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‘मोम के रिश्ते’ में दिखाया पैसे और शोहरत के पीछे इंसान भूलता जा रहा रिश्तों की अहमियत
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टैगोर थियेटर में नाटक के मंचन के दौरान कलाकार।
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। 65 मिनट के नाटक में दर्शाया गया कि पैसा, शोहरत और हर पल दूसरे से आगे निकलने की होड़ में आज की मॉडर्न सोसाइटी में रह रहा इंसान रिश्तों की अहमियत भूलता जा रहा है। नाटक ‘मोम के रिश्ते’ की कहानी डॉ. गुरतेज सिंह की ओर से निभाई गई भूमिका ईशान के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक सरकारी विभाग में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में काम करता है। यह नाटक टैगोर थिएटर में चल रहे भरत मुनि नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को मंचित किया गया।
इसमें दिखाया गया कि भौतिकवाद इंसान के रिश्तों पर हावी हो रहा है। जिंदगी हार रही है और वो भीड़ में अकेला ही जद्दोजहद में लगा हुआ है। आदमी का खुशी से फासला बढ़ता जा रहा है। नाटक में ईशान की महत्वाकांक्षा हमेशा से ही बड़ी होती है और वह उन्हें पूरा कर अच्छे ओहदे पर नौकरी प्राप्त कर लेता है, लेकिन पद, बंगले, गाड़ी और सभी सुख सुविधाओं के बीच उसके निजी रिश्ते कहीं गुम हो जाते हैं। एक दिन ईशान के हाथ एक फाइल लगती है, जिसमें पुरानी चिट्ठियां और पोस्टकार्ड मिलते हैं। इन्हें पढ़कर खुशी के साथ ईशान की आंखें ये सोचकर भर आती हैं कि अपनों के साथ के बिना वो कितना अकेला हो गया है। कहानी फ्लैश बैक से लेकर वर्तमान तक आती है। जब वह घर पहुंचता है तो उसकी पत्नी रंजना उससे तलाक मांगती है। पत्नी के घर छोड़ने के साथ नाटक समाप्त हो जाता है। रंजना की भूमिका रूपी मान ने निभाई है।
इन कलाकारों ने किया अभिनय :- नाटक डॉ गुरतेज सिंह की ओर से लिखा और निर्देशित किया गया है। अभिनय में हनी मरजारा, राजीव अग्नेश, आकर्षण गाबा, अनिरुद्ध गुप्ता, उदय और कावेरी जोशी ने भूमिका अदा की। कलाकार कमल भारद्वाज, रुद्र वाधवा और बलविंदर ने बैकस्टेज संभाला। इस मौके पर कवि एवं रंगमंच निर्देशक डॉ राणा नय्यर मुख्य अतिथि के तौर पर पधारे।
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इसमें दिखाया गया कि भौतिकवाद इंसान के रिश्तों पर हावी हो रहा है। जिंदगी हार रही है और वो भीड़ में अकेला ही जद्दोजहद में लगा हुआ है। आदमी का खुशी से फासला बढ़ता जा रहा है। नाटक में ईशान की महत्वाकांक्षा हमेशा से ही बड़ी होती है और वह उन्हें पूरा कर अच्छे ओहदे पर नौकरी प्राप्त कर लेता है, लेकिन पद, बंगले, गाड़ी और सभी सुख सुविधाओं के बीच उसके निजी रिश्ते कहीं गुम हो जाते हैं। एक दिन ईशान के हाथ एक फाइल लगती है, जिसमें पुरानी चिट्ठियां और पोस्टकार्ड मिलते हैं। इन्हें पढ़कर खुशी के साथ ईशान की आंखें ये सोचकर भर आती हैं कि अपनों के साथ के बिना वो कितना अकेला हो गया है। कहानी फ्लैश बैक से लेकर वर्तमान तक आती है। जब वह घर पहुंचता है तो उसकी पत्नी रंजना उससे तलाक मांगती है। पत्नी के घर छोड़ने के साथ नाटक समाप्त हो जाता है। रंजना की भूमिका रूपी मान ने निभाई है।
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इन कलाकारों ने किया अभिनय :- नाटक डॉ गुरतेज सिंह की ओर से लिखा और निर्देशित किया गया है। अभिनय में हनी मरजारा, राजीव अग्नेश, आकर्षण गाबा, अनिरुद्ध गुप्ता, उदय और कावेरी जोशी ने भूमिका अदा की। कलाकार कमल भारद्वाज, रुद्र वाधवा और बलविंदर ने बैकस्टेज संभाला। इस मौके पर कवि एवं रंगमंच निर्देशक डॉ राणा नय्यर मुख्य अतिथि के तौर पर पधारे।
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