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Chandigarh News: सीबीआई के घेरे में टेंडर, कार्रवाई की जगह एसडीओ रूदेश को दे दिया एक्सईएन का चार्ज

Mon, 13 Jul 2026 02:06 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jul 2026 02:06 AM IST
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Tender under CBI scrutiny; instead of facing action, SDO Rudesh has been given the charge of XEN.

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चंडीगढ़। शहर की सड़कों और पार्कों के डार्क स्पॉट खत्म करने के लिए नगर निगम द्वारा वर्ष 2019 में 11.89 करोड़ रुपये में दिए गए टेंडर की जांच अब भी सवालों के घेरे में है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने जनवरी 2025 में नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर टेंडर आवंटन में मिली कथित अनियमितताओं पर सेल्फ कंटेंड नोट का जवाब और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। आरोप है कि अब तक न तो सीबीआई को जवाब भेजा गया और न ही संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। उल्टा, सीबीआई के नोट में शामिल एसडीओ रूदेश कुमार को हाल ही में एक्सईएन का प्रभार दे दिया गया।
नगर निगम ने शहर के डार्क स्पॉट दूर करने के लिए 12.25 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया था। तीसरी बार निकाले गए टेंडर में साहनी इलेक्ट्रिकल एकमात्र योग्य कंपनी रही, जिसे 5 मार्च 2019 को 11 करोड़ 89 लाख रुपये में काम आवंटित कर दिया गया। आरोप है कि कंपनी ने अर्नेस्ट मनी ट्रेजरी चालान के बजाय डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) के माध्यम से जमा की, जबकि टेंडर की शर्तों के अनुसार करीब 24.49 लाख रुपये ट्रेजरी चालान के रूप में जमा होना जरूरी था। इसके बावजूद 28 फरवरी 2019 को कंपनी की तकनीकी बोली योग्य घोषित कर दी गई और 3 मार्च को एक्सईएन कुलदीप सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने वित्तीय बोली खोल दी। समिति में एसडीओ रुदेश कुमार और ड्राफ्ट्समैन विजय कुमार भी शामिल थे।
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ड्राइंग मंजूर होने से पहले शुरू हो गया काम, सीबीआई ने उठाए सवाल
सीबीआई की जांच के अनुसार काम की प्लानिंग ड्राइंग 6 मई 2019 को मंजूर हुई जबकि कंपनी ने मार्च 2019 से ही काम शुरू कर दिया था। 180 दिन में पूरा होने वाला कार्य समय पर पूरा नहीं हुआ और पांच बार समय सीमा बढ़ाई गई। आरोप है कि एक्सईएन कुलदीप सिंह ने समय विस्तार देते समय सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी नहीं ली। साथ ही पांच करोड़ रुपये से अधिक के कार्य के लिए जरूरी थर्ड पार्टी निरीक्षण भी नहीं कराया गया।
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सीबीआई एसीबी ने एनआईटीटीटीआर के स्ट्रक्चर इंजीनियर से भी कार्य और टेंडर शर्तों की जांच कराई। जांच के बाद जनवरी 2025 में नगर निगम आयुक्त को सेल्फ कंटेंड नोट भेजकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने और रिपोर्ट भेजने को कहा गया। निगम की एस्टेब्लिशमेंट शाखा ने 24 फरवरी 2025 को अधीक्षण अभियंता (हॉर्टिकल्चर एवं इलेक्ट्रिकल) को पत्र जरूर भेजा लेकिन आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सीबीआई से कोई क्लीयरेंस लिए बिना की नियुक्ति
इसी बीच एक्सईएन कुलदीप सिंह सेवानिवृत्त हो गए और उनकी जगह एसडीओ रूदेश कुमार को एक्सईएन का प्रभार दे दिया गया। आरोप है कि यह नियुक्ति सीबीआई से कोई क्लीयरेंस लिए बिना की गई जबकि उनका नाम भी सीबीआई के सेल्फ कंटेंड नोट में शामिल है।

10.47 करोड़ रुपये का भुगतान भी जारी किया
विजिलेंस विभाग ने भी नगर निगम को पत्र लिखकर साहनी इलेक्ट्रिकल को अंतिम भुगतान से पहले क्लीयरेंस लेने को कहा था। इसके बावजूद निगम ने कंपनी को 10.47 करोड़ रुपये का भुगतान जारी कर दिया।

बॉक्स : हाईकोर्ट से लेकर सीबीआई तक पहुंचा मामला

इस टेंडर में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ एसके गुप्ता ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। डिवीजन बेंच ने उन्हें सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत करने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने सीबीआई से शिकायत की और जिला अदालत में भी याचिका दायर की। अदालत ने सीबीआई से स्टेटस रिपोर्ट मांगी। जांच के बाद सीबीआई ने नगर निगम आयुक्त को कार्रवाई के लिए लिखा, लेकिन अब तक संबंधित अधिकारियों पर कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई।


जॉइंट कमिश्नर से नहीं मिला जवाब
सीबीआई के सेल्फ कंटेंड नोट के बावजूद कार्रवाई न होने और एसडीओ रूदेश कुमार को एक्सईएन का प्रभार दिए जाने के संबंध में नगर निगम के जॉइंट कमिश्नर हिमांशु गुप्ता से पक्ष जानने के लिए तीन बार संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिला।
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