2019 लोकसभा: चंडीगढ़ में कौन-कौन थे प्रत्याशी, 53.8 फीसदी मतदाताओं को नहीं था पता
- 2019 के लोकसभा चुनाव में क्रिड ने चंडीगढ़ियों पर किया था सर्वे
- 37.2 प्रतिशत मतदाताओं को वोट देने के बाद भी नोटा की जानकारी नहीं
- 42 प्रतिशत मतदाताओं को वीवीपैट मशीन के बारे में नहीं पता था
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वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान करने पहुंचे 53.8 प्रतिशत लोगों को प्रत्याशियों की जानकारी ही नहीं थी। 30 प्रतिशत को तब पता चला जब उन्होंने ईवीएम पर प्रत्याशी की फोटो देखी। वहीं, 37.2 प्रतिशत मतदाताओं को नोटा की जानकारी नहीं थी, जबकि 42 प्रतिशत मतदाताओं को वीवीपैट मशीन के बारे में नहीं पता था। यह खुलासा केंद्रीय चुनाव आयोग के कहने पर सेक्टर-19 स्थित सेंटर फॉर रिसर्च इन रूरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट (क्रिड) द्वारा किए गए सर्वे में हुआ है।
क्रिड का यह सर्वे चंडीगढ़ में 1000 व्यक्तिगत मतदाताओं के नमूने पर आधारित है। इसमें 150 लोग ग्रामीण क्षेत्रों से, 250 पुनर्वासित कालोनियों से और शेष 600 विभिन्न सेक्टरों में रहने वाले थे। इनमें 51.8 प्रतिशत पुरुष और 48.2 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं। जिन मतदाताओं पर सर्वे किया गया उनमें 43.5 प्रतिशत की उम्र 26 से 45 वर्ष के बीच जबकि 14 प्रतिशत की उम्र 18 से 25 वर्ष के बीच थी।
वहीं, 75.6 प्रतिशत लोग शादीशुदा थे। सर्वे के समय चंडीगढ़ में कुल 597 मतदान केंद्रों में से 20 केंद्रों को चुना गया था। यूटी के मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा प्रदान की गई बूथों की सूची से औचक तरीके से लोगों का चुनाव किया गया था। प्रत्येक बूथ से 50 मतदाताओं को चुना गया। ईसीआई द्वारा प्रदान किए गए मसौदा अनुसूची पर आधारित एक प्रश्नावली तैयार की गई। इस पर चंडीगढ़ के अधिकारियों से भी चर्चा की गई और फिर वही सवाल मतदाताओं से पूछे गए। 11 जून 2020 से 20 जून के बीच फील्ड सर्वे किया गया था।
केवल 1.8 प्रतिशत लोग जागरूकता अभियान से प्रेरित होकर वोट देने पहुंचे
सर्वे के लिए चुने गए 1000 मतदाताओं में से 93.3 प्रतिशत ने लोकसभा चुनाव-2019 में मतदान किया था। इसमें 90.5 प्रतिशत ने कहा कि वोट देना उनका अधिकार है जबकि 4.6 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि उन्होंने वोट सिर्फ इसलिए दिया, क्योंकि उन्हें वोटर स्लिप मिल गई थी और पोलिंग बूथ उनके घर के पास था जबकि 1.8 प्रतिशत लोग चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए अभियानों से प्रभावित होकर वोट देने पहुंचे थे।
सर्वे में 88.7 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें पोलिंग स्टेशन पर लंबी लाइन की वजह से काफी परेशानी हुई। 25.8 प्रतिशत ने कहा कि बूथ पर पीने का पानी, शौचालय और रैंप की व्यवस्था नहीं होने की वजह से परेशानी हुई जबकि करीब 2.1 प्रतिशत लोगों ने यह भी कहा कि उन्हें पोलिंग स्टेशन पर राजनीतिक दलों के बूथ ऑपरेटर द्वारा धमकाया गया।
68.3 प्रतिशत मतदाता बोले- अखबार और टीवी से मिली चुनाव से संबंधित जानकारी
सर्वे में एक और हैरान करने वाली बात सामने आई कि वोट देने पहुंचे 53.8 प्रतिशत लोगों को चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के बारे में ज्यादा जानकारी ही नहीं थी, जबकि 30 प्रतिशत लोगों को उम्मीदवार के बारे में तब पता चला, जब वह वोट देने मतदान केंद्र पहुंचे थे और उन्होंने ईवीएम पर प्रत्याशी की फोटो देखी।
12.9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने उम्मीदवार के बारे में पढ़ा और सुना था। सिर्फ 3.3 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान चलाए गए अभियानों व रैलियों से उन्हें उम्मीदवार के बारे में पता चला था। सर्वे में यह बात सामने आई कि चुनाव के दौरान जागरूकता फैलाने में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का काफी अहम रोल रहा है।
68.3 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें चुनाव से संबंधित जानकारी अखबार और टीवी के माध्यम से मिली। चुनाव आयोग की तरफ से जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर 1950 से संबंधित पूछे गए सवाल पर करीब 96 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने एक बार भी इस हेल्पलाइन नंबर पर फोन नहीं किया।
27.9 प्रतिशत लोगों ने माना- ईवीएम के नतीजे सही नहीं
सर्वे में 54.5 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें नोटा के बारे में तब जानकारी मिली, जब वह वोट देने पहुंचे थे जबकि 7.6 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें पहले से ही नोटा के बारे में पता था जबकि 37.2 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें वोट देने के बाद भी नोटा के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। सर्वे में जब वीवीपैट मशीन को लेकर लोगों से सवाल पूछे गए तो करीब 49.3 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें वीवीपैट मशीन के बारे में तब पता चला जब वोट देने पहुंचे थे।
42.6 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें पता ही नहीं था कि ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीन भी रखी हुई है। वहीं सर्वे में 48.4 प्रतिशत लोगों ने कहा कि चंडीगढ़ में मतदान करना अनिवार्य होना चाहिए, जबकि 45.3 प्रतिशत ने इस बात से इनकार किया। वहीं, 48.4 प्रतिशत लोगों ने माना कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हुए हैं और 17.3 प्रतिशत ने इससे इंकार किया। बाकी लोगों का मिलाजुला जवाब रहा। वहीं, 27.9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि ईवीएम के नतीजे सही नहीं थे।