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कोर्ट कॉम्पलैक्स शुरू, चैंबर्स का मामला गर्माया

Sun, 03 Jan 2016 06:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली Updated Sun, 03 Jan 2016 06:00 PM IST
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opening of court complex, dispute of lawyer chamber in mohali

मोहाली में सेक्टर-76 स्थित नए ज्यूडिशियल कोर्ट कांप्लेक्स में शनिवार को अदालत का कामकाज शुरू हो गया। लेकिन, वकीलों को अस्थाई चैंबर के लिए जगह अलाट करने का मामला गरमा गया है।

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वकीलों के एक ग्रुप ने अदालत परिसर में धरना दिया। इसके बाद जजों ने बीच बचाव करके स्थित को संभाला। इससे 15 मिनट तक अदालत का काम भी प्रभावित हुआ। इसके अलावा सरकारी वकील और नायब कोर्ट को भी उचित जगह न मिल पाने के चलते रोष में हैं। जिला अदालत में कई अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। जिससे वहां आने वाले लोगों को भी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।
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जानकारी के मुताबिक, ज्यूडिशियल कोर्ट कांप्लेक्स करीब सात एकड़ में बनाया गया है। अभी तक एक ही ब्लॉक तैयार हो पाया है। जिसके चलते ऐसी अव्यवस्था पैदा हुई। अभी तक वकीलों के स्थाई चैंबर नहीं बन पाए हैं। चैंबर अलॉट कमेटी ने तय किया था कि फेज-3बी1 स्थित जिला अदालत में चल रहे 130 चैंबरों को वहां पर अस्थाई जगह अलॉट कर दी जाएगी।
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इसी के विरोध में वकीलों का एक गुट संघर्ष की राह पर आ गया। उन्होंने अदालत परिसर के एंट्री गेट पर धरना दिया। साथ ही वहां से लोगों की आवाजाही रोक दी। इसी बीच मौके पर पुलिस के एसपी सिटी आशीष कपूर मौके पर पहुंचे। साथ ही निर्माणाधीन साइड से आवाजाही शुरू करवाई।

धरना कर रहे वकीलों का कहना था कि सभी वकीलों को चैंबर अलॉट किए जाएं। भले ही वह कहीं से आए हों। वहीं, अभी जब तक निर्माण कार्य चल रहा है किसी दूसरी जगह वकीलों को जगह दी जाए। जहां जगह दी जा रही है, वहां हादसे का डर है। इसी बीच माहौल गर्माता देखकर जज आगे आए। उन्होंने वकीलों के पक्ष को सुना।

आखिर में तय हुआ कि फेज-3बी1 स्थित जिला अदालत में लगने वाले चैंबरों की तरह उक्त अदालत में अस्थाई चैंबरों के लिए जगह अलॉट की जाएगी। एक चैंबर में तीन से चार वकील बैठेंगे। एक वकील एफिडेबिट देगा। वह अपनी मर्जी से उसके कैबिन में बैठने वाले वकीलों को चुनने का अधिकार होगा। आखिरी में वकीलों ने धरना खत्म किया। वहीं, चैंबरों के लिए जगह की की निशानदेही की गई।

सरकारी वकील 12, कमरे केवल चार
नए ज्यूडिशियल कांप्लेक्स में सरकारी वकील भी मुसीबत में है। अदालत में 12 सरकारी वकील हैं। लेकिन उन्हें केवल चार ही कमरे अलॉट किए गए हैं। वहीं, क्लेरिकल स्टाफ को भी सरकारी वकीलों के कमरों के बाहर बैठकर काम चलाना पड़ रहा है। जबकि उनका रिकॉर्ड को भी नुकसान पहुंचने का डर है।

इसी तरह नायब कोर्ट को भी सरकारी वकीलों के कमरों में शरण लेनी पड़ रही है। वहीं, रिकॉर्ड की करीब 25 अलमारियां हैं। उन्हें भी संभालने में दिक्कत आ रही है।

पार्किंग को जगह नहीं, वाहन सड़कों पर
नए कोर्ट कांप्लेक्स में पार्किंग का कोई इंतजाम नहीं है। वकीलों के अलावा कोर्ट आने वाले लोगों को सड़क के किनारे ही वाहन खड़े करके आना जाना पड़ रहा है। जबकि कोर्ट के बाहर से गुजरने वाली सड़क पर हमेशा आवाजाही अधिक रहती है। इससे हादसों का भी हर समय खतरा है। इस रोड पर कई बड़े हादसे हो चुके हैं।

अदालत तक पहुंचने के लिए खाने पड़े धक्के
अदालत शिफ्ट होने के चलते आम लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अधिकतर लोग पहले फेज-3बी1 पुरानी अदालत पहुंच गए। इसके बाद उन्हें नई अदालत के पते पर भेजा गया। जब वह नई अदालत के मेन गेट पर पहुंचे तो उन्हें अगली तरफ सें नहीं जाने दिया गया। इसके बाद उन्हें बाहर से होकर जाना पड़ा। करीब डेढ़ किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ा।


दो कमरे मालखाने बने, पुलिस को मिले नहीं
नए कोर्ट कांप्लेक्स में पुलिस के मालखाने के लिए दो कमरे बने हैं। लेकिन दोनों कमरे अभी तक पुलिस के हवाले नहीं किए गए हैं। जिससे भी पुलिस को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।

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