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पंजाब में कॉलेजों के बंटवारे के प्रस्ताव का विरोध, धरना-प्रदर्शन
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चंडीगढ़। पीयू शासन सुधार के लिए बनाई गई हाई पावर कमेटी की ओर से कॉलेजों को भौगोलिक आधार पर बांटने के प्रस्ताव का विरोध लगातार बढ़ रहा है। वीरवार को एसएफएस, सोई छात्र संगठनों ने पीयू वीसी कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। चेतावनी दी कि यदि उच्च स्तरीय समिति के इस सुझाव को वापस नहीं लिया गया तो पंजाब में युवा शांत नहीं बैठेंगे। इसके परिणाम गलत होंगे। साथ ही छात्रों ने सीनेट चुनाव भी जल्द से जल्द करवाने की मांग उठाई। इसी के साथ सोई छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
पीयू से कॉलेज नहीं होना चाहते दूर, प्रस्ताव वापस लें
एसएफएस, सोई के कार्यकर्ता वीसी कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए। वहां पर धरना दिया। पूर्व सीनेटर भी पहुंचे। इसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। छात्र नेता संदीप कुमार ने कहा कि पंजाब के कॉलेजों को भौगोलिक आधार पर नहीं बांटा जा सकता। जहां से जो कॉलेज जुड़ा है, उसे दूर नहीं किया जाना चाहिए। पीयू से कोई कॉलेज दूर नहीं जाना चाहते। उन्होंने प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। एएसए के अध्यक्ष गुरदीप का कहना है कि सीनेट के लिए जो खाका समिति की ओर से तैयार किया गया है उसमें आरक्षण लागू होना चाहिए था, लेकिन इसके लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इसके लिए वह लड़ाई लड़ेंगे। सोई के प्रदेशाध्यक्ष अर्शदीप सिंह ने भी विचार रखे।
छात्रों से एकजुटता का आह्वान
प्रो. मंजीत सिंह ने कहा कि पीयू शासन सुधार की कोई आवश्यकता नहीं थी, लेकिन यहां संघ के लोग अपनी पैठ जमाने के लिए शासन सुधार कर रहे हैं। सिंडिकेट में सभी अपने लोगों का मनोनयन करना चाहते हैं। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि सभी एकजुट रहें और इसका विरोध करें। उन्होंने कहा कि तीन साल से पीयू में माहौल खराब है। हर मांग के लिए छात्रों को प्रदर्शन करना पड़ता है। वह पहले छात्रावास पूरी तरह खुलवाएं। उसके बाद कक्षाएं शुरू करवाएं। छात्रों के दबाव के कारण ही पुस्तकालय पीयू प्रशासन को खोलना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि पीयू शासन सुधार समिति अपने प्रस्तावों को वापस ले अन्यथा परिणाम भुगतने होंगे।
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पीयू से कॉलेज नहीं होना चाहते दूर, प्रस्ताव वापस लें
एसएफएस, सोई के कार्यकर्ता वीसी कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए। वहां पर धरना दिया। पूर्व सीनेटर भी पहुंचे। इसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। छात्र नेता संदीप कुमार ने कहा कि पंजाब के कॉलेजों को भौगोलिक आधार पर नहीं बांटा जा सकता। जहां से जो कॉलेज जुड़ा है, उसे दूर नहीं किया जाना चाहिए। पीयू से कोई कॉलेज दूर नहीं जाना चाहते। उन्होंने प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। एएसए के अध्यक्ष गुरदीप का कहना है कि सीनेट के लिए जो खाका समिति की ओर से तैयार किया गया है उसमें आरक्षण लागू होना चाहिए था, लेकिन इसके लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इसके लिए वह लड़ाई लड़ेंगे। सोई के प्रदेशाध्यक्ष अर्शदीप सिंह ने भी विचार रखे।
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छात्रों से एकजुटता का आह्वान
प्रो. मंजीत सिंह ने कहा कि पीयू शासन सुधार की कोई आवश्यकता नहीं थी, लेकिन यहां संघ के लोग अपनी पैठ जमाने के लिए शासन सुधार कर रहे हैं। सिंडिकेट में सभी अपने लोगों का मनोनयन करना चाहते हैं। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि सभी एकजुट रहें और इसका विरोध करें। उन्होंने कहा कि तीन साल से पीयू में माहौल खराब है। हर मांग के लिए छात्रों को प्रदर्शन करना पड़ता है। वह पहले छात्रावास पूरी तरह खुलवाएं। उसके बाद कक्षाएं शुरू करवाएं। छात्रों के दबाव के कारण ही पुस्तकालय पीयू प्रशासन को खोलना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि पीयू शासन सुधार समिति अपने प्रस्तावों को वापस ले अन्यथा परिणाम भुगतने होंगे।
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