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हरियाणाः जेई सिविल की प्रमोशन के लिए जूनियर बनाए सीनियर, प्रभावित सुपरवाइजर पहुंचे हाईकोर्ट

Tue, 09 Jul 2019 11:18 AM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 09 Jul 2019 11:18 AM IST
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haryana junior engineers promotion in controversy, petition in punjab haryana high court
फाइल फोटो
हरियाणा लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) जेई सिविल के पद पर कर्मचारियों की प्रमोशन करने को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में घिर गया है। विभाग ने 25 मई 2016 को तैयार संभावित वरिष्ठता सूची पर आपत्तियां मांगे बिना ही सात फरवरी 2018 को प्रमोशन प्रक्रिया शुरू कर दी। जबकि, वरिष्ठता क्रम एक से चालीस में शामिल कर्मचारियों में से अनेक रिटायर हो चुके थे। इसके अलावा सूची में अनेक जूनियर कर्मियों को सीनियर दिखाया गया था।
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वरिष्ठता सूची को दुरुस्त कर अगर प्रमोशन प्रक्रिया शुरू की जाती तो रिटायर्ड कर्मी निकल जाते और जूनियर के बजाए पहले सीनियर को ही पदोन्नति मिलती। वरिष्ठता सूची में 55 जूनियर वर्क सुपरवाइजर, वर्क इंस्पेक्टर, वर्क मुंशी, वर्क मिस्त्री, मोर्टार मेट और सर्वेयर को सीनियर दर्शाने पर हाईकोर्ट ने विभाग के खिलाफ कड़ा रुख दिखाया है। हाईकोर्ट ने विभाग के एसीएस, इंजीनियर इन चीफ, अधीक्षण अभियंता, चंडीगढ़ सर्कल, अधिशाषी अभियंता निर्माण डिवीजन सहित 59 कर्मचारियों को नोटिस भेजा है। एसीएस और अधिशाषी अभियंता का नोटिस तो सरकारी वकील ने स्वीकार भी कर लिया।
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हाईकोर्ट ने बीते 3 जुलाई को याचिका की सुनवाई करते हुए कहा, यह बड़ी हैरानी की बात है कि याचिकाकर्ता अशोक चौधरी की शिकायत इतने लंबे समय से लंबित है। अधिकारियों ने इस पर ध्यान तक नहीं दिया। इसी देरी की वजह से याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। विभाग की ओर से याचिका पर जो हलफनामा दाखिल किया गया, उसमें भी देरी के कारण को स्पष्ट नहीं किया गया है। ऐसे में अब हाईकोर्ट उन अधिकारियों पर जुर्माना लगाने से भी पीछे नहीं हटेगा, जो इसके लिए दोषी हैं, और जुर्माने की राशि अधिकारियों की जेब से वसूली जाएगी।
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ऐसे हाईकोर्ट पहुंचा मामला

संभावित वरिष्ठता सूची में जूनियर को सीनियर दिखाने पर अधिशाषी अभियंता निर्माण डिवीजन के वर्क सुपरवाइजर अशोक चौधरी ने पहली जुलाई 2019 को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले 7 अगस्त 2018 को अशोक ने विभाग के पास आपत्ति जताई थी कि वरिष्ठता सूची में उनका नंबर 137 दिखाया गया है, जबकि बनता 43 है। उनके आगे अनेक कर्मचारी जूनियर हैं, जो सीनियर दिखाए गए हैं।

इसलिए वरिष्ठता सूची को दुरुस्त किया जाए। विभाग ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद अशोक ने 7 दिसंबर 2018 को दूसरी बार आपत्ति जताई, लेकिन विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। थकहार कर अशोक ने 13 अप्रैल 2019 को विभाग के उच्च अधिकारियों को कानूनी नोटिस भिजवाया, जिस पर न तो कोई कार्रवाई हुई, न ही विभाग ने कोई जवाब दिया। इसके बाद अशोक ने आखिर में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2019 को होगी। 
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