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भारत-कनाडा विवाद: जनवरी में शुरू होने वाले सेशन में दाखिला ले चुके 36 हजार पंजाबी विद्यार्थी, चिंता में परिजन

Sun, 24 Sep 2023 01:09 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 24 Sep 2023 01:09 PM IST
सार

India Canada Tensions : बढ़ते राजनयिक संकट से कनाडा की शिक्षा प्रणाली पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है, जो उच्च शिक्षा के लिए आप्रवासन करने वाले भारतीय छात्रों पर बहुत अधिक निर्भर है। वीजा एक्सपर्ट सुकांत के मुताबिक, भारतीय छात्र कनाडाई छात्रों की तुलना में दोगुना योगदान देते हैं।

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India Canada Row: Punjab Students Have Taken Admission In Coming Session In Canada Colleges
भारत कनाडा विवाद - फोटो : Social Media

विस्तार

कनाडा में आठ जनवरी से सेशन शुरू होने जा रहा है। पंजाब के 36 हजार विद्यार्थी दाखिला ले चुके हैं और 70 फीसदी विद्यार्थियों का वीजा आ चुका है और एयर टिकट बुक हो चुकी है, लेकिन कनाडा व भारत के बीच बिगड़ते रिश्तों से विद्यार्थियों में चिंता बढ़ गई है।

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अभिभावकों में भी इस बात की चिंता है कि अगर रिश्ते और बिगड़ गए तो बच्चों का क्या होगा? उनका साल खराब तो नहीं हो जाएगा? मौजूदा समय में कुल 2,09,930 भारतीय छात्र कॉलेजों में पढ़ रहे हैं जबकि 80,270 विश्वविद्यालय में पढ़ रहे हैं। कनाडा कॉलेजों को डिप्लोमा देने वाले संस्थानों के रूप में परिभाषित करता है जबकि विश्वविद्यालय स्नातक, मास्टर और डॉक्टरेट डिग्री देते हैं।
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नागरिकता और इमिग्रेशन पर स्थायी समिति व इमिग्रेशन और शरणार्थी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार ये छात्र कनाडा की अर्थव्यवस्था में प्रति वर्ष 22.3 बिलियन कनाडाई डॉलर से अधिक का योगदान देते हैं। भारतीय मुद्रा में करीब 65 हजार करोड़ फीस व अन्य खर्च के लिए कनाडा जा रहे हैं।

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कनाडा की शिक्षा प्रणाली पर पड़ेगा प्रभाव
इस बढ़ते राजनयिक संकट से कनाडा की शिक्षा प्रणाली पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है, जो उच्च शिक्षा के लिए आप्रवासन करने वाले भारतीय छात्रों पर बहुत अधिक निर्भर है। वीजा एक्सपर्ट सुकांत के मुताबिक, भारतीय छात्र कनाडाई छात्रों की तुलना में दोगुना योगदान देते हैं और कॉलेज प्रणाली के लिए ओंटारियो सरकार की फंडिंग से थोड़ा अधिक योगदान देते हैं। पिछले कुछ सालों में, कनाडा में वैध अध्ययन वीजा के साथ देश में रहने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। 2018 में 1,71,505, 2019 में 2,18,540, 2020 में 1,79,510, 2021 में 2,16,500 और 2022 में यह 3,19,000 तक पहुंच गया। यह डाटा कनाडा के अप्रवासन, शरणार्थी और नागरिकता विभाग के अनुसार है।


इतनी बड़ी संख्या में भारतीय छात्र विश्वविद्यालय की फीस, आवास और अन्य खर्चों के माध्यम से कनाडाई अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं और कई ओंटारियो कॉलेजों में कनाडा की तुलना में भारत से अधिक छात्र हैं। इससे पता चलता है कि नई दिल्ली और ओटावा के बीच संबंधों में और गिरावट गंभीर परिस्थिति पैदा कर सकते हैं।

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क्या करें कुछ समझ नहीं आ रहा
कनाडा में जनवरी सेशन में जाने वाली सर्बजीत कौर का कहना है कि जनवरी से क्लास शुरू होनी है, उसका दाखिला कनाडा के वैंकुवर हो चुका है और टिकट बुक भी करवा ली है। अब अचानक कनाडा व भारत से बिगड़े रिश्तों में परिवार के तमाम सदस्य काफी तनाव में है। कुछ का मत है कि उन्हें कनाडा नहीं जाना चाहिए लेकिन 25 लाख खर्च हो चुके हैं, कॉलेज की फीस जा चुकी है। टिकट बुक हो चुकी है, सब बेकार हो जाएगा।

ग्रे मैटर की एमडी सोनिया धवन का कहना है कि भारत और कनाडा के बीच चल रही अशांति और कनाडा में अपने बच्चों की पढ़ाई पर भारी निवेश कर रहे माता-पिता के बीच बढ़ती आशंकाओं के बीच, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि पंजाब से हर साल 68,000 करोड़ रुपये की भारी पूंजी पलायन कर रही है। हमारी एजुकेशन इंडस्ट्री कनाडा में मजबूत अर्थव्यवस्था में योगदान डाल रही है।

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