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पीयू यूआईपीएस 13 राज्यों के 40 शिक्षकों को देगा औषधि का प्रशिक्षण
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के औषधि विभाग (यूआईपीएस) की ओर से सोमवार से देश भर के शिक्षकों के लिए एक सप्ताह का प्रक्षिक्षण कार्यक्रम आयोजित करवाया गया। यह कार्यक्रम यूजीसी के निर्देशानुसार करवाया जा रहा है। इस कार्यक्रम में सात दिनों तक 13 राज्यों के 40 शिक्षकों को पीयू यूआईपीएस व विशेषज्ञ औषधियों व पीयू में विभिन्न विषयों पर की गई शोध की जानकारी देंगे।
पीयू यूआईपीएस की विभागाध्यक्ष डॉ. इंदु ने बताया कि सात दिवसीय यह कार्यक्रम ऑनलाइन माध्यम में ही आयोजित करवाया जा रहा है। कार्यक्रम में हम प्रतिभागी शिक्षकों को व्याख्यान, कार्यशालाओं और शोध पर आधारित चर्चा के जरिए प्रक्षिक्षण देंगे। प्रक्षिक्षण देने के लिए विभाग के शैक्षणिक कर्मचारियों के साथ औषधि क्षेत्र के विशेषज्ञ भी मौजूद रहेंगे। उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों को विभाग में हुए शोध कार्यों के बारे में अवगत करवाया। कार्यक्रम का उद्घाटन बनारस हिंदु विश्वविद्यालय के विज्ञान इंस्टीट्यूट के निदेशक बीआर मितल ने किया। उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों को यूजीसी की ओर से जारी सात दिवसीय पाठ्यक्रम की जानकारी दी। प्रक्षिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को दवा उत्पाद के क्षेत्र, नवीन दवा वितरण प्लेटफॉर्म और औषधि उद्योग व इसमें हो रहे नए बदलावों के बारे में जानकारी देना है।
परमाणु चिकित्सा नैदानिक व चिकित्सीय दोनों विकल्प में प्रभावी
प्रोफेसर मितल ने बताया कि परमाणु चिकित्सा न केवल नैदानिक बल्कि चिकित्सीय विकल्प के रूप में भी प्रभावी है। उन्होंने प्रतिभागियों को इसका महत्व समझाया। आगे बताया कि रेडियोन्यूक्लियोटाइड्स टैगिंग का उपयोग स्तन कैंसर, न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर और थायराइड कैंसर में एंटीबॉडी थैरेपी में किया जा सकता है।
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वैक्सीन बनाने से पहले जीवों पर उसके प्रभाव तय हो
पीयू विज्ञान संकाय के पूर्व डीन प्रो. प्रिंस शर्मा ने रिवर्स वैक्सीनोलॉजी पर चर्चा की। उन्होंने वैक्सीन कैसे बनाई जानी चाहिए के बारे में बताया कि वैक्सीन बनाने से पहले ही तय करना चाहिए कि क्या वे सभी जीवों पर काम करेगी। जीवों पर उस वैक्सीन के क्या प्रभाव होंगे, क्योंकि वैक्सीन बनाने की पूरी प्रक्रिया में समय और धन दोनों लगते हैं, इसलिए उसके प्रभाव को पहले सुनिश्चित किया जाना चाहिए। संक्रमण को हम प्रभावी विधि से हाथ धोकर भी कम कर सकते हैं।
क्या है रिवर्स वैक्सीनोलॉजी
रिवर्स वैक्सीनोलॉजी एंटीजन और एपिटोप्स की पहचान करने के लिए एक जीव के जीनोम की जांच में मदद करता है, जो वैक्सीन के लिए उम्मीदवार का चयन करने में मददगार होते हैं। एंटीजन एक टॉक्सिन जो शरीर में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रेरित करता है। वहीं एपिटोप एक प्रोटीन या एंटीजन का एक हिस्सा है, जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को उत्तेजित करने में सक्षम है।
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पीयू यूआईपीएस की विभागाध्यक्ष डॉ. इंदु ने बताया कि सात दिवसीय यह कार्यक्रम ऑनलाइन माध्यम में ही आयोजित करवाया जा रहा है। कार्यक्रम में हम प्रतिभागी शिक्षकों को व्याख्यान, कार्यशालाओं और शोध पर आधारित चर्चा के जरिए प्रक्षिक्षण देंगे। प्रक्षिक्षण देने के लिए विभाग के शैक्षणिक कर्मचारियों के साथ औषधि क्षेत्र के विशेषज्ञ भी मौजूद रहेंगे। उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों को विभाग में हुए शोध कार्यों के बारे में अवगत करवाया। कार्यक्रम का उद्घाटन बनारस हिंदु विश्वविद्यालय के विज्ञान इंस्टीट्यूट के निदेशक बीआर मितल ने किया। उन्होंने प्रतिभागी शिक्षकों को यूजीसी की ओर से जारी सात दिवसीय पाठ्यक्रम की जानकारी दी। प्रक्षिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को दवा उत्पाद के क्षेत्र, नवीन दवा वितरण प्लेटफॉर्म और औषधि उद्योग व इसमें हो रहे नए बदलावों के बारे में जानकारी देना है।
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परमाणु चिकित्सा नैदानिक व चिकित्सीय दोनों विकल्प में प्रभावी
प्रोफेसर मितल ने बताया कि परमाणु चिकित्सा न केवल नैदानिक बल्कि चिकित्सीय विकल्प के रूप में भी प्रभावी है। उन्होंने प्रतिभागियों को इसका महत्व समझाया। आगे बताया कि रेडियोन्यूक्लियोटाइड्स टैगिंग का उपयोग स्तन कैंसर, न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर और थायराइड कैंसर में एंटीबॉडी थैरेपी में किया जा सकता है।
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वैक्सीन बनाने से पहले जीवों पर उसके प्रभाव तय हो
पीयू विज्ञान संकाय के पूर्व डीन प्रो. प्रिंस शर्मा ने रिवर्स वैक्सीनोलॉजी पर चर्चा की। उन्होंने वैक्सीन कैसे बनाई जानी चाहिए के बारे में बताया कि वैक्सीन बनाने से पहले ही तय करना चाहिए कि क्या वे सभी जीवों पर काम करेगी। जीवों पर उस वैक्सीन के क्या प्रभाव होंगे, क्योंकि वैक्सीन बनाने की पूरी प्रक्रिया में समय और धन दोनों लगते हैं, इसलिए उसके प्रभाव को पहले सुनिश्चित किया जाना चाहिए। संक्रमण को हम प्रभावी विधि से हाथ धोकर भी कम कर सकते हैं।
क्या है रिवर्स वैक्सीनोलॉजी
रिवर्स वैक्सीनोलॉजी एंटीजन और एपिटोप्स की पहचान करने के लिए एक जीव के जीनोम की जांच में मदद करता है, जो वैक्सीन के लिए उम्मीदवार का चयन करने में मददगार होते हैं। एंटीजन एक टॉक्सिन जो शरीर में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रेरित करता है। वहीं एपिटोप एक प्रोटीन या एंटीजन का एक हिस्सा है, जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को उत्तेजित करने में सक्षम है।