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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab and Haryana High Court issued notice to CBI in case of death during terrorism in Punjab

Punjab News: आतंकवाद के दौरान 1984 से 95 के बीच 6733 मौत, सीबीआई को हाईकोर्ट का नोटिस

Thu, 08 Feb 2024 12:37 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 08 Feb 2024 12:37 AM IST
सार

याचिकाकर्ता ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से इन मौतों की स्वतंत्र और प्रभावी जांच की मांग की। पंजाब डॉक्यूमेंटेशन एंड एडवोकेसी प्रोजेक्ट (पीडीएपी) व अन्य ने हाईकोर्ट में यह याचिका दाखिल की। याची का कहना है कि 1984 से 1995 के बीच पंजाब पुलिस और सुरक्षाबलों ने पीड़ितों का अपहरण कर उन्हें मार डाला।

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Punjab and Haryana High Court issued notice to CBI in case of death during terrorism in Punjab
सीबीआई। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पंजाब में आतंकवाद के दौर में 1984 से 1995 के बीच मुठभेड़ हत्याओं, हिरासत में मौत और शवों के अवैध दाह संस्कार के 6733 मामलों की जांच रिटायर हाईकोर्ट जज, सीबीआई या उच्च अधिकारियों की एसआईटी को सौंपने की जनहित याचिका में मांग की गई है। याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई, पंजाब सरकार व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

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पंजाब डॉक्यूमेंटेशन एंड एडवोकेसी प्रोजेक्ट (पीडीएपी) व अन्य की ओर से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि 1984 से 1995 के दौरान पंजाब पुलिस और सुरक्षाबलों ने पीड़ितों का अपहरण कर उन्हें मार डाला और उनके शवों का लावारिस और अज्ञात के रूप में दाह संस्कार कर दिया। कुछ शवों को नदियों और नहरों में फेंक दिया गया तो कुछ को अज्ञात स्थानों पर जला दिया गया। जिन्हें फांसी की सजा मिली थी उन्हें परिजनों को सूचित किए बगैर फांसी दे दी गई और शव को परिजनों को सौंपने के स्थान पर खुद ही अंतिम संस्कार कर दिया।
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याची ने कहा कि इन हत्याओं की एक स्वतंत्र और प्रभावी जांच होनी चाहिए और लीपापोती में शामिल अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए। याचिका में बताया गया कि मानवाधिकार कार्यकर्ता सरदार जसवंत सिंह खालरा का पंजाब पुलिस ने अपहरण कर हत्या कर दी थी। उनकी पत्नी परमजीत कौर ने इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में उठाया था। 

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खालरा ने एक प्रेस नोट में सार्वजनिक रूप से खुलासा किया था कि उन्होंने अमृतसर, तरनतारन और मजीठा में तीन श्मशानों से 2000 से अधिक अवैध दाह संस्कार के सबूत एकत्र किए थे। तब सुप्रीम कोर्ट ने दाह-संस्कार के तीन मामलों तक सुनवाई सीमित कर दी थी और बाकी मामले कार्रवाई के दायरे से बाहर हो गए थे।

इस मामले में जांच सीबीआई को सौंपी गई थी और गुप्त दाह संस्कार से लगभग 1528 व्यक्तियों की पहचान हुई थी। सीबीआई ने कुछ मामलों में आरोप पत्र दायर किया था जिसमें पंजाब पुलिस के कई अधिकारियों को हत्या और अन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था। याची ने दावा किया कि उन्होंने जानकारी जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है और तीन श्मशान घाटों के बाहर अवैध दाह-संस्कार के आंकड़ों को शामिल किया है। इसके साथ ही पंजाब के 26 जिलों व ब्लॉक से जानकारी ली गई है। 

याचिकाकर्ता ने आठ साल मेहनत कर उस दौरान हुई हत्याओं को लेकर आंकड़े एकत्रित किए हैं। सरकारों की इस दलील कि अज्ञात पीड़ितों की पहचान नहीं की जा सकी, याची के संगठन की ओर से 75 प्रतिशत से अधिक पीड़ित की पहचान की गई (अमृतसर में 2067 दाह संस्कारों में से लगभग 1527)।

लापता हुए युवाओं को लेकर जांच जरूरी

पंजाब में आतंकवाद के दौरान 1984 से 1994 के बीच गायब हुए पंजाब के युवाओं के मामले की जांच का आदेश जारी करने की याचिका में अपील की गई है। याची संस्था की ओर से बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई ने 1996 में अपनी रिपोर्ट पेश कर बताया था कि 1984 से लेकर 1994 के बीच सिर्फ तरनतारन और अमृतसर के श्मशान घाटों में ही अवैध तरीके से 984 लोगों का संस्कार किया गया था। इस मामले में महज दो प्रतिशत पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को ही दोषी करार दिया गया है। अगर राज्य के सभी श्मशान घाटों से उस दौरान की जानकारी जुटाई जाए तो कई अन्य मामलों का खुलासा हो सकता है।

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