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Chandigarh News: किस गोशाला में कितने लावारिस पशु, हाईकोर्ट ने पंचकूला के डीसी से मांगा जवाब
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चंडीगढ़। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद लावारिस पशुओं के सड़कों पर घूमने को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंचकूला के डीसी से पूछा है कि शहर की किस गोशाला में कितने लावारिस पशु हैं। सुनवाई के दौरान डीसी ने बताया था कि एक जनवरी से 31 अगस्त तक 1088 पशुओं को पकड़ कर गोशाला पहुंचाया गया है।
मुख्य याचिका दाखिल करते हुए सिटीजन कमेटी हाउस ऑनर्स ने एडवोकेट प्रशांत गुप्ता के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि पंचकूला सहित पंचकूला एक्सटेंशन में लावारिस पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस बढ़ती संख्या के चलते लोगों का सड़क पर चलना तक मुश्किल हो गया है। संबंधित विभाग को इस बारे में कई बार शिकायत दी गई, लेकिन कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई। अक्सर इस प्रकार घूमते पशु सड़क हादसों का कारण बनते हैं और ऐसे में इन्हें यहां से कहीं भेजा जाना चाहिए।
इनके लिए गोशाला का निर्माण कर इन्हें वहां रखने का इंतजाम किया जाना चाहिए, लेकिन निगम ऐसा करने में विफल रहा है। याची ने बताया कि उन्होंने नगर निगम आयुक्त को इस संदर्भ में मांगपत्र भी सौंपा था, लेकिन इस मांगपत्र पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया। ऐसे में अब याची के पास हाईकोर्ट की शरण लेने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचा। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद इस याचिका का निपटारा करते हुए स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वह याची की मांग पर विचार करने के बाद उचित निर्णय लेकर कार्रवाई करें। कार्रवाई न होने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई थी।
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मुख्य याचिका दाखिल करते हुए सिटीजन कमेटी हाउस ऑनर्स ने एडवोकेट प्रशांत गुप्ता के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि पंचकूला सहित पंचकूला एक्सटेंशन में लावारिस पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस बढ़ती संख्या के चलते लोगों का सड़क पर चलना तक मुश्किल हो गया है। संबंधित विभाग को इस बारे में कई बार शिकायत दी गई, लेकिन कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई। अक्सर इस प्रकार घूमते पशु सड़क हादसों का कारण बनते हैं और ऐसे में इन्हें यहां से कहीं भेजा जाना चाहिए।
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इनके लिए गोशाला का निर्माण कर इन्हें वहां रखने का इंतजाम किया जाना चाहिए, लेकिन निगम ऐसा करने में विफल रहा है। याची ने बताया कि उन्होंने नगर निगम आयुक्त को इस संदर्भ में मांगपत्र भी सौंपा था, लेकिन इस मांगपत्र पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया। ऐसे में अब याची के पास हाईकोर्ट की शरण लेने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचा। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद इस याचिका का निपटारा करते हुए स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वह याची की मांग पर विचार करने के बाद उचित निर्णय लेकर कार्रवाई करें। कार्रवाई न होने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई थी।
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