फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Navjot Sidhu Using Old Strategy Against Captain Amrinder Singh, Congress

नवजोत सिद्धू जो कर रहे हैं, पहले भी कर चुके हैं और भाजपा नेतृत्व को टेकने पड़े थे घुटने, जानिए मामला

Sat, 22 Jun 2019 09:31 AM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 22 Jun 2019 09:31 AM IST
विज्ञापन
Navjot Sidhu Using Old Strategy Against Captain Amrinder Singh, Congress
नवजोत सिद्धू
नवजोत सिद्धू इन दिनों जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं, वैसी वे पहले भी कर चुके हैं और उस वजह से भाजपा नेतृत्व को घुटने टेकने पड़े थे। 15 दिन से अपनी नई जिम्मेदारी नहीं संभाल रहे मंत्री नवजोत सिद्धू प्रदेश की राजनीति के केंद्रीय बिंदु बन गए हैं। 2004 में राजनीति में आने वाले नवजोत सिद्धू का विवादों के साथ चोली दामन का नाता है।
विज्ञापन


2009 में लोकसभा चुनाव में जब सिद्धू को तीसरी बार जीत हासिल हुई थी, तब सिद्धू ने नगर सुधार ट्रस्ट के चेयरमैन राजिंदर मोहन सिंह छीना की नियुक्ति का इतना सख्त विरोध किया था, कि भाजपा नेतृत्व को घुटने टेकने पड़े। एक बार फिर सिद्धू अपने पुराने पैंतरे से कैप्टन अमरिंदर और कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बना रहे हैं और वो भी अपनी शर्तों के अनुसार विभाग पाने के लिए।
विज्ञापन


हालांकि लोकसभा चुनाव में करारी हार झेल चुके राहुल गांधी के लिए कैप्टन अमरिंदर को उलझाना आसान नहीं होगा। यही कारण है राहुल गांधी व प्रियंका गांधी से मुलाकात करने के बावजूद सिद्धू-कैप्टन का विवाद हल नहीं हो सका है।
विज्ञापन
विज्ञापन

2009 में प्रदेश भाजपा ने पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली की सलाह के बाद राजिंदर मोहन सिंह छीना को नगर सुधार ट्रस्ट का चेयरमैन नियुक्त किया था। उन दिनों सिद्धू जेटली को अपना राजनीतिक गुरु कहते थे। छीना की नियुक्ति का मुद्दा न बनाने के लिए जेटली और प्रदेश के तत्कालीन अध्यक्ष कमल शर्मा ने सिद्धू से आग्रह किया था, लेकिन सिद्धू नहीं माने। उन्होंने घोषणा कर दी थी कि जब तक छीना को ट्रस्ट चेयरमैन के पद से नहीं हटाया जाता, वह गुरु नगरी नहीं आएंगे। सिद्धू ने विवाद के हल तक खामोशी धारण कर ली थी। सिद्धू ने यही रणनीति इस बार अपनाई है।

प्रदेश की राजनीति से दूर तो नहीं जाएंगे सिद्धू
इस बात की संभावना कम ही है कि नवजोत सिद्धू कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर का कोई पद स्वीकार करेंगे। सिद्धू ने जब राज्यसभा सीट से इस्तीफा दिया था, तब उन्होंने कहा था कि भाजपा उन्हें प्रदेश की राजनीति से दूर करना चाहती है, लेकिन उनके लिए पंजाब पहले है। जब सिद्धू ने पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था तब ‘अमृतसर फर्स्ट’ का नारा दिया था।

नवजोत सिंह सिद्धू बीते तीन दिनों से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने के लिए दिल्ली में डटे थे, लेकिन बुलावा न आने पर वीरवार रात वापस पंजाब लौट गए। इस बीच, चंडीगढ़ में सिद्धू के आवास से मिली जानकारी के अनुसार वे अभी दिल्ली में ही हैं, चंडीगढ़ नहीं लौटे हैं। अभी तक उन्होंने बिजली महकमे का कार्यभार भी नहीं संभाला है।

दस जून को नवजोत सिद्धू, प्रियंका और अहमद पटेल की मौजूदगी में राहुल से मिले थे। सिद्धू ने लिखित तौर पर अपना पक्ष उनके समक्ष रखा था। उस बैठक में पटेल को इस बात का जिम्मा सौंपा गया था कि पंजाब में सिद्धू और मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के बीच दूरियां कम कराई जाएं। हाल ही में सिद्धू को दिल्ली बुलाकर संगठन के काम से जोड़ने की खबरें आई थीं।

इस प्रस्ताव से सिद्धू ने इनकार कर दिया था, जिससे मामला फिर उलझ गया। माना जा रहा है कि सिद्धू राहुल से मिलकर अपनी भूमिका स्पष्ट करना चाहते थे, लेकिन शायद उन्हें खुद अपनी भूमिका स्पष्ट नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed