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पंजाब यूनिवर्सिटी ने बदले नियम: यौन शोषण के दोषी पाए जाने पर गंवानी पड़ सकती है डिग्री, पीयूकैश का नाम बदला
Sun, 24 Sep 2023 01:31 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 24 Sep 2023 01:31 AM IST
सार
पीयू के छात्र के साथ संस्थान का कोई भी अन्य सदस्य लिखित में किसी भी सदस्य के खिलाफ सेक्सुअल हरासमेंट की शिकायत लिखित में सौंप सकता है। अगर पीड़ित मानसिक और शारीरिक परेशानी के कारण खुद सक्षम नहीं हो तो लीगल मदद के जरिए भी आईसीसी के किसी भी सदस्य को शिकायत दी जा सकती है।
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Panjab University
- फोटो : amar ujala
विस्तार
पंजाब यूनिवर्सिटी में सेक्सुअल हरासमेंट के केस में अब आरोपी छात्र को दोषी पाए जाने पर अपनी डिग्री गंवानी पड़ सकती है। पीयू सिंडिकेट की ओर से शनिवार को बैठक में पीयूकैश का नाम बदलकर आईसीसी (इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी) रखने के साथ ही इसके नए नियमों को भी मंजूरी दे दी गई। नए नियमों में छात्र, कर्मचारी और शिक्षक पर आरोप लगने के मामले में सजा को विस्तृत रूप में दिया गया है। साथ ही पहले पीयूकैश का मुखिया चेयरपर्सन था, अब इसे भी बदलकर द प्रिसाइडिंग ऑफिसर कर दिया गया है।
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आईसीसी में ऐसे कर सकते हैं शिकायत
पीयू के छात्र के साथ संस्थान का कोई भी अन्य सदस्य लिखित में किसी भी सदस्य के खिलाफ सेक्सुअल हरासमेंट की शिकायत लिखित में सौंप सकता है। अगर पीड़ित मानसिक और शारीरिक परेशानी के कारण खुद सक्षम नहीं हो तो लीगल मदद के जरिए भी आईसीसी के किसी भी सदस्य को शिकायत दी जा सकती है। पीड़ित अपनी शिकायत विभाग प्रमुख, हॉस्टल वार्डन इत्यादि को भी सौंप सकता है। ऐसे में अधिकारी को पीड़ित की शिकायत आईसीसी को सौंपनी होगी। आईसीसी के किसी भी सदस्य के पास शिकायत आने के 24 घंटे के अंदर ही आईसीसी प्रमुख को सदस्य को रिपोर्ट देनी होगी। पीड़ित को तय समय सीमा तीन महीने के अंदर ही आईसीसी तक लिखित में शिकायत पहुंचानी होगी।
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इंक्वायरी कमेटी में 50 प्रतिशत महिला होना अनिवार्य
आईसीसी की ओर से बनाई जाने वाली इंक्वायरी कमेटी में तीन से कम और पांच से ज्यादा सदस्य नहीं होने चाहिए। इसके साथ ही कुल सदस्यों में 50 प्रतिशत महिलाओं का होना अनिवार्य होना है। इंक्वायरी कमेटी को इंक्वायरी के 15 दिनों के भीतर आईसीसी को रिपोर्ट सौंपना अनिवार्य होगा।
आरोपी को ये दी जा सकती है सजाएं
अकादमिक स्टाफ को चेतावनी, एडमिनिस्ट्रेटिव पद से हटाना, एक साल या इससे अधिक के लिए पदोन्नति रोकना, काम से कुछ समय के लिए सस्पेंड करना या सेवानिवृत्ति के लिए बाध्य किया जा सकता है। छात्र के लिए सजा में अभिभावक या परिवार के पास शिकायत पहुंचाना, दूसरे हॉस्टल में ट्रांसफर, एक सेमेस्टर के लिए हॉस्टल में रुकने पर रोक, एक साल के लिए यूनिवर्सिटी में आने से रोक, डिग्री से निष्कासित या संस्थान की तरफ से चरित्र निर्माण सर्टिफिकेट देने इत्यादि पर रोक लग सकती है। शैक्षणिक स्टाफ के लिए सजा में चेतावनी, ट्रांसफर, काम से कुछ समय के लिए सस्पेंड करना या सेवानिवृत्ति के लिए बाध्य किया जा सकता है।
पीयू में 15 साल के अनुभव के साथ बन सकते हैं प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस
पंजाब यूनिवर्सिटी इसी सत्र से प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है, इसके प्रस्ताव को सिंडिकेट की ओर से मंजूरी दे दी गई है। इसमें उम्मीदवार का 15 साल का काम का अनुभव मांगा जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार इसके लिए विभागों को सर्कुलर जारी होगा, जिसमें विभागों से मांग पूछी जाएगी। इसके अनुसार ही अखबार में विज्ञापन निकलवाया जाएगा।
प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस को 2500 रुपये प्रतिमाह लेक्चर और महीने में अधिकतम 50 हजार रुपये का मानदेय दिया जाएगा। पीयू ने इस नियुक्ति के लिए कई विभागों में विषय तय किए हैं। पीयू की ओर से नियुक्ति विज्ञान, इंजीनियरिंग, कॉमर्स, सोशल साइंस, मीडिया, सिविल सर्विसेज, लीगल स्टडीज, पंचायती राज, जेंडर स्टडीज, ट्राइबल, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, आर्म्ड फोर्स, रूरल डेवलपमेंट आदि विषयों में दी जाएगी। इसके लिए उम्मीदवार को संबंधित क्षेत्र में कम से कम 15 साल का अनुभव होना चाहिए।
अब एमबीबीएस, बीडीएस वाले छात्रों पढ़ सकेंगे पीजी न्यूट्रिशन
पीयू में अब पीजी डिप्लोमा इन न्यूट्रिशन एंड डायटिक्स में दाखिले के लिए स्नातक में बीएससी के पढ़ाई की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। पीयू में अब स्नातक में एमबीबीएस, बीएचएमएस, बीएएमएस और बीडीएस करने वाले उम्मीदवार को भी दाखिले के लिए मौका दिया जाएगा। इसके लिए न्यूनतम अंक 50 प्रतिशत रखे गए हैं। वहीं एमए एजुकेशन के लिए किसी भी विषय में स्नातक पास करने वाले उम्मीदवार को दाखिले के लिए मौका दिया जाएगा।
इसके अलावा पीयू वीसी की ओर से परिसर को कार फ्री बनाने के लिए आग्रह किया गया, सदस्यों ने कहा कि माह के आखिरी शुक्रवार के बाद इसे 15 दिन के बाद लागू किया जाए। इससे आमतौर पर ही कार के काम इस्तेमाल को लेकर आदत बन जाए। बैठक के दौरान सिंडिकेट में विभिन्न संस्थानों के साथ एमओयू को भी मंजूरी दे दी है। इसमें चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग लुधियाना, पंजाब बायोटेक्नोलॉजी इंक्यूबेटर मोहाली, कन्या महाविद्यालय जालंधर, आईएमटी अटलांटिक, सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी, दून यूनिवर्सिटी, देहरादून और एडम यूनिवर्सिटी पॉलैंड शामिल हैं।