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महिला कांस्टेबल मौत मामले में जांच शत्रुजीत कपूर की निगरानी में हो : हाईकोर्ट

Wed, 14 Dec 2016 01:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 14 Dec 2016 01:31 AM IST
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Investigartion should be in front of Shatrujeet Kapoor in women constables death case:  Highcourt
हाईकोर्ट - फोटो : file photo

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी पुलिस की महिला कांस्टेबल की करनाल ले जाकर की गई हत्या के मामले में हरियाणा पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जांच की शैली सही नहीं है।

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ऐसे में हरियाणा के पूर्व एडीजीपी क्राइम शत्रुजीत कपूर की देखरेख में ही इस जांच को पूरा करवाया जाना सही रहेगा। बैंच ने कहा कि जब शत्रुजीत मामले की निगरानी कर रहे थे, उस समय जांच सही थी। 
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कोर्ट के आदेशों के अनुरूप मंगलवार को शत्रुजीत कोर्ट में मौजूद थे। कोर्ट की टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि वो अब बिजली निगम के चैयरमैन हैं और वे इस मामले को नहीं देख रहे। इस पर कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच कोई भी करे, लेकिन जांच की निगरानी तो शत्रुजीत कपूर ही करेंगे। 
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इसके साथ ही हाईकोर्ट ने जांच को पूरा करने के लिए दो माह का समय देते हुए मामले की सुनवाई को 21 फरवरी तक के लिए टाल दिया है। चंडीगढ़ पुलिस की महिला कांस्टेबल दो दिन की छुट्टी लेकर करनाल गई थी। 

'कपूर के जांच से हटते ही जांच की दशा दिशा बदल रही है'

Investigartion should be in front of Shatrujeet Kapoor in women constables death case:  Highcourt
अदालत - फोटो : file

उसके बाद से ही वह लापता थी। इसके बाद उसके पिता ने पुलिस को इसकी शिकायत दी, परंतु पुलिस ने केस को अनट्रेस घोषित कर दिया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। 

हाईकोर्ट ने 2 माह में जांच पूरी करने को कहा। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद एसआईटी गठित हुई और इस दौरान महिला कांस्टेबल की कॉल डिटेल और लोकेशन तलाशी गई। इसके बाद से ही सारी परते खुलनीं शुरू हुईं। 

एसआईटी ने मामले में आरोपी एक कांस्टेबल को गिरफ्तार किया। इसके बाद पुलिस का दावा था कि कांस्टेबल ने हत्या का जुर्म कबूल किया है। 

बावजूद इसके शव न मिलने के चलते पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने एडीजीपी क्राइम को तलब किया था। एडीजीपी क्त्रसइम ने बेस्ट ऑफिसर लेकर एसआईटी बनाई थी जिसे हाईकोर्ट में अपनी जांच का परिणाम सौंपना था, लेकिन जांच हाईकोर्ट में नहीं सौंपी गई।

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