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Chandigarh News: लेह व कारगिल के लोग चार बिंदुओं पर सहमत, दिल्ली में साथ जुड़ेंगे सांसद हनीफा

Sun, 29 Sep 2024 03:55 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 29 Sep 2024 03:55 AM IST
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People of Leh and Kargil agree on four points, MP Hanifa will join them in Delhi
चंडीगढ़। लद्दाखी लोग वर्ष 2019 के बाद से लगातार लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षक व रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। एक सितंबर से उन्होंने लद्दाख से दिल्ली चलो पदयात्रा शुरू की है जिसके तहत चंडीगढ़ में शनिवार को उनका दूसरा दिन था। इस दौरान लद्दाख के मुद्दों, लेह और कारगिल से जुड़ी मांगों, नेताओं के रवैये पर अमर उजाला ने उनसे विशेष बातचीत की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश-
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सवाल : क्या छठी अनुसूची सुरक्षा की मांग 2019 में धारा-370 हटने के बाद से की जा रही है या उससे पहले भी उठी है?
जवाब : वर्ष 2019 से पूर्व छठी अनुसूची सुरक्षा में रुचि थी लेकिन जम्मू-कश्मीर में इसका पास होना मुश्किल था। साथ ही धारा 370 में पर्यावरण संरक्षण के बहुत से नियम थे। कश्मीर से धारा-370 हटने के बाद वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव, 2020 के स्थानीय निकाय चुनाव में नेताओं ने अपने घोषणापत्र में लद्दाखियों को छठी अनुसूची सुरक्षा दिलाने का वादा किया था लेकिन अब तक केंद्र सरकार मामले को लटकाए हुए है।
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सवाल : लेह छठी अनुसूची की मांग कर रहा है जबकि कारगिल राज्य की, ऐसे में क्या कारगिल के लोगों का समर्थन आपको है या नहीं?
जवाब : यह बात सही है कि लेह छठी अनुसूची में शामिल होने और कारगिल राज्य के दर्जे की मांग कर रहा है लेकिन दोनों जगह के लोगों ने चार बिंदुओं पर अपनी सहमति जताई है। लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस जिन चार बिंदुओं पर सहमत हैं, उनमें लद्दाख को राज्य का दर्जा देना, छठी अनुसूची में शामिल करना, पब्लिक सर्विस कमीशन की स्थापना और लोकसभा की दो सीटें शामिल हैं। इन्हीं चार बिंदुओं की मांग को हम पदयात्रा में लेकर चल रहे हैं, जिसमें कारगिल के लोग भी हमारे साथ हैं। अपेक्स बॉडी में शामिल नेताओं द्वारा ही लद्दाख की मांगों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है लेकिन उन्हें उतनी मीडिया कवरेज नहीं मिल रही, जितनी मुझे।
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सवाल : क्या लद्दाख के निर्दलीय सांसद मोहम्मद हनीफा भी आपके साथ पद यात्रा में जुड़ेंगे?
जवाब : अभी तक मोहम्मद हनीफा पदयात्रा में नहीं जुड़े हैं लेकिन दिल्ली में वह हमारे साथ जुड़ेंगे। वह भी चार बिंदुओं की मांग का समर्थन कर रहे हैं। दिल्ली से पूर्व वह पदयात्रा में क्यों नहीं जुड़े इसके बारे में आप उनसे पूछिए, मुझे इसके बारे में नहीं पता।

सवाल : मांगों पर क्या आपकी केंद्र सरकार से कोई बातचीत हुई है? दिल्ली जाकर आपकी बात नहीं सुनी गई तो क्या करेंगे?
जवाब : अभी तक केंद्र सरकार के साथ कोई ठोस बातचीत नहीं हुई है इसलिए हम दिल्ली जा रहे हैं। गुरुद्ववारे से रविवार सुबह छह बजे डेराबस्सी के लिए पैदल यात्रा के लिए निकलेंगे और 22 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। हम गांधी जी के बताए अहिंसा के मार्ग पर चले हैं और दो अक्तूबर को दिल्ली पहुंचेंगे। वहां पर हमारी बात नहीं सुनी जाती है तो उसके बाद हम क्या करेंगे, वह उस वक्त ही पता चलेगा। अभी इसे लेकर रणनीति नहीं बनाई है।


सवाल : पद यात्रा में 40 से 60 वर्ष की उम्र के बीच के लोग अधिक हैं और युवाओं की अधिक भागीदारी नहीं दिख रही, ऐसा क्यों?
जवाब : पदयात्रा का आयोजन विभिन्न छात्र संगठनों के सहयोग से ही मुमकिन हुआ है। कई युवा हमारे साथ जुड़े हैं। युवा अलग-अलग पेशे से हैं और उन पर कई जिम्मेदारियां हैं। 40 और उससे अधिक उम्र के लोगों के कंधों पर कम जिम्मेदारियां हैं, इस कारण वह यात्रा में सहयोग दे पा रहे हैं लेकिन इस यात्रा में हमें युवाओं का पूरा समर्थन मिल रहा है।
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