महाराष्ट्र की राजनीति पर कैलाश खेर ने साधा निशाना, बोले- बाप बेटे का नहीं, चाचा-भतीजे का नहीं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गायक कैलाश खेर ने बिना नाम लिए महाराष्ट्र की राजनीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शुरू से ही होनी हमेशा साइड में रहती है और बाद में अपना रंग दिखाती है। ये सब मोह-माया है। इसी तरह कुर्सी है, जो चुपचाप अपना खेल देखती रहती है। सभी को खूब लड़ाती है। आप देख ही रहे हैं कुर्सी को पाने के लिए कैसे सब चोंच से चोंच मिलाकर लड़ रहे हैं।
हालात यह भी हैं कि बेटा बाप का नहीं है, भतीजा चाचे का नहीं और भाई-भाई का नहीं। लेकिन हमारे देश में कुछ पुण्य कर्म करने वाले बाहुल्य लोग भी हैं, इनके ईश्वरीय कर्म से सब बच रहा है, इसलिए हमारा देश दिव्य है। वे मंगलवार को करनाल में निफा की ओर से आयोजित युवा महोत्सव हारमनी कार्यक्रम में पहुंचे थे।
अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि योग और आयुर्वेद की तरह संगीत भी हमारी धरोहर है। संगीत के क्षेत्र में देश और तरक्की करे, इसके लिए संगीत मंत्रालय भी बनना चाहिए। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की और इसे लेकर बात भी करेंगे।
गुजरात की तरक्की का राज ईश्वरीय कर्म
गायक कैलाश खेर ने कहा कि गुजरात आज किस स्तर पर उन्नति कर रहा है, इसके बारे में सभी को पता है। अगर हर राज्य में गुजरात की तरह दान-पुण्य ज्यादा हो, ईश्वरीय कर्म हो, तो वो धरती जरूर पनपती है और फल देती है। जिससे देश व प्रदेश तरक्की करता है।
आयुर्वेद की तरह संगीत भी बुजुर्गों की सल्तनत
कैलाश खेर ने बताया कि संगीत को लेकर अब बातें चल रहीं हैं। समय आएगा और ईश्वर की अनुकंपा जुड़ी तो संगीत मंत्रालय भी बनेगा। प्रधानमंत्री से मेरा इसके लिए निवेदन भी है कि मंत्रालय पूरी तरह से संगीत पर समर्पित हो, जो दुनिया में संगीत की और अध्यात्म की ऊर्जा बांटे। संगीत भी हमारे देश की धरोहर है। इसके लिए हमारे देश का ही सर्टिफिकेट हो। जैसे आयुर्वेद पर किसी दूसरे का हक नहीं है, ये हमारे देश के बड़े-बुजुर्गों की सल्तनत है। वैसे ही संगीत भी हमारी धरोहर है।
फिट रहना है तो.. खाओ-पीयो, छको मत, चलो-फिरो, थको मत, बोलो-चालो, बको मत
अपनी फिटनेस का राज बताते हुए कैलाश खेर ने कहा कि मैं खाता-पीता कम हूं। और हर चीज में अपना ध्यान रखता हूं। दूसरों के लिए भी मेरा एक ही सूत्र है कि खाओ-पीयो छको(रजकर)मत, चलो फिरो थको मत, बोलो-चालो बको मत। अगर इस सूत्र को अपनाएं तो हम सुखी और स्वस्थ रह सकते हैं।