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Chandigarh News: सिर्फ एक बूंद खून से 40 से अधिक बीमारियों की होगी पहचान
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चंडीगढ़। अब खून की सिर्फ एक बूंद से 40 से अधिक आनुवांशिक और मेटाबॉलिक विकारों का प्रारंभिक पता लगाया जा सकेगा। जीएमसीएच-32 ने उन्नत डायग्नोस्टिक तकनीक की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए बायोकैमिस्ट्री विभाग में अत्याधुनिक लिक्विड क्रोमैटोग्राफी–टैन्डम मास स्पेक्ट्रोमेट्री (एलसीएमएस-एम एस/एम एस) मशीन स्थापित की है। इसका उद्घाटन स्वास्थ्य सचिव मनदीप सिंह बराड़ ने सोमवार को किया। इस तकनीक के साथ जीएमसीएच अब देश के उन चुनिंदा सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शामिल हो गया है जहां यह हाई-एंड डायग्नोस्टिक प्लेटफार्म उपलब्ध है। उत्तर भारत में भी ऐसे उन्नत केन्द्रों की संख्या बेहद सीमित है। यह प्रणाली सूक्ष्मतम स्तर पर बायोमार्कर्स और यौगिकों की पहचान करने में सक्षम है जिससे रोग निदान की सटीकता कई गुना बढ़ जाती है।
विभाग ने इस तकनीक के साथ विस्तृत नवजात मेटाबॉलिक स्क्रीनिंग कार्यक्रम भी शुरू किया है। अब आनुवांशिक और मेटाबॉलिक विकारों का प्रारंभिक पता लगाया जा सकेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जन्म के तुरंत बाद इन विकारों की पहचान होने से उच्च जोखिम वाले शिशुओं को समय पर उपचार मिल सकेगा जिससे गंभीर जटिलताओं की आशंका काफी कम हो जाएगी। इसके अलावा विभाग ने एंटी-एपिलेप्टिक दवाओं की थेराप्यूटिक ड्रग मॉनिटरिंग भी शुरू कर दी है।
उपचार योजनाओं को बेहतर ढंग से किया जा सकेगा तैयार
नई मशीन की सटीकता के कारण विभिन्न क्लीनिकल विभागों को मरीजों की दवाओं के स्तर का अधिक भरोसेमंद डेटा मिलेगा जिससे उपचार योजनाओं को बेहतर ढंग से तैयार किया जा सकेगा। अस्पताल प्रशासन के अनुसार नई सुविधा के शुरू होने से न केवल संस्थान की जांच क्षमता बढ़ेगी बल्कि मरीजों को बड़े अस्पतालों या निजी प्रयोगशालाओं पर निर्भरता भी कम होगी। उद्घाटन के बाद स्वास्थ्य सचिव ने लाइब्रेरी, ट्रॉमा सेंटर और अन्य यूनिट का भी निरीक्षण किया। मरीजों से भी बात की। इस दौरान जीएमसीएच के डायरेक्टर प्रिंसिपल प्रो. जीपी थामी भी मौजूद रहे।
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विभाग ने इस तकनीक के साथ विस्तृत नवजात मेटाबॉलिक स्क्रीनिंग कार्यक्रम भी शुरू किया है। अब आनुवांशिक और मेटाबॉलिक विकारों का प्रारंभिक पता लगाया जा सकेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जन्म के तुरंत बाद इन विकारों की पहचान होने से उच्च जोखिम वाले शिशुओं को समय पर उपचार मिल सकेगा जिससे गंभीर जटिलताओं की आशंका काफी कम हो जाएगी। इसके अलावा विभाग ने एंटी-एपिलेप्टिक दवाओं की थेराप्यूटिक ड्रग मॉनिटरिंग भी शुरू कर दी है।
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उपचार योजनाओं को बेहतर ढंग से किया जा सकेगा तैयार
नई मशीन की सटीकता के कारण विभिन्न क्लीनिकल विभागों को मरीजों की दवाओं के स्तर का अधिक भरोसेमंद डेटा मिलेगा जिससे उपचार योजनाओं को बेहतर ढंग से तैयार किया जा सकेगा। अस्पताल प्रशासन के अनुसार नई सुविधा के शुरू होने से न केवल संस्थान की जांच क्षमता बढ़ेगी बल्कि मरीजों को बड़े अस्पतालों या निजी प्रयोगशालाओं पर निर्भरता भी कम होगी। उद्घाटन के बाद स्वास्थ्य सचिव ने लाइब्रेरी, ट्रॉमा सेंटर और अन्य यूनिट का भी निरीक्षण किया। मरीजों से भी बात की। इस दौरान जीएमसीएच के डायरेक्टर प्रिंसिपल प्रो. जीपी थामी भी मौजूद रहे।
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