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हरियाणा विसः नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी के लिए बैकफुट पर खेलकर बाजी जीतना चाहती है जजपा
Sat, 23 Feb 2019 10:40 AM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 23 Feb 2019 10:40 AM IST
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Dushyant chautala
- फोटो : अमर उजाला
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नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को लेकर चल रहा बवाल अभी थमा नहीं है। इस मामले में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) से अलग हुई जनहित जनता पार्टी (जजपा) बैकफुट पर खेलते हुए बाजी का जीतना चाहती है। जजपा समर्थित विधायक चाहते हैं कि किसी तरह इनेलो से नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला की कुर्सी भी खिसक जाए और उनकी विधानसभा सदस्यता भी बरकरार रह जाए। इसके लिए सदन में जजपा समर्थित विधायकों की नेता नैना चौटाला ने शुक्रवार को गेंद विधानसभा स्पीकर के पाले में डाल दी। उधर, कांग्रेस का निशाना भी अभय चौटाला जरूर है, लेकिन वे भी इस बारे में खुलकर मोर्चा खोलने को तैयार नहीं है।
गौरतलब है कि विधानसभा में इनेलो के 19 विधायक थे, जिसमें से 2 विधायक हरिचंद मिड्डा व जसविंद्र संधू का निधन हो चुका है और कुनबे में फूट के बाद 4 विधायक नैना चौटाला, राजदीप फौगाट, अनूप धानक और पिरथी सिंह नंबरदार इनेलो से किनारा कर चुके हैं। इसके बाद अब सदन में इनेलो समर्थित विधायकों की संख्या 13 रह गई है। दूसरी ओर, विधानसभा में कांग्रेस के 17 विधायक है। लेकिन इसके बावजूद अभी भी सदन में नेता प्रतिपक्ष का पद इनेलो विधायक अभय चौटाला के ही पास है। जजपा समर्थित विधायक यह चाहते हैं कि अभय चौटाला से यह पद छिन जाए।
लेकिन उन्होंने अभी तक इसके लिए विधानसभा स्पीकर को यह लिखकर नहीं दिया है कि उन्होंने विधानसभा में इनेलो से समर्थन वापस ले लिया है। राजनीतिक जानकारों की माने तो जजपा के समर्थित विधायक यदि विधानसभा में इनेलो से समर्थन वापस लेने की बात स्पीकर को लिखकर देते हैं, तो सदन में उनकी सदस्यता पर भी खतरा हो सकता है, क्योंकि दल बदल एक्ट के तहत उनके पास एक तिहाई यानी 6 विधायकों का संख्या बल होना चाहिए, मगर उनके पाले में अभी सिर्फ 4 विधायक हैं। इसलिए ऐसा करने से उनकी सदस्यता पर दल-बदल एक्ट की अवहेलना संबंधी तलवार लटक सकती है।
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इसी के चलते जजपा समर्थित नैना चौटाला ने कहा कि वे स्पीकर को कुछ भी लिखकर नहीं देंगे। इनेलो चाहे तो उन्हे पार्टी से निकाल दे। उनके अनुसार स्पीकर महोदय खुद देखना चाहिए कि अब सदन में इनेलो और कांग्रेस के विधायकों की संख्या बराबर यानी 17-17 हैं, इसलिए उन्हे नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी केलिए टॉस करवाना चाहिए। उधर, कांग्रेस से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि स्पीकर खुद संज्ञान लेते हुए या तो सदन में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी के लिए वोटिंग करवा लें या फिर नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला को इस पूरे प्रकरण के चलते खुद ही नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें वोटिंग करवाने केलिए कुछ भी लिखित में देने की जरूरत नहीं है।
उनके पास इस पूरे प्रकरण में अभी तक कुछ भी लिखित में नहीं आया है और जब तक कुछ लिखित में नहीं आएगा, वे आगामी कोई कार्रवाई नहीं करेंगे।’
- कंवरपाल, विधानसभा स्पीकर, हरियाणा
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गौरतलब है कि विधानसभा में इनेलो के 19 विधायक थे, जिसमें से 2 विधायक हरिचंद मिड्डा व जसविंद्र संधू का निधन हो चुका है और कुनबे में फूट के बाद 4 विधायक नैना चौटाला, राजदीप फौगाट, अनूप धानक और पिरथी सिंह नंबरदार इनेलो से किनारा कर चुके हैं। इसके बाद अब सदन में इनेलो समर्थित विधायकों की संख्या 13 रह गई है। दूसरी ओर, विधानसभा में कांग्रेस के 17 विधायक है। लेकिन इसके बावजूद अभी भी सदन में नेता प्रतिपक्ष का पद इनेलो विधायक अभय चौटाला के ही पास है। जजपा समर्थित विधायक यह चाहते हैं कि अभय चौटाला से यह पद छिन जाए।
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लेकिन उन्होंने अभी तक इसके लिए विधानसभा स्पीकर को यह लिखकर नहीं दिया है कि उन्होंने विधानसभा में इनेलो से समर्थन वापस ले लिया है। राजनीतिक जानकारों की माने तो जजपा के समर्थित विधायक यदि विधानसभा में इनेलो से समर्थन वापस लेने की बात स्पीकर को लिखकर देते हैं, तो सदन में उनकी सदस्यता पर भी खतरा हो सकता है, क्योंकि दल बदल एक्ट के तहत उनके पास एक तिहाई यानी 6 विधायकों का संख्या बल होना चाहिए, मगर उनके पाले में अभी सिर्फ 4 विधायक हैं। इसलिए ऐसा करने से उनकी सदस्यता पर दल-बदल एक्ट की अवहेलना संबंधी तलवार लटक सकती है।
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इसी के चलते जजपा समर्थित नैना चौटाला ने कहा कि वे स्पीकर को कुछ भी लिखकर नहीं देंगे। इनेलो चाहे तो उन्हे पार्टी से निकाल दे। उनके अनुसार स्पीकर महोदय खुद देखना चाहिए कि अब सदन में इनेलो और कांग्रेस के विधायकों की संख्या बराबर यानी 17-17 हैं, इसलिए उन्हे नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी केलिए टॉस करवाना चाहिए। उधर, कांग्रेस से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि स्पीकर खुद संज्ञान लेते हुए या तो सदन में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी के लिए वोटिंग करवा लें या फिर नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला को इस पूरे प्रकरण के चलते खुद ही नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें वोटिंग करवाने केलिए कुछ भी लिखित में देने की जरूरत नहीं है।
उनके पास इस पूरे प्रकरण में अभी तक कुछ भी लिखित में नहीं आया है और जब तक कुछ लिखित में नहीं आएगा, वे आगामी कोई कार्रवाई नहीं करेंगे।’
- कंवरपाल, विधानसभा स्पीकर, हरियाणा