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Punjab Budget: पंजाब की नई कृषि नीति और बजट पर टिकी किसानों की उम्मीद, किसान नेताओं ने मांगा अलग कृषि बजट
Tue, 28 Feb 2023 04:24 PM IST
निवेदिता वर्मा
शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, चंडीगढ़
शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 28 Feb 2023 04:24 PM IST
सार
आप सरकार ने सत्ता संभालने के बाद 27 जून 2022 को सरकार का आंशिक बजट प्रस्तुत किया था, जिसमें कृषि क्षेत्र के लिए 11,560 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव रखा गया था। इनमें से सरकार की ओर से किए गए कुछ वादे तो पूरे हो गए लेकिन कुछ वादे अभी अधूरे हैं।
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पंजाब के खेत में किसान (फाइल फोटो)
- फोटो : (फाइल फोटो)
विस्तार
पंजाब सरकार का वार्षिक बजट सत्र आगामी 3 मार्च से संभावित है। ऐसे में पंजाब के किसानों की उम्मीद आप सरकार की नई कृषि नीति और बजट में कृषि के लिए किए जाने वाले प्रावधान पर टिक गई है। 31 मार्च तक आ रही पंजाब सरकार की नई कृषि नीति का राज्य के करीब पौने दो करोड़ किसानों को बेसब्री से इंतजार है। किसान नेताओं ने जहां अलग कृषि बजट की मांग की है, वहीं अलग से कृषि उद्योग स्थापित करने की वकालत भी।
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आप सरकार ने सत्ता संभालने के बाद 27 जून 2022 को सरकार का आंशिक बजट प्रस्तुत किया था, जिसमें कृषि क्षेत्र के लिए 11,560 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव रखा गया था। इनमें से सरकार की ओर से किए गए कुछ वादे तो पूरे हो गए लेकिन कुछ वादे अभी अधूरे हैं। पंजाब सरकार के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की ओर से पेश किए गए आंशिक बजट में किसानों को ट्यूबवेल पर मुफ्त बिजली देने का एलान किया गया था, जिसे सरकार ने शुरुआती चरण में पूरा कर लिया। हालांकि आम लोगों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देना आप सरकार के घोषणा पत्र में शामिल था, जिसे भगवंत मान सरकार ने बिना किसी शर्त पूरा किया। वहीं मूंग की खेती पर एमएसपी लागू करने की घोषणा भी सरकार के बजट का हिस्सा थी, जिसे आप सरकार की ओर से पूरा किया। इसके अलावा गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 360 से बढ़ाकर 380 रुपये करने से किसानों को राहत दिलाई।
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दूसरी ओर पंजाब की सबसे बड़ी समस्या पराली के समाधान में पंजाब सरकार को उतनी सफलता नहीं मिल पाई। भारी भरकम बजट जारी करने के बावजूद पंजाब में पराली जलती रही और पंजाब समेत दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक जा पहुंचा। गौर हो कि राज्य सरकार ने पराली के प्रबंधन के लिए राज्य की ओर से 200 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव रखा था, वहीं केंद्र की ओर से पंजाब को 2018-19 से 2022-23 की अवधि के लिए कुल 1426.45 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी। इस राशि से पंजाब ने व्यक्तिगत तौर पर किसानों और राज्य में स्थापित 23500 से अधिक कस्टम हायरिंग केंद्रों को 1.10 से अधिक मशीनरी प्रदान की। उसके बावजूद पंजाब से पराली जलाने की समस्या को पूरी तरह से खत्म करना अभी दूर की कौड़ी है। आगामी बजट में किसानों को इसके प्रबंधन के लिए किसी ठोस नीति का इंतजार है।
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निवेश बढ़ाने के लिए अलग हो कृषि बजट
पंजाब में निवेश बढ़ाने के लिए अलग कृषि बजट होना चाहिए। विविधीकरण के लिए सरकार को सभी कृषि फसलों के सुनिश्चित बाजार के साथ-साथ डॉ. स्वामीनाथन के फार्मूले सी2 प्लस 50 प्रतिशत के अनुसार लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना चाहिए। इसके अलावा जलवायु और ताप प्रतिरोधी बीजों का आविष्कार किया जाना चाहिए। एक एकड़ को इकाई मानकर फसल बीमा कराया जाए और खर्च सरकार वहन करे। किसानों का कर्ज माफ किया जाए। किसानों और कृषि श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के रूप में प्रति माह 10,000 रुपये दिए जाएं। राज्य में कृषि उद्योग स्थापित किया करने के अलावा घटते भूमिगत जल को बचाने के लिए रिचार्जिंग की व्यवस्था हो। साथ ही नहर का पानी पूरी खेती की जमीन को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। - प्रेम सिंह भंगू, प्रधान ऑल इंडिया किसान फेडरेशन
2021-22 के लिए इन मदों में इतना था प्रावधान
योजना राशि (करोड़ रुपये में)
इंडिविजुअल क्विक फ्रीजिंग 7
अपवाह जल संरक्षण 21
धान की सीधी बुवाई 450
पराली प्रबंधन 200
मूंग की खेती 66
कुल कृषि बजट 11,560