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Chandigarh News: पंजाब में लूटी जा रही गडरियों की भेड़ें, हाईकोर्ट ने की डीजीपी से रिपोर्ट तलब
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लूट की 30 वारदात की दी जानकारी, एफआईआर पर एक्शन न लेने का आरोप
हाईकोर्ट ने याचिका पर डीजीपी को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लुटेरों के संगठित गिरोहों के सदस्यों द्वारा गडरिया समुदाय की भेड़ों की लगातार लूट पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के डीजीपी को इस मुद्दे पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
मलकीत सिंह व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया कि बीते तीन साल में गडरिया समुदाय के सदस्यों के साथ 30 से अधिक घटनाएं हुई हैं जिनमें राज्य में सक्रिय गिरोहों ने उनकी सैकड़ों भेड़ें लूट लीं। राज्य में कई एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने एक भी मामले में चालान पेश नहीं किया है। याचिकाकर्ताओं ने अपने समुदाय के सदस्यों के जीवन और स्वतंत्रता को बचाने के लिए निर्देश देने की मांग की है। याची ने बताया कि ये गिरोह 2021 से लगातार उन्हें घायल कर रहे हैं और उनकी भेड़ों को लूट रहे हैं। इस हालात ने उन्हें भुखमरी की ओर धकेल दिया है और उनका अस्तित्व खतरे की कगार पर है। याचिका में अपील की गई कि इन सभी मामलों की जांच वरिष्ठ आईपीएस की अध्यक्षता वाली एसआईटी को सौंपी जाए। याची के वकील बिनत शर्मा ने हाईकोर्ट को बताया कि गडरिया जनजाति के खानाबदोश लोग हैं और सदियों से इसी जीवन शैली में रह रहे हैं। वे भेड़ के उत्पाद बेचकर अपनी आजीविका कमाते हैं। कोर्ट को बताया गया कि भेड़ एक ऐसा जानवर है, जिसे कैद में नहीं पाला जा सकता और यह चरकर जीवित रह सकता है। पंजाब में नदी के किनारे के परिदृश्य इसके लिए बहुत उपयुक्त हैं और यही कारण है कि याचिकाकर्ताओं ने अपना पूरा वर्ष पंजाब में अपनी भेड़ों को चराने में बिताया। याची ने बताया कि 13 अक्टूबर 2021 को कहा गया है कि पहली बार याचिकाकर्ताओं के कुछ सदस्य जो अपनी भेड़ों के झुंड के साथ आराम कर रहे थे, इस दौरान उन्हें कुछ गिरोह के सदस्यों ने घेर लिया और उन्हें घायल करने के बाद 40-50 विकसित भेड़ों को अपने साथ ले गए। एक स्वस्थ भेड़ की कीमत लगभग 20-25 हजार होती है। इस तरह एक ही घटना में उन्हें करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ। नवांशहर पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज करने के अलावा कुछ नहीं किया।
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हाईकोर्ट ने याचिका पर डीजीपी को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लुटेरों के संगठित गिरोहों के सदस्यों द्वारा गडरिया समुदाय की भेड़ों की लगातार लूट पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के डीजीपी को इस मुद्दे पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
मलकीत सिंह व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया कि बीते तीन साल में गडरिया समुदाय के सदस्यों के साथ 30 से अधिक घटनाएं हुई हैं जिनमें राज्य में सक्रिय गिरोहों ने उनकी सैकड़ों भेड़ें लूट लीं। राज्य में कई एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने एक भी मामले में चालान पेश नहीं किया है। याचिकाकर्ताओं ने अपने समुदाय के सदस्यों के जीवन और स्वतंत्रता को बचाने के लिए निर्देश देने की मांग की है। याची ने बताया कि ये गिरोह 2021 से लगातार उन्हें घायल कर रहे हैं और उनकी भेड़ों को लूट रहे हैं। इस हालात ने उन्हें भुखमरी की ओर धकेल दिया है और उनका अस्तित्व खतरे की कगार पर है। याचिका में अपील की गई कि इन सभी मामलों की जांच वरिष्ठ आईपीएस की अध्यक्षता वाली एसआईटी को सौंपी जाए। याची के वकील बिनत शर्मा ने हाईकोर्ट को बताया कि गडरिया जनजाति के खानाबदोश लोग हैं और सदियों से इसी जीवन शैली में रह रहे हैं। वे भेड़ के उत्पाद बेचकर अपनी आजीविका कमाते हैं। कोर्ट को बताया गया कि भेड़ एक ऐसा जानवर है, जिसे कैद में नहीं पाला जा सकता और यह चरकर जीवित रह सकता है। पंजाब में नदी के किनारे के परिदृश्य इसके लिए बहुत उपयुक्त हैं और यही कारण है कि याचिकाकर्ताओं ने अपना पूरा वर्ष पंजाब में अपनी भेड़ों को चराने में बिताया। याची ने बताया कि 13 अक्टूबर 2021 को कहा गया है कि पहली बार याचिकाकर्ताओं के कुछ सदस्य जो अपनी भेड़ों के झुंड के साथ आराम कर रहे थे, इस दौरान उन्हें कुछ गिरोह के सदस्यों ने घेर लिया और उन्हें घायल करने के बाद 40-50 विकसित भेड़ों को अपने साथ ले गए। एक स्वस्थ भेड़ की कीमत लगभग 20-25 हजार होती है। इस तरह एक ही घटना में उन्हें करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ। नवांशहर पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज करने के अलावा कुछ नहीं किया।
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