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Corona Commando रुचिका बोलीं- महामारी को मिलकर हराएंगे, खुश हूं देशसेवा का मौका मिला
Sat, 16 May 2020 01:59 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2020 01:59 PM IST
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कोरोना कमांडो रुचिका
- फोटो : अमर उजाला
अगर आप देश के लिए कुछ कर रहे हैं तो अलग ही सुकून मिलता है। जिंदगी की डोर ऊपर वाले के हाथ पर है। देश की रक्षा के लिए जवान भी सरहद पर खड़ा रहता है तो हम अपने फर्ज से क्यों पीछे हटें। यह कहना है पीजीआई के कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल की आईसीयू में ड्यूटी करने वाली नर्सिंग ऑफिसर रुचिका का। रुचिका हिमाचल प्रदेश के मनाली की रहने वाली हैं।
उन्होंने कहा कि कोरोना मरीज समाज के उनके प्रति रवैया से परेशान हो चुके हैं। इसलिए उन्हें प्यार से समझाने और जागरूक करने की आवश्यकता है। उन्होंने नोटिस किया की बात करने पर मरीज जल्दी गुस्सा कर जाते हैं। जब उन्होंने मरीज को प्यार से समझाना शुरू किया तो मरीज उनकी ड्यूटी का एक-एक दिन गिन कर रहे थे। आखरी दिन मरीजों ने उनका तालियां बजाकर धन्यवाद किया और स्पीच भी दी। तब उन्हें खुद पर बहुत गर्व महसूस हुआ।
तीन महीने से घर नहीं गई
उन्होंने बताया कि वह पिछले 3 महीने से घर नहीं गई हैं। उनके माता-पिता की तबीयत खराब रहती है। उसके बाद भी वह अपनी सेवाएं देने से पीछे नहीं हटी। उन्होंने कहा कि जब कोरोना पेशेंट के वार्ड में ड्यूटी लगी तो पहले वह काफी घबरा रही थी। उन्हें मरीज के साथ नॉर्मल होने में 2 दिन का समय लगा। उन्होंने स्थिति को समझा और मरीज को उसी प्रकार से हैंडल किया। अभी उनको क्वांरटींन किया गया है। शनिवार को उनका चौथा दिन है। अगले 11 दिन तक वह क्वांरटीन रहेंगी।
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मां-पिता को मिस करती हूं
रुचिका ने बताया कि पिछले 3 महीनों में उन्होंने अपनी माता-पिता को बहुत याद किया है। जब भी उन्हें अपनी मां की याद आती है वह वीडियो कॉल से अपनी मां के साथ बात करती हैं। उन्होंने बताया कि 7 दिन ड्यूटी करते समय भी वह अपनी मां से लगातार बात करती थी।
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उन्होंने कहा कि कोरोना मरीज समाज के उनके प्रति रवैया से परेशान हो चुके हैं। इसलिए उन्हें प्यार से समझाने और जागरूक करने की आवश्यकता है। उन्होंने नोटिस किया की बात करने पर मरीज जल्दी गुस्सा कर जाते हैं। जब उन्होंने मरीज को प्यार से समझाना शुरू किया तो मरीज उनकी ड्यूटी का एक-एक दिन गिन कर रहे थे। आखरी दिन मरीजों ने उनका तालियां बजाकर धन्यवाद किया और स्पीच भी दी। तब उन्हें खुद पर बहुत गर्व महसूस हुआ।
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तीन महीने से घर नहीं गई
उन्होंने बताया कि वह पिछले 3 महीने से घर नहीं गई हैं। उनके माता-पिता की तबीयत खराब रहती है। उसके बाद भी वह अपनी सेवाएं देने से पीछे नहीं हटी। उन्होंने कहा कि जब कोरोना पेशेंट के वार्ड में ड्यूटी लगी तो पहले वह काफी घबरा रही थी। उन्हें मरीज के साथ नॉर्मल होने में 2 दिन का समय लगा। उन्होंने स्थिति को समझा और मरीज को उसी प्रकार से हैंडल किया। अभी उनको क्वांरटींन किया गया है। शनिवार को उनका चौथा दिन है। अगले 11 दिन तक वह क्वांरटीन रहेंगी।
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मां-पिता को मिस करती हूं
रुचिका ने बताया कि पिछले 3 महीनों में उन्होंने अपनी माता-पिता को बहुत याद किया है। जब भी उन्हें अपनी मां की याद आती है वह वीडियो कॉल से अपनी मां के साथ बात करती हैं। उन्होंने बताया कि 7 दिन ड्यूटी करते समय भी वह अपनी मां से लगातार बात करती थी।