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कांग्रेस की गुटबाजी का अखाड़ा बनी राहुल की रैली
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 20 Apr 2015 02:23 PM IST
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पंजाब कांग्रेस के दो दिग्गजों ने रविवार को दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन किया। लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रदेश प्रधान प्रताप बाजवा के बीच जंग का अखाड़ा रामलीला मैदान भी बन गया। किसान रैली के दौरान दोनों ने भीड़ जुटा कर अपनी-अपनी ताकत दिखाई।
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दोनों ही गुटों ने एक-दूसरे से ज्यादा भीड़ जुटाने का दावा किया है। दोनों ही गुटों के समर्थक दिल्ली में मजनूं का टीला पर इकट्ठे हुए और वहां से रामलीला मैदान के लिए रवाना हुए। कैप्टन गुट ने यहीं पर अपने समर्थकों को केसरिया पगड़ी, परना और पटका आदि बांटा। कैप्टन गुट के लोग केसरिया पगड़ी में पहुंचे।
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ज्यादातर विधायक कैप्टन गुट के साथ थे। इस गुट ने करीब दस हजार लोग जुटाने का दावा किया है। वहीं, कैप्टन गुट का दावा है कि बाजवा गुट के सिर्फ तीन हजार लोग ही पहुंचे। उधर, बाजवा गुट ने ढाई सौ बसों और एक हजार कारों से बीस हजार की भीड़ जुटाने का दावा किया है।
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इस गुट का कहना है कि कैप्टन गुट के केसरिया पगड़ी वाले महज दो हजार लोग ही वहां थे। रैली के दौरान बाजवा और सीएलपी लीडर सुनील जाखड़ को बोलने का मौका दिया गया। बाजवा गुट इसे हाईकमान का संकेत मानकर चल रहा है।
अमरिंदर को राहुल विरोध के कारण मंच पर जगह नहीं
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की पार्टी अध्यक्ष के पद पर ताजपोशी को लेकर भले ही विवाद तेज हो मगर रैली में इसे दूर रखने की पूरी कोशिश की गई। हालांकि राहुल को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की लंबे समय से वकालत करने वाले दिग्विजय सिंह यहां भी नहीं चूके।
उन्होंने कहा, ‘राहुल जी पूरा देश आपसे उम्मीद करता है। आपको नेतृत्व देना है। ये लड़ाई लड़नी है।’ रैली में राहुल विरोधी कैंप के नेताओं मसलन, कैप्टन अमरिंदर सिंह, शीला दीक्षित, अहमद पटेल, अंबिका सोनी, जनार्दन द्विवेदी का मंच पर मौजूद नहीं रहना चर्चा का विषय बना रहा।
शीर्ष नेताओं ने अपने भाषण में सोनिया और राहुल दोनों के नेतृत्व का खास ध्यान रखा। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह समेत अन्य नेताओं ने सोनिया गांधी को किसानों की आवाज बुलंद करने के लिए धन्यवाद किया।
पंजाब के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा को बोलने का मौका मिला। मगर उनके विरोधी और राहुल को अध्यक्ष बनाने पर ऐतराज जताने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह मंच से नीचे ही बैठे रहे। शीला दीक्षित भी मुख्य मंच से दूर रहीं।