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Chandigarh News: व्यक्ति ने महिला को पत्नी मानने से किया इन्कार, बेटे का डीएनए टेस्ट का आदेश

Fri, 30 Aug 2024 02:56 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 30 Aug 2024 02:56 AM IST
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Man refuses to accept woman as his wife
-डीएनए टेस्ट रिपोर्ट से पत्नी के गुजारा भत्ता दावे को निपटाने में होगी आसानी
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-डीएनए टेस्ट के फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ व्यक्ति की याचिका खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि विवाह से इन्कार के मामले में इसे साबित करने के लिए तकनीक का सहारा लिया जाना चाहिए। कानून बनाते हुए साइंस ने इतनी तरक्की नहीं की थी लेकिन अब यह बहुत उन्नत है। हाईकोर्ट ने व्यक्ति का उसके कथित बेटे से डीएनए मिलान का आदेश देते हुए यह टिप्पणी की है।

याचिका दाखिल करते हुए पानीपत निवासी व्यक्ति ने हाईकोर्ट को बताया था कि एक महिला ने याची को अपना पति बताते हुए गुजारा भत्ता के लिए मोहाली की फैमिली कोर्ट की शरण ली थी। फैमिली कोर्ट ने याची के डीएनए का महिला के बेटे के डीएनए से मिलान करने का आदेश दिया था। याची ने कहा कि इस प्रकार का आदेश तय प्रावधानों के खिलाफ जाकर दिया गया है। याची का महिला से कोई रिश्ता नहीं है और डीएनए के मिलान से शादी प्रमाणित नहीं होती। महिला दावा किया था कि उसका विवाह 2003 में हुआ था और 2005 में उसे बेटा हुआ था। इसके बाद उनके रिश्ते बिगड़ गए और उसे पति ने घर से निकाल दिया। याची ने कहा कि उसका महिला से विवाह नहीं हुआ था और न ही बेटा उसका है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि आज के इस उन्नत युग में नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल सच्चाई का पता लगाने के लिए किया जाना चाहिए। डीएनए टेस्ट से महिला के गुजारा भत्ता दावे को भी निपटाने में आसानी होगी। ऐसे में फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
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