाना मुश्किल है। इससे राहत पाने के लिए आंखों को कवर करने वाला चश्मा और एन-95 मास्क लगाना चाहिए। इसके अलावा डबल वाल्व वाला मास्क लगाकर घर से निकलना चाहिए। इससे कुछ हद तक जहरीले कणों को शरीर के अंदर जाने से रोका जा सकता है। इस समय वातावरण में मौजूद प्रदूषण के कण आंख, नाक, सांस की नली और फेफड़ों में सीधा जहर पहुंचा रहे हैं। डाक्टर कहते हैं कि दोपहिया वाहन चलाते समय बगैर मास्क और चश्मे के चलना खतरे से खाली नहीं है। 
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सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद बाहर न निकलें 

the number of patients of eye increased in PGI and other hospitals in rohtak
द‌िल्ली में जहरीली धुंध - फोटो : File Photo
सांस के रोगियों की संख्या 20 फीसदी बढ़ी 
पीजीआई की ओपीडी की बात करें तो सामान्य दिनों की अपेक्षा शनिवार को सांस के रोगियों की संख्या में 20 फीसदी का इजाफा हो गया। यही हाल अन्य अस्पतालों में भी देखा जा रहा है। बच्चों और बुजुर्गों में अधिक समस्या आ रही है। यदि वातावरण से स्मॉग जल्द नहीं साफ हुआ तो मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होती जाएगी। चिकित्सक सलाह देते हैं कि यदि किसी को समस्या होती है तो उसे तत्काल डॉक्टर के पास जाकर नैबुलाइज करवाना चाहिए। 

आउटडोर के लिए मास्क, इनडोर के लिए एयर प्यूरीफायर
चिकित्सक सलाह देते हैं कि आउटडोर के लिए मास्क और चश्मे का प्रयोग करना चाहिए। इनडोर के लिए कार्यालयों और घरों में एयर प्यूरीफायर लगाया जा सकता है। यह उनके लिए अधिक जरूरी है, जिनके घरों में छोटे बच्चे और बुजुर्ग हैं। बच्चों और बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से उन्हें प्रदूषण से एलर्जी हो जाती है। उनके लिए इन दिनों बाहर निकलना सही नहीं है। 

सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद बाहर न निकलें 
हेल्थ विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार एवं मेडिसन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. एचके अग्रवाल ने बताया कि जिस तरह से वातावरण में स्मॉग छाया है उसे देखते हुए सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। इस समय प्रदूषण का स्तर वातावरण में अधिक होता है। दोपहिया वाहन चालक बगैर फेस मास्क और चश्मों के बाहर न निकलें। इस समय दमा और खांसी के क्रोनिक बीमारी के मरीजों की समस्या बढ़ गई है। ओपीडी में छींक आने, नाक बहने, आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत की शिकायतें लेकर लोग आ रहे हैं। डाक्टर कहते हैं कि जब तक मौसम साफ नहीं हो जाता तक अधिक समय घर से बाहर नहीं रहना चाहिए। 

वर्ष 1952 में लंदन के ग्रेट स्मॉग के कहर से चली गई थी एक लाख लोगों की जान

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द‌िल्ली में जहरीली धुंध - फोटो : फाइल फोटो
दिल्ली की अपेक्षा हरियाणा में राहत
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. कुलदीप ने बताया कि दिल्ली की अपेक्षा हरियाणा में फिलहाल राहत है। प्रदूषण का स्तर पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 और पीएम 10 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब मापा जाता है। पीएम 2.5 लेवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इसकी वातावरण में मौजूदगी 50-60 पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) से नीचे होनी चाहिए, लेकिन हरियाणा में यह 250 के स्तर पर पहुंच गई है। जबकि दिल्ली में पीएम स्तर 800 से ऊपर पहुंच गया है। ऐसी स्थिति में कम से कम ट्रिपल लेयर का मास्क लगाकर घर से बाहर निकलना चाहिए। उन्होंने बताया कि साल 2014 में देश में एअर इंडेक्स लेवल बनाया गया। इसके अनुसार प्रदेश का प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो गया है। 

पराली के साथ आतिशबाजी ने घोला जहर
हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इन दिनों खेतों में पराली जलाने का सिलसिला जारी है। पराली के धुएं के साथ दीपावली पर होने वाली आतिशबाजी वातावरण में जहर घोल देती है। इसमें वाहनों और उद्योगों का धुआं मिलकर वातावरण को जहरीला बना देता है। मौसम बदलने पर अक्सर दीपावली के बाद प्रदूषण धरातल की सतह पर आ जाता है। 

एयर क्वालिटी इंडेक्स (केंद्र सरकार की ओर से 2014 में जारी)
एक्यूआई स्तर    स्वास्थ्य स्तर
0-50    अच्छा
51-100    मध्यम
101-150    संवेदनशील के लिए नुकसानदायक
151-200    नुकसानदायक
201-300    बहुत नुकसानदायक
300-500    खतरनाक
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