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प्रौद्योगिकी सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने का साधन बने : मुख्य न्यायाधीश
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चंडीगढ़। सेक्टर-43 स्थित ज्यूडिशियल एकेडमी पहुंचे मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि प्रौद्योगिकी हर किसी के लिए न्याय सुनिश्चित करने का साधन होनी चाहिए। वह यहां पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से द लीडरशिप ऑफ टेक्नोलॉजी इन इंडियन कोर्ट नाम से न्यायालयों में प्रौद्योगिकी के परिदृश्य पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह एक अनोखा सम्मेलन है, जिसमें देशभर से जज पहुंचे हैं। मीडिया से बात करते हुए सीजेआई ने कहा कि हाल ही में हमारे यहां लोक अदालत का लगाई गई थी, जिसकी थीम न्याय सबके द्वार थी। टेक्नोलॉजी को न्याय माध्यम बनाना चाहिए। हमने कोर्ट रूम में ई-सेवा केंद्र स्थापित करने शुरू किए हैं, जो करीब 18 हजार अदालतों में स्थापित किए जा रहे है। सीजेआई ने आगे बताया कि केंद्र सरकार ने सूचना के बुनियादी ढांचे को पुनर्जीवित करने के लिए सभी राज्य सरकारों को लगभग 7000 करोड़ रुपये दिए हैं। इससे सूचना के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाया जा सकता है। तीन नए आपराधिक कानूनों के बारे में पूछे जाने पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है। ऐसे में इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
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मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह एक अनोखा सम्मेलन है, जिसमें देशभर से जज पहुंचे हैं। मीडिया से बात करते हुए सीजेआई ने कहा कि हाल ही में हमारे यहां लोक अदालत का लगाई गई थी, जिसकी थीम न्याय सबके द्वार थी। टेक्नोलॉजी को न्याय माध्यम बनाना चाहिए। हमने कोर्ट रूम में ई-सेवा केंद्र स्थापित करने शुरू किए हैं, जो करीब 18 हजार अदालतों में स्थापित किए जा रहे है। सीजेआई ने आगे बताया कि केंद्र सरकार ने सूचना के बुनियादी ढांचे को पुनर्जीवित करने के लिए सभी राज्य सरकारों को लगभग 7000 करोड़ रुपये दिए हैं। इससे सूचना के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाया जा सकता है। तीन नए आपराधिक कानूनों के बारे में पूछे जाने पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है। ऐसे में इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
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