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गजब हाल: पीजीआई में एमआरआई की कीमत ज्यादा और इंतजार महीनों का...ऑडिट की टीम उठा चुकी है सवाल
Tue, 30 Sep 2025 04:11 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 30 Sep 2025 04:11 PM IST
सार
रिकॉर्ड की जांच में खुलासा हुआ कि पीजीआई की 3टी एमआरआई मशीन लंबे समय से खराब पड़ी है। मशीन बायबैक में 8 महीने 10 दिन बर्बाद हो गए, जिससे वेटिंग और बढ़ गई। अपॉइंटमेंट रजिस्टर में भी गड़बड़ियां सामने आईं।
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चंडीगढ़ पीजीआई
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चंडीगढ़ पीजीआई में मरीजों के लिए एमआरआई और पैट स्कैन जांच किसी परीक्षा से कम नहीं। पीजीआई में एमआईए और पैट स्कैन कराने के लिए मरीजों को 2 से 3 महीने तक लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, जांच की दरें भी जेब पर भारी पड़ रही हैं।
एमआरआई टेस्ट के 2500 रुपये प्रति रीजन और पेट स्कैन के लिए पूरे 7000 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां पीजीआई में वेटिंग बढ़ती जा रही है, वहीं जीएमएसएच में पीपीपी मोड पर एमआईए मशीन बिना किसी प्रतीक्षा और कम दामों पर उपलब्ध है। सेंट्रल ऑडिट टीम ने पीजीआई की इस कार्य प्रणाली पर आपत्ति जताई है।
रिकॉर्ड की जांच में खुलासा हुआ कि पीजीआई की 3टी एमआरआई मशीन लंबे समय से खराब पड़ी है। मशीन बायबैक में 8 महीने 10 दिन बर्बाद हो गए, जिससे वेटिंग और बढ़ गई। अपॉइंटमेंट रजिस्टर में भी गड़बड़ियां सामने आईं। ऑडिट टीम का कहना है कि सिर्फ तारीख दर्ज की जाती है, लेकिन यह नहीं कि तारीख कब दी गई।
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इससे इतर निदेशक का दावा है कि वेटिंग कभी 1.5 साल तक रही, जो अब 2-3 महीने पर आ गई है, लेकिन पुख्ता आंकड़ों का अभाव है। अपनी उपलब्धि को साबित करने में पीजीआई प्रशासन फेल है। क्योंकि रिकॉर्ड मेंटेन नहीं हो रहे हैं। पीजीआई प्रशासन का कहना है कि इमरजेंसी और वार्ड मरीजों की जांच तुरंत की जाती है, और कैंसर व गंभीर रोगियों को प्राथमिकता दी जाती है। विभाग ने नाइट शिफ्ट भी शुरू की है, पर मरीजों की परेशानी फिलहाल जस की तस बनी हुई है। सुविधा विस्तार का परिणाम अब भी नजर नहीं आ रहा है।
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एमआरआई टेस्ट के 2500 रुपये प्रति रीजन और पेट स्कैन के लिए पूरे 7000 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां पीजीआई में वेटिंग बढ़ती जा रही है, वहीं जीएमएसएच में पीपीपी मोड पर एमआईए मशीन बिना किसी प्रतीक्षा और कम दामों पर उपलब्ध है। सेंट्रल ऑडिट टीम ने पीजीआई की इस कार्य प्रणाली पर आपत्ति जताई है।
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रिकॉर्ड की जांच में खुलासा हुआ कि पीजीआई की 3टी एमआरआई मशीन लंबे समय से खराब पड़ी है। मशीन बायबैक में 8 महीने 10 दिन बर्बाद हो गए, जिससे वेटिंग और बढ़ गई। अपॉइंटमेंट रजिस्टर में भी गड़बड़ियां सामने आईं। ऑडिट टीम का कहना है कि सिर्फ तारीख दर्ज की जाती है, लेकिन यह नहीं कि तारीख कब दी गई।
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इससे इतर निदेशक का दावा है कि वेटिंग कभी 1.5 साल तक रही, जो अब 2-3 महीने पर आ गई है, लेकिन पुख्ता आंकड़ों का अभाव है। अपनी उपलब्धि को साबित करने में पीजीआई प्रशासन फेल है। क्योंकि रिकॉर्ड मेंटेन नहीं हो रहे हैं। पीजीआई प्रशासन का कहना है कि इमरजेंसी और वार्ड मरीजों की जांच तुरंत की जाती है, और कैंसर व गंभीर रोगियों को प्राथमिकता दी जाती है। विभाग ने नाइट शिफ्ट भी शुरू की है, पर मरीजों की परेशानी फिलहाल जस की तस बनी हुई है। सुविधा विस्तार का परिणाम अब भी नजर नहीं आ रहा है।