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पंजाब : जनता से सेस की वसूली जारी, खर्च का हिसाब नहीं... कैग ने विभागों की अनियमितता पर उठाए सवाल
Sun, 21 Mar 2021 09:53 AM IST
योगेश जोशी
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: योगेश जोशी
Updated Sun, 21 Mar 2021 09:53 AM IST
सार
- गरीब मजदूरों के नाम पर वसूला सेस 40 फीसदी ही खर्च किया।
- सामाजिक बुनियादी ढांचा सेस के हिसाब पर वित्त विभाग चुप।
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कैग
- फोटो : social media
विस्तार
विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के नाम पर पंजाब सरकार आम लोगों से उपकर (सेस) के जरिए पैसा तो वसूल रही है, लेकिन इस पैसे का उपयोग संबंधित योजनाओं के लिए नहीं हो पा रहा। खास बात है कि विभागों द्वारा सेस के रूप में लिया गया पैसा सरकार के सुपुर्द कर दिया जाता है, लेकिन वित्त विभाग इसके इस्तेमाल के बारे में जानकारी देने में आनाकानी करता रहा है। यह खुलासा कंप्ट्रोलर एंड आडिटर जनरल आफ इंडिया (कैग) की रिपोर्ट में हुआ है।
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रिपोर्ट के अनुसार सामाजिक बुनियादी ढांचा सेस, जिसके तहत फरवरी 2013 से लागू स्टांप ड्यूटी पर एक फीसदी की दर से सेस लिया जाता है, इसके मद में राजस्व एवं पुनर्वास विभाग ने 2018-19 के दौरान 231.29 करोड़ रुपये जुटाए। लेकिन यह राशि कहां खर्च की गई, इस बारे में वित्त विभाग ने कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है।
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दूसरी ओर पंजाब प्राचीन, ऐतिहासिक स्मारक, पुरातात्विक महत्व के स्थान और सांस्कृतिक धरोहरों के रखरखाव के लिए 50 करोड़ से अधिक की लागत वाले सड़कों, पुलों, फ्लाइओवरों व पुलों के नीचे सड़कों के निर्माण के उपक्रमों पर एक फीसदी के दर से लगाए गए कल्चर सेस की हालत यह रही कि 2013 से 2019 के बीच सरकार ने 288.93 करोड़ रुपये जुटाए। लेकिन डायरेक्टर सांस्कृतिक मामले, पुरातत्व एवं अजायब घर, जोकि इस संबंधी बोर्ड के सदस्य सचिव भी हैं, ने 335.90 करोड़ रुपये खर्च कर डाले। आखिरकार अतिरिक्त खर्च किए गए 46.97 करोड़ की राशि राज्य सरकार को अपने बजट से देनी पड़ी।
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पंजाब में भवन निर्माण के कार्यों में लगे मजदूरों के उत्थान के लिए सरकार ने भवन व अन्य निर्माण मजदूर कल्याण बोर्ड की स्थापना की है, लेकिन इनके प्रति सरकार कितनी लापरवाह है, उसका उदाहरण भी कैग की रिपोर्ट में सामने आया है। दरअसल, राज्य सरकार की ओर से निर्माण मजदूरों के कल्याण के लिए, उन्हें रोजगार प्रदाता द्वारा खर्च की गई निर्माण लागत पर केंद्र सरकार द्वारा घोषित दर के हिसाब से सेस लिया जाता है।
पंजाब में यह सेस कुल निर्माण लागत पर एक फीसदी की दर से लिया जाता है। कैग ने खुलासा किया है कि 2009 से 2019 के दौरान पंजाब सरकार ने 1715.03 करोड़ रुपये इस मद में सेस के रूप में जुटाए। लेकिन निर्माण मजदूरों के कल्याण के लिए केवल 696.25 करोड़ रुपये (40.60 फीसदी) ही खर्च किए। इस खर्च की गई राशि में भी 28.66 करोड़ रुपये प्रशासनिक कार्यों पर लगा दिए गए। कुल मिलाकर सरकार के पास इस सेस के तहत 1018.78 करोड़ रुपये की राशि बिना खर्च किए रखी हुई है।
कई अन्य सेस की राशि का भी नहीं है हिसाब
बीते सप्ताह पंजाब विधानसभा में पेश की गई कैग की रिपोर्ट में सेस के बारे में मार्च, 2019 तक हिसाब ही दर्शाया गया है, लेकिन पंजाब सरकार की वित्त व्यवस्था की मौजूदा स्थिति का आकलन करें तो जनता से 1 जून 2020 से कोवडि सेस, शराब की बिक्री पर आबकारी सेस और गो सेवा सेस, 18 नगर काउंसिलों व नगर पंचायतों के जरिये आम लोगों से बिजली के प्रति यूनिट पर 2 पैसे गो-सेस लिया जा रहा है।
पीएसपीसीएल ने 2019-20 के दौरान गो-सेस के रूप में 80 करोड़ रुपये जुटाए, लेकिन इस राशि का इस्तेमाल कहां हुआ, इस बारे में पीएसपीसीएल को भी नहीं पता है। पीएसपीसीएल के अधिकारियों का कहना था कि सेस के रूप में एकत्र राशि सरकारी खजाने में जमा करा दी जाती है। उसके इस्तेमाल के बारे में सरकार ही फैसला लेती है। दूसरी ओर आबकारी विभाग भी सेस के रूप में जमा राशि के बारे में यही दलील देता है कि सारा पैसा सरकारी खजाने में जमा करा दिया जाता है, लेकिन वित्त विभाग ने कभी इस संबंध में जानकारी सार्वजनिक नहीं दी।