फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Lok Sabha Election 2024 Ground report Congress Kumari Selja and BJP Ashok Tanwar are in fray for Sirsa seat

ग्राउंड रिपोर्ट: विरासत को हाथ या कमल का साथ, इस सीट पर इन दो दिग्गजों के बीच कांटे का मुकाबला

Mon, 06 May 2024 09:21 AM IST
शाहरुख खान अमरनाथ प्रसाद, अमर उजाला, सिरसा
अमरनाथ प्रसाद, अमर उजाला, सिरसा Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 06 May 2024 09:21 AM IST
विज्ञापन
सार
हरियाणा की इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे का मुकाबला है। भाजपा प्रत्याशी को सत्ता विरोधी लहर को थामने में तो कांग्रेस प्रत्याशी कांग्रेसियों को एकजुट कर खोए हुए जनाधार को पाने में जुटीं हैं।
loader
Lok Sabha Election 2024 Ground report Congress Kumari Selja and BJP Ashok Tanwar are in fray for Sirsa seat
Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गेहूं की फसल कट चुकी है। गंगा रूपी घग्गर के किनारे अब सियासत की जमीन सींची जा रही है। प्रत्याशी जनसभाओं और रोड शो के जरिए वादों और इरादों से मतदाताओं को लुभाने में लगे हैं। चुनावी शोर के बीच मतदाता भी मुद्दों पर मुखर होने लगे हैं। किसान आंदोलन की कसक किसानों की जुबां पर है। न्यूनतम समर्थन मूल्य का मुद्दा अब भी गरम है।


टेंडर प्रक्रिया में विकास बाधित होने से सरपंच आहत हैं। कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा भी सुलग रहा है। यह स्थिति है पंजाब से सटे अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सिरसा संसदीय क्षेत्र की, जहां इंडिया गठबंधन से कांग्रेस की प्रत्याशी कुमारी सैलजा और भाजपा के उम्मीदवार अशोक तंवर के बीच सीधी लड़ाई है। 


सैलजा के सामने खोए हुए जनाधार को पाने का तो तंवर के समक्ष दोबारा कमल खिलाने की चुनौती है। सिरसा, फतेहाबाद और जींद जिले के नौ विधानसभा क्षेत्रों को समेटे इस लोकसभा क्षेत्र में हमने दो दिन में करीब 400 किलोमीटर सफर तय किया। चौपालों पर करीब 100 लोगों से बातचीत की। 

मतदाताओं के शुरुआती रुझान से ऐसा लगा कि भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है। दोनों ही दलों के प्रत्याशी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं, ऐसे में इस मुकाबला दिलचस्प है। फिलहाल भाजपा चुनावी प्रचार से मतदाताओं तक पहुंच बनाने में सबसे आगे है। मीनू बेनीवाल के पार्टी में शामिल होने से ऐलनाबाद में भाजपा की ताकत बढ़ी है।

हलोपा के साथ आने से सिरसा और आसपास के क्षेत्रों में तंवर के साथ ज्यादा लोग खड़े दिखाई देते हैं तो तंवर सत्ता विरोधी लहर से जूझते हुए भी नजर आ रहे हैं। वहीं, महज कुछ दिन पहले चुनाव मैदान में उतरीं कुमारी सैलजा की चर्चा भी हर जुबान पर है। 

 

वह सत्ता विरोधी लहर का लाभ उठाने की कोशिश कर रही हैं। चूंकि दोनों प्रत्याशी एक ही जाति और पृष्ठभूमि से हैं, इसलिए सबसे बड़ा अनुसूचित जाति का वोट बैंक बंटता नजर आ रहा है। हालांकि आधे मतदाता अभी असमंजस में हैं। रणदीप सुरजेवाला के प्रभाव वाले और जाट बहुल क्षेत्र नरवाना से भी सैलजा को समर्थन मिलता हुआ दिख रहा है। पूर्व डिप्टी सीएम चंद्रमोहन और पूर्व गृह मंत्री मनीराम गोदारा के परिवार के सैलजा के साथ हैं। 

भाजपा विधायक दुड़ाराम और कुलदीप बिश्नोई यदि अपनी ताकत झोंकते हैं तो बिश्नोई वोट बैंक का भी विभाजन तय है। नेता डेरों के फेरे लगा रहे हैं, लेकिन किसी भी डेरा प्रमुख ने किसी दल को खुला समर्थन नहीं दिया है। तंवर के दलबदल की तस्वीरें सोशल वायरल होने से उनकी छवि पर असर पड़ा है। जजपा के प्रदेश अध्यक्ष निशान सिंह समेत अन्य नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने और हुड्डा समर्थकों के साथ आने से कांग्रेस मजबूत दिख रही है। 
 

चर्चा है कि आम आदमी पार्टी का समर्थन मिलने से पंजाब से जुड़े क्षेत्रों में कांग्रेस को फायदा हो सकता है। भाजपा कार्यकर्ताओं को अब स्टार प्रचारकों से उम्मीदें हैं। जजपा और इनेलो प्रत्याशी प्रचार में उतने सक्रिय नहीं दिखे। इनेलो प्रत्याशी को उनके गृह क्षेत्र नरवाना और ऐलनाबाद विधायक अभय चौटाला के क्षेत्र में अच्छे वोट मिल सकते हैं। वहीं जजपा प्रत्याशी को लेकर किसी ने चर्चा नहीं की।

 

सिरसा से करीब 30 किलोमीटर दूर गांव जोधकां में चौपाल पर बैठे लोगों में केंद्र सरकार के खिलाफ सबसे अधिक गुस्सा दिखा। ओम प्रकाश, पवन आदि ने कहा कि आंदोलन के बावजूद न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के नाम पर कोरा आश्वासन मिला। किसान आंदोलन के समय लंबे समय तक कीलें लगाकर हाईवे बाधित करने से भी लोग नाराज दिखे। 

 

फतेहाबाद से करीब 25 किलोमीटर दूर हड़ौली में चौपाल पर बैठे लोग बताते हैं कि एक दशक में यहां कोई सांसद नहीं आया। भूना में सैलून संचालक प्रकाश बताते हैं कि अभी कोई प्रत्याशी यहां प्रचार करने नहीं आया है। दस दिन बाद चुनावी माहौल का पता चलेगा। 

सिरसा के मीरपुर गांव के सरपंच वेद प्रकाश का कहना है कि वह भाजपा से जुड़े हैं, लेकिन टेंडर प्रक्रिया की वजह से गांव में विकास हुआ ही नहीं। किस मुद्दे पर वोट मांगने जाएं। इस बार मोदी की लहर भी नहीं है। 25 मई को मतदान से एक सप्ताह पहले सरपंच एसोसिएशन इस संबंध में निर्णय लेगी। यूथ क्लब खैरकां से जुड़े नवजोत सिंह का मानना है कि ग्रुप सी-डी में हजारों युवाओं को बिना पर्ची-खर्ची नौकरी मिली है, ऐसे में ज्यादातर युवा भाजपा के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। 

 

डिंग मंडी में 35 साल से चाय की दुकान करने वाले चांदीराम अपनी पत्नी के इलाज में आयुष्मान कार्ड का लाभ नहीं मिलने की वजह से काफी व्यथित दिखे। चौधरी भजनलाल के गांव मोहम्मदपुर रोही में जगदीश चंद्र समेत अन्य लोग बताते हैं कि कांग्रेस और भाजपा में कांटे का मुकाबला है। पुरानी पेंशन बहाली संघर्ष समिति राज्य ऑडिटर के विजय भूना ने बताया कि हमने गांव-गांव में पुरानी पेंशन लागू करने वालों को ही वोट देने की मुहिम चला रखी है। जो दल पुरानी पेंशन बहाल करेगा उसी को कर्मचारी वर्ग का वोट मिलेगा।

 

सैलजा को आप ने दी है मजबूती
कुमारी सैलजा के पिता दलबीर सिंह सिरसा से चार बार सांसद चुने गए थे। उनकी विरासत को सैलजा ने संभाला और वह इस सीट से दो बार सांसद भी रहीं। वह जन्मजात कांग्रेसी हैं। क्षेत्र में उनकी छवि अच्छी है। यह सीट सबसे अधिक आठ बार कांग्रेस के पास रही। आम आदमी पार्टी ने भी समर्थन देकर मजबूती दी है। फिर भी उनके सामने कांग्रेस नेताओं को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती है। लंबे समय से सिरसा से दूरी बनाए रखने के कारण जनाधार को मजबूत बनाना कठिन है।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed