चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों पर आर्थिक संकट मंडरा रहा है। उन्हें छात्रावासों में खाने के रेट अधिक देने पड़ रहे हैं। आक्रोशित छात्रों का कहना है कि पीयू एक बैठक कर यह समस्या भूल गई। छात्रों के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह बढ़े हुए दाम दे सकें। वहीं, छात्र नेताओं ने भी पीयू प्रशासन को इस संबंध में पत्र लिखे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में वैसे ही आर्थिक संकट में गुजर रहे हैं, पीयू को उनकी मदद करनी चाहिए।
कोरोना की दूसरी लहर के बाद छात्रों को कैंपस में बुलाना शुरू किया गया तो मेस व कैंटीन भी खोली गईं। खाना बनना शुरू हुआ। छात्रों ने पुराने रेट से भुगतान किया तो संचालकों ने नए दाम मांगे। रेट बढ़े तो छात्र परेशान हो गए। छात्र संगठनों तक मामला पहुंचा तो प्रदर्शन आदि हुए। पीयू ने रेट कम करने का आश्वासन देकर कमेटी बनाई और एक बैठक की गई, लेकिन यह मुद्दा हल नहीं हो सका। छात्रों ने पीयू का कहना है कि वैसे ही वे कोरोना से परेशान हैं। खाने के रेट कम कर उन्हें राहत प्रदान की जानी चाहिए। उधर, छात्र नेताओं का कहना है कि पीयू इस काम में देरी न करे अन्यथा प्रदर्शन किए जाएंगे। वहीं दूसरी ओर मेस व कैंटीन संचालकों ने पीयू से बताया है कि छात्रावासों में छात्रों की संख्या कम होने के कारण उनकी लागत नहीं निकल पा रही है। उनके पास वर्कर्स को पैसे देने के लिए नहीं हैं। पीयू ने उनकी भी बात सुनी और कहा है कि जल्द ही समस्या हल होगी।