फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Members of armed forces are not ordinary citizens in terms of public conduct: High Court

सार्वजनिक आचरण के संदर्भ में सशस्त्र बल के सदस्य सामान्य नागरिक नहीं: हाईकोर्ट

Wed, 22 Oct 2025 08:05 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 22 Oct 2025 08:05 PM IST
विज्ञापन
Members of armed forces are not ordinary citizens in terms of public conduct: High Court
-छुट्टी पर रहते हुए सार्वजनिक सभा में भाषण देने वाले के विरुद्ध हाईकोर्ट का फैसला, याचिका खारिज
विज्ञापन

---
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने छुट्टी पर रहते हुए एक सार्वजनिक सभा में भाषण देने वाले सीआईएसएफ कांस्टेबल गुरनाम सिंह के विरुद्ध फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि सार्वजनिक आचरण और उत्तरदायित्व के संदर्भ में सशस्त्र बलों के सदस्य सामान्य नागरिक नहीं हैं। जस्टिस संदीप मौदगिल की पीठ ने आदेश में कहा राष्ट्र की अखंडता, सुरक्षा और एकता को बनाए रखने में उनकी भूमिका न केवल शारीरिक है, बल्कि नैतिक भी है।
वर्दी की ओर से प्रदान किए जाने वाले अधिकार और सम्मान के साथ, वर्दी के अंदर और बाहर, निष्पक्षता और गरिमा के साथ आचरण करने का दायित्व भी बढ़ जाता है। कोर्ट ने कहा कि जिसने संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली है फिर भी धार्मिक द्वेष के बीज बोने के लिए एक सार्वजनिक सभा के मंच का चयन करता है। वह उस ताने-बाने को नष्ट करता है जिसकी रक्षा करने का दायित्व उस पर है और ऐसे आचरण को हल्के में नहीं लिया जा सकता। किसी अधिकारी की ओर से किसी सभा को इस तरह संबोधित करना जिसे धार्मिक रूप से भड़काऊ माना जा सकता है न केवल पेशेवर अनुशासन, बल्कि सांविधानिक मूल्यों के साथ भी विश्वासघात है। पद और जिम्मेदारी जितनी ऊंची होगी आचरण का स्तर भी उतना ही ऊंचा होना अपेक्षित है। यह याद रखना चाहिए कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, एक मौलिक अधिकार होते हुए भी पूर्ण नहीं है और इसके साथ उचित प्रतिबंध भी जुड़े होते हैं। खासकर जब यह घृणास्पद भाषण की सीमा तक पहुंच जाता है।
विज्ञापन

धार्मिक सभा में दिया था भड़काऊ भाषण
जून 2009 में चंडीगढ़ से एनटीपीसी-दादरी में स्थानांतरित होने के तुरंत बाद गुरनाम सिंह 10 दिनों का अर्जित अवकाश दिया गया था। छुट्टी के दौरान वह जालंधर स्थित अपने पैतृक गांव रानी भट्टी गए जहां उन्होंने कथित तौर पर एक धार्मिक सभा में भड़काऊ भाषण दिया। पंजाब के एडीजीपी-इंटेलिजेंस ने गुरनाम के आचरण के बारे में 23 जुलाई, 2009 को सीआईएसएफ को एक पत्र भेजा जिसके बाद सीआईएसएफ ने उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की। गुरनाम ने अपने खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द करने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया। याची ने तर्क दिया कि कथित घटना के संबंध में पंजाब पुलिस की ओर से कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई थी। सीआईएसएफ अधिकारियों ने दलील दी कि पंजाब के एडीजीपी-इंटेलिजेंस से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई थी और बल के नियम इसके सदस्यों को सार्वजनिक अव्यवस्था पैदा करने वाली बैठकों या प्रदर्शनों में भाग लेने से रोकते हैं। उच्च न्यायालय ने सीआईएसएफ कांस्टेबल गुरनाम सिंह की ओर से दायर एक याचिका खारिज कर दी जिसमें दंड के रूप में उनके वेतन में कटौती के विभागीय आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article